Rewa News: गंगेव की समृद्ध प्राकृतिक धरोहर अब एक व्यवस्थित दस्तावेज़ के रूप में होगी सुरक्षित

गंगेव की समृद्ध प्राकृतिक धरोहर अब एक व्यवस्थित दस्तावेज़ के रूप में होगी सुरक्षित
जनपद पंचायत, गंगेव में आयोजित जैव विविधता प्रबंधन समिति की बैठक में प्रस्तुत किया गया।

डिजिटल डेस्क,रीवा। गंगेव जनपद क्षेत्र की समृद्ध प्राकृतिक धरोहर अब एक व्यवस्थित दस्तावेज़ के रूप में सुरक्षित होगी। मध्य प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड भोपाल के सौजन्य से शासकीय माधव सदाशिवराव गोलवलकर महाविद्यालय, रीवा द्वारा गंगेव जनपद पंचायत की लोक जैव विविधता पंजी का अद्यतन कार्य पूर्ण किया गया। इसे जनपद पंचायत, गंगेव में आयोजित जैव विविधता प्रबंधन समिति की बैठक में प्रस्तुत किया गया।

प्रोजेक्ट इन्वेस्टिगेटर प्रोफेसर स्कंद मिश्रा ने बताया कि पंजी में जनपद क्षेत्र के वन अंचल की पादप एवं वन्यजीव जैव विविधता के साथ-साथ कृषि और उद्यानिकी से जुड़ी रबी, खरीफ तथा जायद फसलों, दलहन, तिलहन, फल, सब्जी, ड्रैगन फ्रूट और औषधीय पौधों की खेती की विस्तृत जानकारी सम्मिलित की गई है। इस पंजी की विशेषता यह है कि इसमें केवल वनस्पति और वन्यजीवों का विवरण ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की ग्रामीण जीवनशैली, परंपराओं और आजीविका की पूरी तस्वीर भी संजोई गई है।

महत्वपूर्ण पौधों के पारंपरिक उपयोग, प्राकृतिक स्थल, क्योटीगढ़ी, जल प्रपात, जल स्रोत, पूजा स्थल एवं पवित्र उपवनों की जानकारी दर्ज की गई है। ग्रामीण बाजार, गौशाला, पशुपालन और मत्स्य पालन से जुड़ी जानकारी भी शामिल की गई, जिससे यह पंजी क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक जीवन का महत्वपूर्ण दस्तावेज़ बन गई है। यह अद्यतन जमीनी स्तर पर किए गए सर्वे, अवलोकन और स्थानीय ज्ञान के संगम से तैयार हुआ। पंचायतों में उन्नतशील कृषकों एवं ज्ञानधारकों से चर्चा की गई।

जबकि वन, कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य, शिक्षा तथा पंचायत विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों से प्राप्त आँकड़े और सुझाव भी समाहित किए गए। समिति की अध्यक्ष श्यामकली सिंह एवं उपाध्यक्ष अर्चना रावत, प्राची चौबे सीईओ गंगेव जनपद की उपस्थिति में सदस्यों, विभागीय अधिकारियों, कृषकों और जनप्रतिनिधियों ने पंजी का अवलोकन किया।

निर्णय लिया गया कि सुझावों को जोड़कर पंजी को अंतिम रूप दिया जाएगा तथा फाइनल रिपोर्ट राज्य जैव विविधता बोर्ड को भेजी जाएगी। बताया गया कि यह पंजी केवल वर्तमान जानकारी का संग्रह नहीं, बल्कि गंगेव के भविष्य के विकास की मार्गदर्शिका भी है। शिक्षण, शोध, कृषि-उद्यानिकी योजनाएँ, वन प्रबंधन, पर्यटन विकास और आर्थिक प्रगति की परियोजनाएँ इसी दस्तावेज़ को आधार बनाकर संचालित की जा सकती हैं।

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