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सावन मंगला गौरी व्रत आज: अविवाहित और सुहागिन महिलाओं के लिए सौभाग्यशाली है ये व्रत, जानें पूजा विधि

सावन मंगला गौरी व्रत आज: अविवाहित और सुहागिन महिलाओं के लिए सौभाग्यशाली है ये व्रत, जानें पूजा विधि

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देवों के देव महादेव के प्रिय माह सावन में कई व्रत और त्यौहार आते हैं। इनमें भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का बड़ा ही महत्व है। इनमें से एक है सावन में आने वाला मंगला गौरी व्रत, जो माता गौरी को समर्पित होता है। यह व्रत सावन के हर मंगलवार को रखा जाता है। विवाहित महिलाएं इस व्रत के जरिए जीवन साथी और संतान के सुखद जीवन की कामना के लिए करती हैं। वहीं अविवा​हित महिलाएं अच्छे जीवनसाथी के लिए प्रार्थना करती हैं। शास्त्रों के अनुसार यह व्रत दोनों के लिए ही सौभाग्यशाली है। 

भविष्यपुराण और नारदपुराण के अनुसार श्रावण मास में मंगलवार के व्रत रखने से सुखों में वृद्धि होती है। इस दिन देवी पार्वती के गौरी स्वरूप की पूजा होती है। मंगला गौरी सुहाग और गृहस्‍थ सुख की देवी मानी जाती हैं। कितना खास है ये व्रत और क्या है पूजा विधि आइए जानते हैं...

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महत्व
शास्त्रों के अनुसार यह व्रत अविवाहितों के अलावा सुहागिन महिलाओं के लिए भी सौभाग्यशाली माना जाता है। इससे सुहागिनों को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। मंगला गौरी व्रत करने से विवाह में आ रही वाधा भी दूर हो जाती है। इसलिए इस दिन माता मंगला गौरी यानी पार्वती की पूजा करके मंगला गौरी की कथा सुनना चाहिए। सौभाग्य से जुड़े होने की वजह से नवविवाहित दुल्हनें भी इस व्रत को करती हैं।

जिन युवतियों और महिलाओं की कुंडली में वैवाहिक जीवन में कमी होती है या शादी के बाद पति से अलग होने या तलाक हो जाने जैसे अशुभ योग निर्मित हो रहे हो तो उन महिलाओं के लिए मंगला गौरी व्रत विशेष रूप से फलदाई है। अत: ऐसी महिलाओं को सोलह सोमवार के साथ-साथ मंगला गौरी का व्रत अवश्य रखना चाहिए। ध्यान रखें एक बार यह व्रत प्रारंभ करने के बाद इस व्रत को लगातार पांच वर्षों तक किया जाता है। इसके बाद इस व्रत का विधि-विधान से उद्यापन कर देना चाहिए।

व्रत विधि
- इस व्रत के लिए ब्रह्म मुहूर्त में जल्दी उठें।
- नित्य कर्मों से निवृत्त होकर साफ-सुथरे धुले हुए अथवा कोरे (नवीन) वस्त्र धारण करें।
- पूजा के दौरान मां मंगला गौरी (पार्वतीजी) का एक चित्र अथवा प्रतिमा लें। 
इसके बाद 'मम पुत्रापौत्रासौभाग्यवृद्धये श्रीमंगलागौरीप्रीत्यर्थं पंचवर्षपर्यन्तं मंगलागौरीव्रतमहं करिष्ये’ इस मंत्र के साथ व्रत करने का संकल्प लें।
- इस व्रत में एक ही समय अन्न ग्रहण करके पूरे दिन मां पार्वती की आराधना की जाती है।

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पूजा की विधि
मां की पूजा के दौरान सभी वस्तुएं सोलह की संख्या में होनी चाहिए। इनमें 16 मालाएं, लौंग, सुपारी, इलायची, फल, पान, लड्डू, सुहाग की सामग्री, 16 चूड़ि‍यां और मिठाई चढ़ाई जाती हैं। इसके अलावा 5 प्रकार के सूखे मेवे, 7 प्रकार के अनाज-धान्य (जिसमें गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर) आदि होना चाहिए। पूजा के बाद मंगला गौरी की कथा सुननी चाहिए।

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