दैनिक भास्कर हिंदी: महापौर संदीप जाेशी और उपमहापौर मनीषा कोठे का कार्यकाल समाप्त 

December 22nd, 2020

डिजिटल डेस्क, नागपुुर। महापौर संदीप जोशी और उपमहापौर मनीषा कोठे ने सोमवार को मनपा आयुक्त राधाकृष्णन बी. को अपना इस्तीफा सौंपा। पार्टी द्वारा महापौर-उपमहापौर का सवा-सवा साल (13-13 महीने) का कार्यकाल तय किया गया था। इस अनुसार 22 दिसंबर को 13 महीने पूरे हो रहे हैं। विधानपरिषद चुनाव में हार से निराश महापौर संदीप जोशी ने सोमवार को अपने इस्तीफे की घोषणा की। फिलहाल इस्तीफा देने के बाद वे कार्यवाह महापौर बने रहेंगे। आगामी मनपा सभागृह में नए महापौर के तौर पर दयाशंकर तिवारी की घोषणा की जाएगी। दयाशंकर तिवारी को पदभार सौंपने के बाद वे अपने पद से मुक्त होंगे। फिलहाल नए उपमहापौर के नाम पर पार्टी में सहमति नहीं बनी है। जल्द बैठक लेकर उपमहापौर का भी चयन किया जाएगा। नए महापौर और उपमहापौर दोनों आगामी 2022 में मनपा चुनाव तक पद पर बने रहेंगे। 

लेखा-जोखा पेश किया

इस्तीफा देने से  पहले पत्र-परिषद लेकर महापौर संदीप जोशी ने 13 महीने में किए गए कार्यों का लेखा-जोखा पेश किया। उन्होंने अनेक कार्यों को गिनाते हुए कहा कि पार्टी ने जो आदेश दिया है, उस मुताबिक मैं इस्तीफा दे रहा हूं। हालांकि 13 महीने में किए गए कार्य पर पूरा संतोष नहीं है। अभी बहुत कुछ करना था। कोविड के कारण लगे लॉकडाउन के कारण नहीं कर पाया। नए महापौर दयाशंकर तिवारी को साथ लेकर इन कामों को पूरा करूंगा। तिवारी के हाथ मजबूत करने में मदद करूंगा।

विधानपरिषद चुनाव में करारी हार और अन्य वर्ग के वोट नहीं मिलने के पूछे गए प्रश्न पर महापौर जोशी ने कहा कि भाजपा पहले वाली पार्टी नहीं रही, जिसे सिर्फ सवर्णों के वोट मिलते थे। अब वह सभी धर्म और संप्रदाय की पार्टी है। अगर ऐसा नहीं होता तो चुनाव में 42 हजार वोट नहीं मिलते थे। हार की वजह पूछने पर उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद कोविड की चपेट में आ गया। कल 14 दिन पूरे होने के बाद आज बाहर निकला हूं। अभी काफी कमजोरी है। इसलिए इस बारे में विचार नहीं किया है। इस पर बोलूंगा पर अभी नहीं। अगले 15 दिन में संपूर्ण वस्तुस्थिति और कारणों को सबके सामने रखूंगा। 

आगामी मनपा चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा पर संदीप जोशी ने कहा कि वे अपने फैसले पर कायम हैं। उन्हें विधानपरिषद का टिकट मिलेगा, इसके लिए यह घोषणा नहीं की थी। इसकी घोषणा काफी पहले कर दी थी, जिसका विधानपरिषद से कोई संबंध नहीं था। भविष्य की योजना पर उन्होंने कहा कि वे भाजपा के सामान्य कार्यकर्ता के तौर पर काम करते रहेंगे। पार्टी ने बहुत कुछ दिया है। दो बार स्थायी समिति सभापति, महापौर, विधानपरिषद चुनाव का टिकट। मेरे खून, दिमाग में भाजपा है। मैं यहीं रहूंगा, यहीं जिया है और यहीं संघर्ष करूंगा। पार्टी के लिए पूरी तरह समर्पित रहूंगा।      

मुंढे का चुनाव पर परिणाम नहीं 

विधानपरिषद चुनाव की हार को तुकाराम मुंढे से जोड़कर देखे जाने पर महापौर जोशी ने कहा कि यह गैर-समझ है। इसका आधा प्रतिशत भी असर नहीं हुआ है। यह राजनीति है, जिसे करनी थी वह कर रहे हैं। हालांकि अभी मुंढे के विषय पर बोलने की जरूरत नहीं है। मेरा उनसे कोई व्यक्तिगत मतभेद नहीं था। उनकी एकाधिकार शाही चल रही थी। अनेक बार उन्हें इससे अवगत कराया गया। जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो सामने आना पड़ा। मैंने तीन आयुक्त के साथ काम किया। अभिजीत बांगर, तुकाराम मुंढे और राधाकृष्णन बी.। निकाय संस्था में पदाधिकारी और अधिकारी एक गाड़ी के दो पहिये हैं। दोनों को साथ चलकर काम करना होता है।

ओसीडब्ल्यू की जांच पर महापौर जोशी का सरकार पर पलटवार

राज्य सरकार ने ओसीडब्ल्यू के कार्यों की जांच के निर्देश दिए हैं। सरकार की इस भूमिका पर महापौर संदीप जोशी ने पलटवार किया है। जोशी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार ने ओसीडब्ल्यू की प्रशंसा कर उसे पुरस्कृत किया था। अब उन्हीं की महाविकास आघाड़ी सरकार ओसीडब्ल्यू की जांच कर रही है। हम इसके लिए तैयार हैं। उन्हें कुछ नहीं मिलेगा।  सरकार बेशक जांच करे, लेकिन विकास कार्य न रोके। सरकार अप्रत्यक्ष रूप से अब शहर के विकास कार्य रोकने की कोशिश कर रही है। साई (स्पोटर्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के प्रोजेक्ट को भी रोकने का प्रयास शुरू है। भविष्य में अनेक ऐसे उदाहरण देखने मिलेंगे। 2012 में भी इस तरह के प्रयास हो चुके हैं। कभी आयुक्त के माध्यम से, कभी अन्य साधनों का इस्तेमाल कर विकास कार्य रोकते रहे हैं। आयुक्त ने अभी तक मनपा स्थायी समिति के बजट का क्रियान्वयन शुरू नहीं किया। यह इसी का असर है। सरकार शहर का विकास रोक रही है। इसका ठीकरा भाजपा पर फोड़ने की तैयारी कर रही है। 

 

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