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21 साल पहले खुले कॉलेज को अब तक नहीं मिला कोई स्टॉफ

21 साल पहले खुले कॉलेज को अब तक नहीं मिला कोई स्टॉफ

डिजिटल डेस्क, छिंदवाड़ा। वर्ष 1998 में इंदिरा गांधी महिला पॉलीटेक्निक की शुरुआत हुई थी इसके बाद से अब तक यानी 21 साल बीत जाने के बाद भी अब तक कॉलेज स्टॉफ नहीं मिल पाया है। वैसे तो यहां पर मौजूद स्टॉफ जैसे-तैसे अध्यापन कराकर कॉलेज में आ रहे विद्यार्थियों को सुविधाएं दे रहा है। लेकिन स्टॉफ नहीं होने का सीधा असर नए कोर्सेस यानी ब्रांच खुलने पर पड़ रहा है। नियमानुसार कॉलेज में जब तक पर्याप्त स्टॉफ नहीं होगा तब तक नई ब्रांच इस कॉलेज में नहीं खोली जा सकती है। महिला पॉलीटेक्निक कॉलेज में सीएसई और एमओएम की ब्रांच है। जबकि सीविल और गारमेंट्स टेक्नॉलाजी कोर्स शुरु करने के लिए डीपीआर बनाकर भेजा जा चुका है लेकिन स्टॉफ नहीं होने के कारण मामला अटका है। 

इसलिए जरुरी पर्याप्त स्टॉफ 
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के अनुसार नए ब्रांच की स्वीकृति मिलती है। इसके पहले नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रीडिएशन के द्वारा मूल्यांकन होता है। इसके लिए कॉलेज को जानकारी देना होता है जिसके पहले कॉलम में पद स्वीकृति की जानकारी मांगी जाती है। इसमें स्थायी पद की जानकारी मांगी जाती है जो अधूरी होने के कारण नई ब्रांच की मान्यता से अलग हो जाती है।

जरुरत इस ओर ध्यान देने की 

12 सितंबर 1998 को तात्कालिक सांसद कमलनाथ ने महिला पॉलीटेक्निक कॉलेज का लोकार्पण किया था। इसके बाद अब मुख्यमंत्री होने के बाद उम्मीद है कि इस मामले में नई ब्रांच के लिए पहल होगी। इस मामले में कॉलेज की ओर से डीपीआर बनाकर भेजा गया है। 

कॉलेज में इतने पदों की जरुरत 

सीएसई ब्रांच- 
व्याख्यता सीएसई - 03
व्याख्यता गणित- 01
व्याख्यता अंग्रेजी - 01
एमओएम ब्रांच
व्याख्यता एमओएम- 04
तकनीकी सहायक स्टॉफ 
कनिष्ठ निर्देशक 02, वर्कशॉप इन्स्ट्रक्टर 04, कम्प्यूटर आपरेटर 04, मेंटनेंस टेक्निशियन 04, लेबोट्ररी टेक्निशियन 04, इंस्ट्रूमेंट रिपेयर 02, इलेक्ट्रिीशियन 01, स्कील्ड असिस्टेंट 04 पद रिक्त है।

इनका कहना है

पद स्वीकृत अगर होते है तो नई ब्रांच खुलेगी, जिसका सीधा फायदा विद्यार्थियों को होगा। तकनीकी शिक्षा को बेहतर कर पाएंगे। - आलोक यादव, प्राचार्य 

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