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जलयुक्त शिवार वाले क्षेत्रों में घटा जलस्तर, बढ़ी चिंता

March 29th, 2019 17:26 IST
जलयुक्त शिवार वाले क्षेत्रों में घटा जलस्तर, बढ़ी चिंता

डिजिटल डेस्क, नागपुर। जलयुक्त शिवार योजना के तहत नागपुर जिले के जिन तहसील में सबसे ज्यादा कार्य हुए, वहीं का भू-जलस्तर पिछले तीन साल में लगातार घटा है। तीन साल में कुल 718 गांवों में (काटोल, नरखेड़, कलमेश्वर और हिंगना के लगभग 400 गांव) योजना के तहत कार्य किए गए। सबसे अहम बात यह है कि 5 साल में पूरे प्रदेश में 25000 गांवों में पर्याप्त जल हाेने का दावा किया गया था। इस हिसाब से प्रत्येक एक वर्ष में 5000 गांवों को जल-संपन्न बनाने का लक्ष्य था।

आमतौर पर काटोल नरखेड़ सूखा प्रभावित क्षेत्र माना जाता है, इसलिए सर्वाधिक कार्य वहीं किए गए, ताकि परिस्थिति में बदलाव हो। इस कार्य के लिए तत्कालीन जिलाधिकारी को पुरस्कार भी मिल चुका है। विशेष यह कि जलयुक्त शिवार से 88 हजार टीसीएस (थॉउजेंट क्यूबिक मीटर) पानी गांवों में जमा होने का रिपोर्ट में दावा किया गया है। बावजूद इसके बड़े पैमाने पर भू-जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। भूजल सर्वेक्षण विकास विभाग ने अपने आंकड़ों में इसका खुलासा किया है। ऐसे में सीएम के इस महात्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अंतर्गत किए गए कामों को लेकर ही सवाल खड़े हो गए हैं। 

 तहसील        2016            2017    2018 
 काटोल-        6.05            5.85        5.45
 नरखेड़-        8.28            7.59        7.35
 कलमेश्वर-     6.72            7.52        7.2
 हिंगना-         6.53            6.37        6.06

इनका कहना है
बारिश कम होने के कारण घटा भूजल स्तर

पिछले तीन वर्षों से लगातार बारिश कम हाे रही है, जिससे भू-जलस्तर घटा है। योजना के तहत जो कार्य किए गए हैं, उससे तीन वर्षों में 88000 टीसीएम सर्फेस वाटर जनरेट हुआ है, जो सिंचाई और पीने योग्य है।
- रविकांत गौतमी, टेक्निकल ऑफिसर, जलयुक्त शिवार योजना  

भूजल स्तर बढ़ने में योजना प्रभावी हुई है

भूजल स्तर घटने के बहुत सारे कारण हैं। जलयुक्त शिवार याेजना जल संरक्षण और तत्काल उपयोग में लिए जाने वाले जल के लिए कार्य करता है। इससे किसानों को तुरंत समाधान मिलता है। भूजल स्तर बढ़ने में योजना प्रभावी हुआ है।  
- अश्विन मुद्गल, जिलाधिकारी एवं जिलाध्यक्ष, जलयुक्त शिवार योजना समिति 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।