दैनिक भास्कर हिंदी: 'कृष्णवल्लभा' जन्मोत्सव पर सजा ब्रज-बरसाना, VIDEO में देखें राधाष्टमी की धूम

August 29th, 2017

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। श्रीराधा मां लक्ष्मी का ही स्वरूप हैं। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को श्री कृष्ण की प्राणप्रिया राधाजी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। राधाअष्टमी पर बरसाना में धूम होती है। इस दिन पूरा नगर दुल्हन की तरह सजता है। घरों और मंदिरों में पकवान बनाए जाते हैं। ब्रज और बरसाना में जन्माष्टमी की तरह राधाष्टमी भी एक बड़े त्योहार के रूप में मनाई जाती है। वृंदावन में भी यह उत्सव बडे़ ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। मथुरा, वृन्दावन, बरसाना, रावल और मांट के राधा रानी मंदिरों में इस दिन को उत्सव के रुप में मनाया जाता है। वृन्दावन के राधा बल्लभ मंदिर में राधा जन्म की खुशी में भक्त झूम उठते हैं।  

कृष्ण वल्लभा

राधाजी कृष्ण की प्रेयसी हैं, वे श्री कृष्ण के वक्षरूस्थल में वास करती हैं। ये दोनों परस्पर आराध्य और आराधक हैं अर्थात दोनों एक-दूसरे के इष्ट देवता हैं। वेद तथा पुराणादि में राधाजी को कृष्ण वल्लभा कहकर गुणगान किया गया है । श्री राधा की पूजा न की जाए तो भक्त श्री कृष्ण की पूजा का अधिकार भी नहीं रखता। श्री राधा भगवान श्री कृष्ण के प्राणों की अधिष्ठात्री देवी मानी गई हैं। नारद पुराण के अनुसार राधाष्टमी का व्रत करनेवाले भक्तगण ब्रज के दुर्लभ रहस्य को जान लेते हैं, जो व्यक्ति इस व्रत को विधिवत करते हैं वह सभी पापों से मुक्ति पाते हैं।

अनादि और अजन्मी

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार राधाजी भी श्रीकृष्ण की तरह ही अनादि और अजन्मी हैं। वे बृज में वृषभानु वैश्य की कन्या थीं। उनका जन्म माता के गर्भ से नहीं हुआ, बल्कि माता कीर्ति ने अपने गर्भ में वायु को धारण कर रखा था और योगमाया की प्रेरणा से कीर्ति ने वायु को जन्म दिया। जिसके बाद ही ये वृषभानु काे भूमि साफ करते वक्त मिलीं। कहते हैं कि भगवान को प्रसन्न करने के लिए पहले राधारानी को जपना पड़ता है।

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