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नाले के पानी से उगाई जा रही सब्जियां हडि्डयां कर रही है कमजोर

नाले के पानी से उगाई जा रही सब्जियां हडि्डयां कर रही है कमजोर

डिजिटल डेस्क, नागपुर। एक नाला ऐसा है, जिसमें नाग नदी, पीली नदी सहित एक अन्य नाले का पानी मिलता है। यह नाला जहरीला हो चुका है। इसी नाले के पानी की जांच में कई घातक तत्व मिले, जिसके बाद कृषि विशेषज्ञों के कान खड़े हो गए। इस पानी से उगाई जा रही सब्जियों से हडि्डयां तक कमजोर हो रही है।  इसके बाद कृषि विश्वविद्यालय ने नाले के पास के कुछ क्षेत्रों से मिट्टी का सैंपल लिया और जांच की तो और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। इस मिट्टी में होने वाली फसलें-सब्जियां हमें पौष्टिकता नहीं, बल्कि बीमारियां देती हैं।

18 लाख रुपए की लागत से विश्वविद्यालय के फार्म में लगाया गया प्लांट  
वर्ष 2012 में करीब 18 लाख रुपए की लागत से महाराज बाग के पास कृषि विश्वविद्यालय ने अपने फार्म में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया है। यह प्लांट बगैर बिजली के चलता है। नाग नदी के पानी को पहले शुद्ध किया जाता है, उसके बाद उसी पानी का उपयोग फसलों की सिंचाई में किया जाता है। खास बात यह है कि यह पानी सामान्य पानी की तुलना में पौधों के लिए ज्यादा लाभदायक है। यहां पांच एकड़ तक की खेती इसी पानी से हो रही है। रोज एक लाख लीटर नाले के पानी का ट्रीटमेंट होता है।

पानी और मिट्‌टी की जांच के बाद उठ रहे सवाल
नाग नदी, पीली नदी और एक अन्य नाला तीनों पूनापुर के पास मिलते हैं। यहां से यह एक बड़े नाले का रूप ले लेता है। यही नाला आगे जाकर कन्हान नदी में मिलता है। फिर आगे वैन गंगा में। इसी नाले के पानी से सिंचाई भी होती है। कामठी, कुही तहसील क्षेत्र का बड़ा भाग इसी नाले के पानी से खेती करता है। अब इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिस नाले में नाग नदी का पानी जा रहा होगा, उसकी स्थिति क्या होगी। प्रदूषण का स्तर क्या होगा। यह लाजिमी है कि नाले के पानी से सिंचाई होने के बाद न तो फसल ही सुरक्षित रह जाती है और न मिट्टी। वर्ष 2012 में कृषि विश्वविद्यालय ने नाग नदी के पानी की जांच की थी।

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पानी में जिंक, कोबाल्ट, क्रोमियम जैसे घातक तत्वों की अधिकता मिली थी। यह सेहत के लिए ठीक नहीं है। इसके बाद वर्ष 2015 में कामठी और कुही तहसील क्षेत्रों में नाले के आसपास की मिट्टी की भी जांच की। इसमें भी कई घातक तत्व मिले। इसके बाद कृषि विश्वविद्यालय ने राजीव गांधी साइंस टेक्नोलॉजी मिशन, मुंबई को दो साल पहले विस्तृत रिपोर्ट भेजी। साथ ही वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का प्रस्ताव दिया। दो साल बीत जाने के बाद भी जल शुद्धिकरण को लेकर धरातल पर कुछ नहीं दिख रहा है।

ये सब्जियां जहरीली होती हैं
कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि सीवेज पानी में खतरनाक बैक्टीरिया होते हैं यह बैक्टीरिया पानी के साथ साथ खेत में पहुंचते हैं। इसी से पौधे अपना भोजन बनाते हैं, यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती हैं। सब्जियां तैयार होने पर पानी के साथ पौधे में पहुंचे बैक्टीरिया का अंश सब्जियों में आ जाता है। गौरतलब है कि गंदे पानी से उगने वाली सब्जियों में लेड, सल्फर, जिंक, क्रोमियम और निकिल जैसे हैवी मेटल्स घुले होते हैं। डिटरजेंट और कास्टिक जैसी हानिकारक चीजें भी पानी के जरिए सब्जियों-फसलों में जा रही हैं। ये लोगों को धीरे-धीरे गंभीर बीमारियों का शिकार बनाती हैं। ऐसी सब्जियों-फसलों के उपयोग से पेचिश, श्वास संबंधी रोग, शरीर में खून की कमी आदि की समस्या होती है।  नाले (नाग नदी, पीली नदी आदि) के पानी से उगाई गई जहरीली सब्जियां खाने से हड्डियां कमजोर पड़ने के साथ पीलिया होने का खतरा बढ़ जाता है। आर्सेनिक लीवर के लिए यह धीमे जहर जैसा साबित होता है। कास्टिक की अधिकता किडनी को नुकसान पहुंचाती हैं। यही वजह है कि कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

नाले के पानी में कई घातक तत्व पाये जाते हैं। ऐसे में इसे बिना शुद्ध किए सिंचाई करना घातक है। इस पानी से सिंचाई के बाद होने वाली फसल या साग-सब्जी का सेवन भी खतरनाक है। खासकर पालक, गोबी, मेथी जैसी सब्जियों में ज्यादा मात्रा में खतरनाक तत्व रहते हैं।
-डॉ. अशोक मस्के, विभाग प्रमुख, कृषि अभियांत्रिकी विभाग, नागपुर कृषि विश्वविद्यालय

नाग नदी आगे जाकर कुही के आगरगांव में कन्हान नदी में मिलती है। इस बीच पड़ने वाले क्षेत्रों में इसी के पानी से खेती होती है। इसका परिणाम सब्जियां खाने के कुछ समय बाद दिखाई देता है। यह पानी काफी प्रदूषित है।
-विलास भोंगाडे, संयोजक, गोसीखुर्द प्रकल्पग्रस्त संघर्ष समिति

नाग नदी के आसपास बसे गांव के किसान प्रदूषित पानी से खेती करते हैं। इसके कारण सब्जियां खतरनाक हो जाती हैं। इसका मुख्य कारण यह भी है कि यह पानी पहले की तुलना में अब ज्यादा प्रदूषित हो चुका है।
-विजय जावंधिया, अध्यक्ष, शेतकरी संगठन नागपुर
 

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