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पीआईए विमान हादसे के मृतकों के परिजनों ने डीएनए टेस्ट पर संदेह जताया

June 14th, 2020 19:00 IST
 पीआईए विमान हादसे के मृतकों के परिजनों ने डीएनए टेस्ट पर संदेह जताया

हाईलाइट

  • पीआईए विमान हादसे के मृतकों के परिजनों ने डीएनए टेस्ट पर संदेह जताया

कराची, 14 जून (आईएएनएस)। पाकिस्तान के कराची में 22 मई को पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) के विमान दुर्घटना में मारे गए 97 लोगों के परिजनों ने सिंध फोरेंसिक डीएनए और कराची विश्वविद्यालय के सिरोलॉजी लैब (एसएफडीएल) में की गई डीएनएन जांच पर संदेह जताया है।

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को मीडिया को संबोधित करते हुए मृतकों के परिजनों ने इस प्रक्रिया में देरी और हेरफेर करने पर प्रकाश डाला और सरकार से इस मामले को देखने की मांग की।

विमान 22 मई को कराची की घनी आबादी वाली मॉडल कॉलोनी में गिर गया था। कई शवों की पहचान नहीं हो पाई थी।

विमान दुर्घटना में पत्नी और बच्चों को खो देने वाले आरिफ इकबाल ने अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि जब वह अपनी पत्नी और अपनी बड़ी बेटी की पहचान करने में सक्षम थे, उनके बेटे और छोटी बेटी की पहचान करने के लिए डीएनए जांच की आवश्यकता थी।

उन्होंने कहा, मैंने अपना डीएनए नमूना उपलब्ध कराया और कुछ घंटों में परिणाम की उम्मीद की, लेकिन पांच दिन बाद भी मेरे पास कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि बार-बार विभिन्न संस्थानों का चक्कर लगाना पड़ा और परेशानियों का सामान करना पड़ा।

हादसे में भाई को खो देने वाले अहमद मुर्तजा ने बताया कि उन्हें एसएफडीएल से कोई रिपोर्ट नहीं मिली है, जबकि पंजाब फोरेंसिक साइंस एजेंसी (पीएफएसए) ने एक दिन के भीतर ऐसा किया था।

उन्होंने कहा, मेरे पिता को बताया गया था कि उनका नमूना किसी भी शव से मेल नहीं खाया। बाद में मुझे पता चला कि जिस शव से नमूने का मिलान हुआ वह दूसरे परिवार को दिया गया था। मुझे अभी तक नहीं पता कि मेरे भाई का शव किसने लिया और उन्होंने उसे कहां दफनाया।

अन्य रिश्तेदारों ने एसएफडीएल पर उन्हें गुमराह करने और गलत जांच परिणाम जारी करने का आरोप लगाते हुए समान दावे किए।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।