गोंदिया: 1400 एकड़ खेतों को सिंचाई के लिए पानी का इंतजार

January 13th, 2022

डिजिटल डेस्क, गोंदिया। मृदा एवं जल संधारण उपविभाग सालेकसा के तहत आने वाले 6 करोड़ रुपए की लागत के कुल 10 लघु सिंचाई प्रकल्प अनेक वर्षों से अधूरे पड़े हुए हैं। इस कारण इन प्रकल्पों के पूर्ण होने की स्थिति में सिंचाई के अंतर्गत आने वाली कुल 1400 एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई के लिए पानी का इंतजार करना पड़ रहा है। शासन द्वारा किसानों को खेती के लिए पानी एवं बेरोजगारों के हाथों को काम देने के उद्देश्य से विविध जगहों पर सिंचाई प्रकल्पों को पुनर्जीवित करने का कार्य किया जा रहा है। इसी के तहत तहसील के कुल 10 लघु सिंचाई तालाबों को रोजगार गारंटी योजना के तहत सुधार कर उनकी संग्रहण क्षमता बढ़ाने एवं नहरों के माध्यम से किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने का काम वर्षों पूर्व शुरू किया गया था। इन प्रकल्पों में सालेकसा तहसील के कहाली, दंडारी, मरामजोब, कारूटोला-01, सुरजाटोला, मक्काटोला, टेकाटोला, लोहारा, सुपरसाल एवं जामनी प्रकल्प का समावेश है। इन प्रकल्पों के लिए कुल 600 करोड़ रुपए सुधार निधि के लिए मंजूर किए गए, किंतु किसी न किसी अड़चन के कारण यह प्रकल्प अब तक पूरे नहीं हो पाए हैं। इससे एक ओर सरकार के करोड़ों रुपए खर्च हो गए। वहीं दूसरी ओर किसानों की जमीन भी पानी के बगैर प्यासी हैं। तहसील के बेरोजगार मजदूरों कोे काम नहीं है। लघु सिंचाई तालाब दंडारी पर 45 लाख 15 हजार रुपए खर्च किए जाने थे, जिस पर अब तक 14 लाख 90 हजार रुपए खर्च हुए हैं। इस प्रकल्प में भंडारण एवं नहर का काम अभी भी अधूरा है। मरामजोब प्रकल्प की सुधार का कार्य 34 लाख 59 हजार रूपए से किया जाना था। इस पर अब तक 24 लाख रूपए खर्च हो चुके है। यहां भी नहर का काम अधूरा पड़ा है। कारूटोला प्रकल्प की मरम्मत पर 25 लाख रुपए खर्च होने हैं। इस प्रकल्प से 26 हेक्टेयर खेती की सिंचाई हो सकती है। इस पर 23 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं और अब इस काम को रोगायो से बाहर कर दिया गया है। यहां सुधारित बजट पेश कर शेष काम करने की आवश्यकता है। ऐसा ही हाल टेकाटोला प्रकल्प पर केवल 7 लाख 7 हजार रुपए खर्च करने थे, जिससे 46 हेक्टेयर जमीन को पानी मिल सकता था। इसे भी रोगायो योजना से बाहर कर दिया गया है। इस पर अब तक 4 लाख 69 हजार रूपए खर्च हो चुके है। ऐसा ही हाल अन्य प्रकल्पों का भी है। अगर सभी 10 प्रकल्प पूरे किए गए तो 556 हेक्टेयर जमीन सिंचित हो सकती है। लेकिन इन प्रकल्पों कोे पूरा करने के लिए एक ओर जहां जल संधारण विभाग सुस्त दिखाई पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर जनप्रतिनिधि भी कोई गंभीर प्रयास करते नजर नहीं आते।

1400 एकड़ खेतों को....

उपरोक्त सभी प्रकल्प के काम 10 से 15 वर्ष पुराने हैं। इस कारण अब इन प्रकल्पों को पहले मंजूर की गई निधि से पूरा नहीं किया जा सकता। अब इन सभी प्रकल्पों के काम को पूरा करने के लिए नए सिरे से सुधारित इस्टीमेट बनाने की आवश्यकता है एवं पहले की तुलना में कई गुना अधिक निधि की आवश्यकता होगी। लेकिन यदि यह निधि मंजूर नहीं की गई तो अब तक शासन द्वारा इन प्रकल्पांे पर खर्च की गई कुल 3 करोड़ 34 लाख रूपए की निधि व्यर्थ चली जाएगी और दूसरी ओर 1400 एकड़ जमीन सिंचाई की सुविधा से वंचित रह जाएगी।