comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

खास है श्रावण माह का हर सोमवार, जानें इस वर्ष क्यों है विशेष?

खास है श्रावण माह का हर सोमवार, जानें इस वर्ष क्यों है विशेष?

डिजिटल डेस्क। भारतीय संस्कृति मे त्रिदेवों की मान्यता है। ब्रम्हा विष्णु महेश, महेश यानि भगवान महादेव शीघ्रता से प्रसन्न होने वाले माने जाते हैं। इसीलिए उनका एक नाम आशुतोष है। भगवान शिव का पवित्र मास श्रावण प्रारंभ हो चुका है और इस बार श्रावण विशेष तौर पर फलदायी है। हर सोमवार को एक विशेष योग बन रहा है, इनमें से दो सोमवार निकल चुके हैं और आज तीसरा सोमवार है, साथ ही नागपंचमी का योग भी इस सोमवार को बना है।

विशेष प्रिय श्रावण मास
भगवान शिव को श्रावण मास विशेष प्रिय रहता ही है, क्योंकि मान्यता है कि इसी श्रावण मास में भगवान शिव अपने ससुराल पधारते हैं। साथ ही एक और आख्यायिका के अनुसार जब देवी सती ने देह त्याग किया और अगले जन्म में पार्वती बन कर आयी तब इसी श्रावण मास में कठोर तप कर भगवान शिव को पतिरूप में पाने का वरदान प्राप्त किया। इसी कारण इसी महीने में हर मंगलवार को मंगलागौरी व्रत भी रखा जाता है।

इसलिए आशुतोष नाम पड़ा
एक और कारण है, समुद्र मंथन के समय जब हलाहल विष निकला था तो भगवान आशुतोष ने इसी महीने में उस विष को अपने कंठ में धारण किया था इस कारण श्रावण मास भगवान शिव को विशेष प्रिय है। उत्तर भारतीय पध्दति के अनुसार 17 जुलाई से श्रावण मास प्रारंभ हुआ। श्रावण के सोमवार का विशेष महत्व होता हैं इस बार प्रथम सोमवार 22 जुलाई को आया, इसके बाद दूसरा सोमवार 29 जुलाई को था, इस दिन भगवान शिव को अति प्रिय तिथी प्रदोष था।

तीसरे सोमवार को नाग पंचमी
सावन माह का तीसरे सोमवार यानि 5 अगस्त को नागपंचमी है तथा इसके बाद चौथा और अंतिम सोमवार 12 अगस्त को फिर से सोम प्रदोष है। इस प्रकार इस वर्ष भगवान शिव की अति विशिष्ट कृपा रहने वाली है। भगवान शिव को अभिषेक प्रिय होता है, क्योंकि वे योगी हैं सतत तप में लीन होते हैं। विषपान भी किया हैं इस कारण उनमें उर्जा उष्मा गर्मी बहूत होती हैं इससे राहत के लिए जल की आवश्यकता होती है। इसी कारण अपने मस्तक में चंद्रमा और गंगाजी को धारण किए रहते हैं श्रावण मास में प्रतिदिन भगवान शिव को कम से कम जल अर्पित करें, विल्वपत्र चढ़ायें और ओम नमः शिवाय का जप करें जिससे वे समृध्दि और आरोग्य देगें।

साभार: पं. सुदर्शन शर्मा शास्त्री, अकोला

कमेंट करें
ghDtI
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।