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दूसरे को शव देने के मामले में अस्पताल के दो कर्मचारी निलंबित, परिजन ने लगाया किडनी निकालने का आरोप

दूसरे को शव देने के मामले में अस्पताल के दो कर्मचारी निलंबित, परिजन ने लगाया किडनी निकालने का आरोप

डिजिटल डेस्क, मुंबई। महानगर पालिका के लोकमान्य तिलक (सायन) अस्पताल ने इलाज के दौरान जान गंवाने वाले व्यक्ति का शव किसी और को सौंपने के मामले में गलती स्वीकार करते हुए शवगृह में तैनात दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। लेकिन अस्पताल में किडनी रैकेट चलाए जाने के आरोपों को मनपा ने पूरी तरह गलत बताया है। मुंबई महानगर पालिका की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि 28 अगस्त को हादसे के बाद सायन अस्पताल में भर्ती अंकुश सर्वदे की 13 सितंबर को मौत हो गई। सर्वदे का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। हेमंत दिगंबर नाम के आत्महत्या करने वाले एक व्यक्ति का भी शव अस्पताल के शव गृह में रखा हुआ था। दोनों शवों का रविवार सुबह पोस्टमार्टम किया गया। सर्वदे के परिवार वालों ने कहा कि कुछ रिश्तेदारों का इंतजार कर रहे हैं और वे शाम चार बजे शव लेंगे। इसी बीच दिगंबर के परिवार वाले अस्पताल आए और सर्वदे का शव दिगंबर का समझकर अपने साथ ले गए और अंतिम संस्कार कर दिया। सर्वदे के रिश्तेदार अस्पताल पहुंचे और उसके शव की मांग करने लगे तब मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद सर्वदे के परिवार वालों ने अस्पताल में हंगामा किया। साथ ही मामले की शिकायत पुलिस से की। अब मुंबई महानगर पालिका ने शव गृह में तैनात दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। साथ ही मामले की छानबीन के आदेश दे दिए हैं।

किडनी निकाले जाने का आरोप

सर्वदे के परिवार वालों का आरोप है कि अस्पताल में सर्वदे की किडनी निकाल ली गई है। सर्वदे के शव की जो तस्वीरें और वीडियो सामने आएं हैं उसमें उसके पेट पर चीरफाड़ के निशान नजर आ रहे हैं। लेकिन उसके परिवार वालों का आरोप है कि सर्वदे के सिर में चोट लगी थी तो पेट में किसलिए चीरफोड़ की गई। इस मुद्दे पर अस्पताल प्रशासन ने अपने बयान में कहा है कि यह आरोप पूरी तरह गलत है। हालांकि सफाई में सर्वदे के पेट में लगे चीरे का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।  
 
 

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