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IND VS SA 1st Test: पहले दिन भारत का स्कोर 202 रन, बतौर ओपनर रोहित ने जड़ा पहला टेस्ट शतक

IND VS SA 1st Test: पहले दिन भारत का स्कोर 202 रन, बतौर ओपनर रोहित ने जड़ा पहला टेस्ट शतक

हाईलाइट

  • भारत और साउथ अफ्रीका के बीच तीन मैचों की टेस्ट सीरीज का पहला मैच आज विशाखापट्टनम में खेला जा रहा है
  • भारतीय टीम ने पहले दिन अपनी पहली पारी में पहले दिन का खेल खत्म होने तक 59.1 ओवर में बिना किसी नुकसान के 202 रन बनाए
  • रोहित ने बतौर ओपनर पहला और टेस्ट करियर का चौथा शतक जड़ा

डिजिटल डेस्क। भारत और साउथ अफ्रीका के बीच तीन मैचों की टेस्ट सीरीज का पहला मैच विशाखापट्टनम में खेला जा रहा है। जहां भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम ने बुधवार को पहले दिन का खेल खत्म होने तक अपनी पहली पारी में 59.1 ओवर में बिना किसी नुकसान के 202 रन बनाए। सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा 115 और मयंक अग्रवाल 84 रन बनाकर नाबाद पवेलियन लौटे। 

रोहित पहली बार टेस्ट में ओपनिंग कर रहे हैं। बतौर ओपनर रोहित ने पहला टेस्ट शतक भी जड़ा है। इस के साथ ही रोहित के टेस्ट करियर में 4 शतक भी हो गए हैं। वहीं मयंक ने भी करियर का चौथा अर्धशतक जड़ा। 

साउथ अफ्रीकी टीम एशिया में लगातार 8वें टेस्ट में टॉस जीतने में नाकाम रही। विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में भारत का ये तीसरा मुकाबला है। इससे पहले भारत ने 2 टेस्ट में वेस्टइंडीज को हराया था। टीम इंडिया टेस्ट चैम्पियनशिप की अंक तालिका में टॉप पर मौजूद है। 

भारत और साउथ अफ्रीका पहली बार विशाखापट्टनम के वाईएसआर एसीए वीडीसीए क्रिकेट स्टेडियम पर आमने-सामने है। इससे पहले विशाखापट्टनम में एकमात्र टेस्ट भारत और इंग्लैंड के बीच 2016 में खेला गया था। टीम इंडिया उस मैच में 246 रन से जीती थी। दोनों टीमों के बीच 2015 के बाद भारतीय मैदान पर कोई टेस्ट मैच नहीं हुआ है। पिछली बार भारतीय टीम ने दिल्ली में 337 रन से जीत दर्ज की थी।

स्कोरकार्ड:

भारत की पहली पारी

बल्लेबाजरनगेंद4s6s
मयंक अग्रवाल नाबाद84183112
रोहित शर्मा नाबाद115174125

रन : 202/0, ओवर : 59.1, एक्स्ट्रा : 3.

साउथ अफ्रीका की गेंदबाजी : वर्नोन फिलैंडर: 11.1-2-34-0, कगिसो रबाडा: 13-5-35-0, केशव महाराज: 23-4-66-0, डेन पिएट: 7-1-43-0, सेनुरान मुथुसामी: 5-0-23-0.

टीमें

भारत: विराट कोहली (कप्तान), अजिंक्य रहाणे (उपकप्तान), रोहित शर्मा, मयंंक अग्रवाल, चेतेश्वर पुजारा, हनुमा विहारी, रविचंद्रन अश्विन, रविंद्र जडेजा, ऋद्धिमान साहा (विकेटकीपर), इशांत शर्मा, मोहम्मद शमी।

बेंच पर: कुलदीप यादव, शुभमन गिल, उमेश यादव और ऋषभ पंत।

दक्षिण अफ्रीका : फाफ डुप्लेसिस (कप्तान), एडेन मार्कराम, डीन एल्गर, थिउनिस डी ब्रुइन, टेम्बा बवुमा, क्विंटन डीकॉक (विकेटकीपर), वर्नोन फिलैंडर, सेनुरान मुथुसामी, केशव महाराज, डेन पिएट, कगिसो रबाडा।

बेंच पर: हेनरिच क्लासेन (विकेटकीपर), लुंगी एंगिडी, एनरिच नोर्त्जे, जुबैर हम्जा।

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।