comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

किम जोंग पर ट्रंप को भरोसा नहीं, 10 दिन में यू-टर्न लेकर बोले- खतरा तो बना हुआ है

June 23rd, 2018 21:25 IST

हाईलाइट

  • अमेरिका ने 26 जून 2008 को पहली बार उत्तर कोरिया पर इमरजेंसी लगाई थी।
  • ट्रम्प ने शुक्रवार को उत्तर कोरिया के खिलाफ 11वें साल नेशनल इमरजेंसी लागू करते हुए लिखा- उत्तर कोरिया से परमाणु प्रसार का खतरा अभी भी बना हुआ है।
  • उसके मिसाइल प्रोग्राम और परमाणु कार्यक्रम से अभी भी अमेरिका की सुरक्षा, विदेश नीति और अर्थव्यवस्था को खतरा है।

डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। सिंगापुर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग के बीच हुई एतिहासिक मुलाकात के बाद भी लगता है हालात नहीं सुधरे हैं। मुलाकात के बाद ट्रंप ने 13 जून को साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए जो बयान दिया था, अब 10 दिन बात उससे यू-टर्न ले लिया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रम्प ने कहा था कि उत्तर कोरिया से अब खतरा नहीं है। अमेरिका चैन की नींद सो सकता है। मगर अब यू-टर्न लेते हुए ट्रंप ने कहा कि खतरा तो अब भी बना हुआ है। बता दें कि अमेरिका ने 26 जून 2008 को पहली बार उत्तर कोरिया पर इमरजेंसी लगाई थी।

असामान्य परमाणु खतरा बना हुआ है
शुक्रवार की रात ट्रंप ने उत्तर कोरिया के खिलाफ नेशनल इमरजेंसी एक साल के लिए बढ़ाते हुए यह जता दिया है कि उन्हें अब भी तानाशाह किम जोंग पर भरोसा नहीं है। ट्रंप ने यू-टर्न लेते हुए कहा कि उत्तर कोरिया से अभी भी असाधारण और असामान्य परमाणु खतरा बना हुआ है। ट्रम्प ने शुक्रवार को उत्तर कोरिया के खिलाफ 11वें साल नेशनल इमरजेंसी लागू करते हुए लिखा- उत्तर कोरिया से परमाणु प्रसार का खतरा अभी भी बना हुआ है। उत्तर कोरिया सरकार की नीतियों और खासकर उसके मिसाइल प्रोग्राम और परमाणु कार्यक्रम से अभी भी अमेरिका की सुरक्षा, विदेश नीति और अर्थव्यवस्था को खतरा है।

गौरतलब है कि अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच 12 जून को पहली बार सिंगापुर में बातचीत हुई थी। 70 साल से दुश्मन रहे अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच यह एतिहासिक मुलाकात थी। इस दौरान ट्रंप ने किम को परमाणु हथियार पूरी तरह खत्म करने पर राजी कर लिया था। ट्रम्प ने बदले में सुरक्षा की गारंटी दी थी। उत्तर कोरिया की बड़ी मांग मानते हुए ट्रम्प ने दक्षिण कोरिया के साथ संयुक्त युद्ध अभ्यास खत्म कर दिया था।

कमेंट करें
wlvHh
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।