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लापरवाह एसडीएम पर हाईकोर्ट ने लगाया 2 हजार का जुर्माना -6 साल बाद भी नहीं हो पाया जमीन का अधिग्रहण

लापरवाह एसडीएम पर हाईकोर्ट ने लगाया 2 हजार का जुर्माना -6 साल बाद भी नहीं हो पाया जमीन का अधिग्रहण

डिजिटल डेस्क, सिंगरौली(वैढन)। उच्च न्यायालय ने सिंगरौली तहसील के ग्राम गड़हरा खुर्द में प्रभावशील भू-अर्जन की धारा 4 की कार्रवाई को अवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है। न्यायालय ने  इस मामले में सिंगरौली उपखंड अधिकारी पर 2000 का जुर्माना भी लगाया है। जिला प्रशासन ने यूपी के सोनभद्र जिला स्थित सिंगरौली सुपर थर्मल पावर स्टेशन शक्तिनगर के फ्लाइऐश डैम बनाने के लिए ग्राम गड़हरा खुर्द में 300 एकड़ जमीन अधिग्रहण के लिए भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 की धारा -4 की कार्यवाही के लिए अधिसूचना क्रमांक 490/भू-अर्जन/2012 सिंगरौली,11 जून 2012 प्रकाशित की थी। 

प्रशासन ने इस मामले में भू- अर्जन की कार्रवाई निर्धारित समय में नहीं कर पाया। इसके चलते स्थानीय लोगों का सार्वजनिक हित प्रभावित हो रहा था। इस मामले में अधिवक्ता बृजेश शाहवाल ने बताया कि ग्राम चितरवई कला निवासी बासमती शाह ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर ग्राम गडहरा में भू-अर्जन अधिकारी द्वारा जमीन की बिक्री रजिस्ट्री पर असंवैधानिक तरीके से रोक हटाने के साथ नामांतरण बटनवारा बहाल कराने और धारा-4 की कार्यवाही में अत्यधिक विलंब होने पर निरस्त करने की मांग की थी। 

उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय में यह भी तर्क दिया गया था कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम 1894 में वर्ष 2013 में यह संशोधन किया गया था कि धारा 4 के प्रकाशन के एक साल के अंदर अधिग्रहण की कार्यवाही पूर्ण हो जानी चाहिए अन्यथा यह कार्यवाही निरस्त योग्य मानी जायेगी। ऐसे में उक्त गांव में वर्ष 2012 में धारा 4 का प्रारंभिक प्रकाशन किया गया था, लेकिन 2018 तक भू-अर्जन नहीं हो पाया। जबकि 6 साल बीत चुके हैं। 

उच्च न्यायालय की जस्टिस नंदिता दुबे ने याचिका की सुनवाई करते हुए ग्राम गडहरा खुर्द की भू-अर्जन की धारा 4 की कार्यवाही को निरस्त करने का फैसला दिया गया है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब गांव की जमीन पर लगी रोक हटने से रजिस्ट्री, बटनवारा, नामांतरण कराया जा सकेंगा। 

लापरवाही पर एसडीएम पर कार्रवाई
उच्च न्यायालय की जस्टिस नंदिता दुबे ने भू-अर्जन की प्रक्रिया में प्रशासन की लापरवाही पाये जाने पर एसडीएम पर जुर्माना लगाया है। बताया जाता है कि विहित अधिकारी द्वारा मामले की सुनवाई में लेट लतीफी की जा रही थी। इसके चलते अदालत ने यह कार्रवाई की है।

एसएसटीपी को लगा झटका
 उच्च न्यायालय द्वारा ग्राम गडहरा की भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही निरस्त करने के फैसले से एनटीपीसी शक्तिनगर प्रबंधन को बड़ा झटका लगा है। उच्च न्यायालय में  एनटीपीसी शक्तिनगर प्रबंधन भी बेहतर तरीके से पैरवी नहीं कर पाया है। बताया जाता है कि सिंगरौली सुपर थर्मल पावर ने भूमि अधिग्रहण के लिए भू-अर्जन अधिकारी के  खाते में पैसा भी जमा किया था। इसके चलते प्रबंधन की उहापोह की स्थिति से अधिग्रहण की कार्यवाही में काफी विलंब हो गया है।

यूपी की राख सिंगरौली में
यूपी के सोनभद्र स्थित इस पावर प्रोजेक्ट की राख (फ्लाईऐश) डंप करने डैम बनाने के लिए सिंगरौली जिले के ग्राम गड़हरा की लगभग 300 एकड जमीन अधिग्रहित की जा रही थी। जिससे स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी का माहौल निर्मित हो गया था। लोगों का कहना है कि यूपी की राख डंप करने बीच गांव की जमीन में डैम बनाने की योजना प्रस्तावित थी।

ग्रामीणों को राहत
याचिकाकर्ता बासमती शाह ने इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए  इससे ग्रामीणों को राहत मिली  है। उन्होंने कहाकि भू- अर्जन अधिकारी द्वारा गांव में 6 साल तक धारा 4 को प्रभावशील रखा। इस कार्यवाही में समय सीमा में पूर्ण नहीं करने से वहां के स्थानीय ग्रामीणजन काफी परेशान थे। कोई अपनी जमीन न बेच पा रहा था, और न ही नामांतरण,बंटवारा करा पा रहा था। भूमियों का सीमांकन भी नहीं किया जा रहा था, जिससे विवाद की स्थिति निर्मित हो रही थी। उच्च न्यायालय के फैसले से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
 

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