दैनिक भास्कर हिंदी: शिकार करने बिछाया था बिजली का तार, करंट की चपेट में आकर युवक की मौत

January 4th, 2018

डिजिटल डेस्क छिंदवाड़ा/चौरई। पेंच नेशनल पार्क के बफर जोन से लगे गांव कोना पिंडरई में एक युवक की मौत के मामले का पुलिस ने खुलासा किया हैं। पुलिस के मुताबिक मृतक और उसके चार साथियों ने वन्यप्राणी का शिकार करने के लिए करंट का तार लगाया था। इसमें उलझने से मृतक की मौत हो गई थी। उसके चार साथियों ने मामला छुपाने के लिए शव को छिपा दिया था। पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
नए साल के पहले दिन कोनापिंडरई गांव निवासी गणेश उइके का शव एक खेत में कड़बी के नीचे दबा मिला था। गणेश की मौत करंट लगने से हुई थी। एसडीओपी अशोक चौरसिया, थाना प्रभारी रघुनाथ खातरकर ने इस मामले में जांच की। जांच में सामने आया कि मृतक गणेश गांव के ही झीनो उर्फ रामकिशोर उइके, इरका उर्फ शिवप्रसाद उइके, सुमर लाल कुरचे, मोनू उइके कोनापिंडरई के साथ 28 दिसंबर को गया था। इसके बाद वह वापस घर नहीं आया। एक जनवरी को उसका शव मक्का के कड़बी के ढेर में दबा मिला। पुलिस ने उसके चारों साथियों से पूछताछ की तो उन्होंने पूरे मामले में खुलासा कर दिया। आरोपियों ने बताया कि 28 दिसंबर को उन्होंने वन्यप्राणी का करंट लगाकर शिकार करने का मन बनाया था। गांव के ही अनखलाल भलावी के खेत से खंभे से तार जोड़कर करंट छोड़ दिया। इन्हीं तारों में गणेश उलझ गया। जिससे उसकी मौत हो गई। मामले को छिपाने के लिए आरोपियों ने उसके शव को कड़बी के ढेर में छिपा दिया था। चार दिन बाद परिजनों ने शव को तलाश लिया था। पुलिस ने आरोपियों पर भादंवि की धारा 304, 201, 34 के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है।
- करंट से सुरक्षित नहीं पेंच का बफर जोन
कोनापिंडरई में आरोपियों ने वन्यप्राणी का शिकार करने के लिए करंट लगाया था। पेंच नेशनल पार्क के बफर जोन में लोग करंट लगाकर वन्यप्राणियों का शिकार कर रहे हैं। यही हाल चौरई के सांख सर्किल की कई बीटों का हैं। पूरा क्षेत्र शिकार की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता हैं। बफर जोन होने के बाद भी शिकार के लिए यहां पर करंट का उपयोग किया जाता है।