दैनिक भास्कर हिंदी: महाकाल दरबार में नजर आएगा ग्रहण का असर, बदला आरती का समय

January 31st, 2018


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दुर्लभ दिन और विशेष संयोग पर माघ पूर्णिमा पर पड़े चंद्रग्रहण का असर महाकाल बाबा के दरबार में भी दिखाई देगाा। ग्रहणकाल की वजह से संध्याकाल में होने वाली आरती आज निर्धारित समय पर नही होगी। संध्याकाल में बाबा के दरबार के पट बंद होंगे और स्वयं पुजारी भी शिवलिंग को स्पर्श नही करेंगे। 


नजर आएगा सूतक का असर 
माघ पूर्णिमा पर बुधवार अर्थात आज खग्रास चंद्रग्रहण की वजह से सूतक काल में बाबा के दरबार में पूजा पाठ आरती नही होगी। शाम 5.18 बजे ग्रहण की शुरूआत होगी और मोक्षकाल रात्रि 8.42 पर होगा। तीन घंटे 24 मिनट की इस अवधि का असर यहां भी दिखाई देगा। 


यह होगा आरती का समय
महाकाल बाबा के मंदिर में ग्रहण काल में संध्या आरती शाम 4.30 से 5.00 बजे तक होगी, सामान्यतः यह 5 बजे होती है। वहीं ग्रहणकाल मोक्ष होने के उपरांत रात्रि 9 बजे आरती की जाएगी। इससे पूर्व मंदिर को धुला जाएगा। तत्पश्चात विधि-विधान से बाबा की आरती-पूजा होगी। सूतक काल में किसी को भी गर्भग्रह में जाने की अनुमति नही होगी। 


स्पर्श करना भी वर्जित
धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहणकाल के दौरान सूतक काल में भगवान की पूजा अर्चना आदि नही की जाती। इस काल में भगवान को स्पर्श करना भी वर्जित बताया गया है। यही वजह है कि इस दौरान मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं।

 

दुनियाभर में फेमस महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग

महाकालेश्वर शिवलिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। जिसकी वजह से यह दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यहां प्रतिदिन ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन होता है। यहां पूजा अर्चना एवं भस्मारती पूरे भारत में फेमस है।यह एकमात्र शिवलिंग है जहां भस्मारती की जाती है। इसे पहले मुर्दे की राख से किया जाता था किंतु समय के साथ परंपराआें में परिवर्तन आया आैर अब इसे गोबर के उपले से बनी राख से किया जाता है।