दैनिक भास्कर हिंदी: गोरेवाड़ा बायोपार्क में 40 पेड़ों का री-ट्रांसप्लांट, 2225 का है टारगेट

December 6th, 2017

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  प्रोजेक्ट को साकार करने के लिए एफडीसीएम ने   40वृक्षों को क्षति पहुंचाए बिना री-ट्रांसप्लांट किया है। अक्सर देखा जाता है कि प्रोजेक्ट को साकार करते समय बीच में आने वाले पेड़ों को धराशायी कर दिया जाता है, लेकिन गोरेवाड़ा बायोपार्क में इन दिनों प्रोजेक्ट की नई इमारतें साकार करने की राह में आने वाले पेड़ों को काटने की जरूरत नहीं पड़ी, बल्कि पूरा का  पूरा हरा भरा पेड़ जड़ सहित नई जगह में री-ट्रांसप्लांट अर्थात दोबारा लगाया जा चुका है। इसके लिए एफडीसीएम (फॉरेस्ट डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ महाराष्ट्र) ने वॉल्वो कंपनी की ट्रांसप्लांटर मशीन के सहयोग से करीब 40 पेड़ों को उनकी जगह से जड़ समेत उखाड़कर दूसरी जगह फिर से लगा दिया है। परियोजना में इस प्रक्रिया के तहत 2225 पेड़ों को री-ट्रांसप्लांट करने का लक्ष्य है। इस तरह का प्रयोग छत्तीसगढ़ और झारखंड में कोयला खदानों में भी अपनाया जा रहा है, जहां उत्खनन शुरू करने से पहले पेड़ों को स्थानांतरित करने के िलए यह मशीन उपयोग में लाई जा रही है। 

गोरेवाड़ा जू की तैयारी

एफडीसीएम के प्रबंध निदेशक यू.के. अग्रवाल ने बताया कि, एफडीसीएम ने स्वीडन की कंपनी के साथ ऑपरेशन के लिए महीने भर के समझौते पर करार किया है। इसके तहत राज्य में पहली बार वृक्ष स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू करते समय बिना नुकसान के एक पेड़ को दूसरे जगह ट्रांसप्लांट किया गया है। गोरेवाड़ा परियोजना 954 हेक्टेयर जमीन पर गोरेवाड़ा प्राणी संग्रहालय को विकसित कर रहा है और योजना के तहत प्रशासकीय इमारत, कैफेटेरिया, अन्य इमारत, इंडियन सफारी, अफ्रीकन सफारी, नाइट सफारी, पक्षियों को रखने के िलए पिंजरे को तैयार किया जा रहा है, लेकिन इनको साकारने की राह में ये पेड़ आड़े आ रहे थे। एक पेड़ को एक जगह से दूसरी जगह लगाने के िलए पहले जेसीबी मशीन से गड्ढा खोदकर तैयार रखना होता है। इसके बाद ट्रांसप्लांटर मशीन पेड़ को जड़ों के अापसी नेटवर्क को बिगाड़े बिना उसे नियोजित जगह पर खोदे गए गड्ढे में रोप देता है। इस प्रक्रिया में पेड़ जड़ समेत उखाड़ने के िलए 15 मिनट और दोबारा लगाने के िलए 15 मिनट इस प्रकार एक पेड़ को स्थानांतरित करने के िलए 30 मिनट का समय लगता है। पेड़ लगाने के बाद उसका जीपीएस लोकेशन भी लिया जाता है। इस दौरान नियोजन के मुख्य महाव्यवस्थापक अशरफ, प्रबंधक मुकेश गणात्रा, सहायक वनसंरक्षक एच.वी. माडभुशी, आर.पी. भिवगडे, वर्षा खरमाटे उपस्थित थे।