दैनिक भास्कर हिंदी: जहां की डिग्री होगी वहीं से लड़ना होगा स्नातक चुनाव , नए नियम लागू

November 21st, 2017


डिजिटल डेस्क, नागपुर |  यूनिवर्सिटी के दूसरे चरण  की घोषणा हो गई है।  दूसरे चरण यानी सीनेट की दस सीटों के लिए स्नातक चुनावों की घोषणा के साथ जो नए नियम लागू हुए हैं उससे दूसरी यूनिवर्सिटी से डिग्री लेने वालों की फजीहत हो गई है।  इस बार का चुनाव नए विश्वविद्यालय अधिनियम के नियमों के तहत हो रहा है। नए अधिनियम में स्पष्ट है कि जिस किसी ने जिस विश्वविद्यालय से डिग्री प्राप्त की है, उनको उसी विश्वविद्यालय से स्नातक चुनाव लड़ना होगा। बता दें कि अब तक नागपुर विश्वविद्यालय से अलग हुए संत गाडगे बाबा विश्वविद्यालय अमरावती, गोंडवाना विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद अब नए नियमों के तहत नागपुर  विश्वविद्यालय चुनाव होने जा रहे हैं। पुराने अधिनियम के अनुसार, अमरावती और गोंडवाना विश्वविद्यालय के डिग्री धारकों को नागपुर विवि में स्नातक चुनाव में खड़े होने या मतदान करने का मौका मिलता था, मगर अब ऐसा नहीं होगा। 
.....कई अहम चेहरों के रास्ते बंद
यहीं नहीं उन्हंे नागपुर विवि से चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं मिलेगी। ऐसे में अब तक सीनेट के अहम चेहरे रहे कई उम्मीदवारों की विवि की राजनीति में दोबारा पैर जमाने का रास्ता बंद हो चुका है। जो स्नातक गोंडवाना विश्वविद्यालय के तहत गए हैं, उनके नाम नागपुर विश्वविद्यालय अपनी मतदाता सूची से रद्द करेगा। इस बार नागपुर विश्वविद्यालय के स्नातक चुनावों में करीब 1 लाख मतदाता होंगे। नागपुर विश्वविद्यालय ने अन्य विश्वविद्यालयों के डिग्री धारकों के नाम अपनी मतदाता सूची से हटाना शुरू कर दिया है।
[12:25 PM, 11/21/2017] Anita Mam Nagpur Bhasker: मैपिंग का अड़ंगा, विद्यार्थियों को नहीं मिलेगी स्कालरशिप  
डिजिटल डेस्क, नागपुर। कालेजों में मैपिंग के अड़ंगे वाली 9 कालेजों के विद्यार्थियों स्कालरशिप नहीं मिलेगी । फलस्वरुप अब इन्हें मोटी फीस चुकानी होगी।  मैपिंग नहीं होेने वाले कालेजों की सूची में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी नागपुर व आईआईआईटी जैसे नामी कालेज भी शामिल हैं। दिसंबर के पहले इन 9 कालेजों की मैपिंग होना मुश्किल है। अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) व अन्य पिछड़ा वर्ग (आेबीसी) के विद्यार्थियों को सरकार की तरफ से छात्रवृत्ति मिलती है। इसी तरह फीस में भी राहत मिलती है।
.....प्रोसेस समाज कल्याण विभाग से होता है  : राज्य के समाज कल्याण विभाग के मार्फत मैपिंग का काम पूरा किया जाता है। इसके लिए संबंधित कालेज या विभाग को जरूरी प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। कालेज व शिक्षा संस्था की जरूरी जानकारी आनलाइन भरनी पड़ती है। मैपिंग नहीं होने से इन 9 कालेजों के हजारों विद्यार्थियों को इस साल भी मोटी फीस भरनी पड़ेगी। कंपनी के साथ करार खत्म होने से पिछले कई महीनों से साइट बंद पड़ी है। नई कंपनी के साथ करार पर चर्चा चल रही है। जिन कालेजों की मैपिंग हो चुकी है, वहां के विद्यार्थी महा डीबीटी साइट पर जाकर छात्रवृत्ति के लिए आनलाइन आवेदन कर सकते हैं। राज्य सरकार महा इसकॉल नाम से एक आैर साइट शुरू करने पर िवचार कर रही है। इसका लाभ विद्यार्थी ले सकेंगे। 
......मैपिंग होने पर गत वर्ष का भी मिलेगा लाभ 
कॉलेज व संस्था जिस विभाग के अधीन हैं, उसके माध्यम से आनलाइन आवेदन किए जा सकते हैं। संबंधित विभाग कालेज व संस्था के संबंध में जरूरी जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं। मैपिंग के लिए आए कुछ कालेजों के प्रस्तावों को संबंधित विभाग के पास भेजा गया है।  मैपिंग होने के बाद विद्यार्थियों को गत वर्ष का भी लाभ मिलेगा। गत वर्ष की छात्रवृत्ति भी दी जा सकेगी। 
-विजय वाकुडकर, सहायक आयुक्त, समाज कल्याण विभाग, नागपुर विभाग