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राफेल पर बयानबाजी कर फंसे राहुल, फ्रांस ने आरोपों को किया खारिज

July 21st, 2018 11:11 IST
राफेल पर बयानबाजी कर फंसे राहुल, फ्रांस ने आरोपों को किया खारिज

हाईलाइट

  • राफेल डील को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लगाए आरोपों को फ्रांस ने सिरे से खारिज कर दिया है।
  • राहुल गांधी ने कहा था कि फ्रांस के साथ सूचना को गोपनीय रखने का कोई समझौता नहीं हुआ।
  • फ्रांस के इन आरोपों को खारिज करने के बाद भी राहुल गांधी ने कहा कि वह अपने बयान पर कायम हैं।

डिजिटल डेस्क, पेरिस। राफेल डील को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लगाए आरोपों को फ्रांस ने सिरे से खारिज कर दिया है। दरअसल लोकसभा में शुक्रवार को अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने कहा था कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने उनसे कहा है कि राफेल जेट सौदे पर भारत के साथ उनका सूचना को गोपनीय रखने का कोई समझौता नहीं हुआ। हालांकि फ्रांस के इन आरोपों को खारिज करने के बाद भी राहुल गांधी ने कहा कि वह अपने बयान पर कायम हैं।

क्या कहा फ्रांस ने?
राहुल गांधी के इन आरोपों पर फ्रांस ने कहा कि दोनों देशों में सूचना गोपनीय रखने का करार है। 2008 के सिक्यॉरिटी अग्रीमेंट में ये करार किया गया था। यहीं वजह है कि इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। हम कानूनी तौर पर इसे बंधे हुए हैं। डील की जानकारी सार्वजनिक करने से सुरक्षा और ऑपरेशनल क्षमता पर असर पड़ सकता है। ऐसे में यही प्रावधान स्वाभाविक रूप से 23 सितंबर, 2016 को हुए उस सौदे पर भी लागू होते हैं, जो 36 राफेल विमानों तथा उनके हथियारों की खरीद के लिए हुआ।

क्या कहा पीएम मोदी ने?
राफेल विमान सौदे पर देश को गुमराह किया गया। ये समझौता दो देशों के बीच हुआ है, दो व्यापारियों के बीच नहीं। दो जिम्मेदार सरकारों के बीच हुआ ये सौदा पूरी पारदर्शिता के साथ हुआ है। पीएम ने कहा कि पहली बार ऐसा हुआ कि दूसरे देश को भी हमारे सदन में बोले गए किसी नेता की बात का खंडन करना पड़ा। ऐसी बचकाना हरकतों से नेताओं को बचना चाहिए।

क्या कहा था राहुल गांधी ने?
राहुल ने संसद से बाहर निकलते हुए कहा, 'अब अगर फ्रांस इससे इनकार करता है तो उसे करने दीजिए। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने मुझे कहा था कि डील की जानकारी सार्वजनिक की जा सकती है। जब बातचीत हुई थी तब मेरे साथ पूर्व पीएम मनमोहन सिंह और आनंद शर्मा भी मौजूद थे।'

पहले क्या कहा था राहुल गांधी ने?
राहुल गांधी ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कहा था कि उनकी सरकार ने 520 करोड़ रुपये प्रति प्लेन में डील की थी, पता नहीं क्या हुआ किससे बात हुई और पीएम फ्रांस गए और जादू से हवाई जहाज की कीमत 1600 करोड़ प्रति प्लेन हो गई। उन्होंने कहा, 'रक्षा मंत्री ने पहले कहा कि मैं देश को हवाई जहाज का दाम बताऊंगी उसके बाद रक्षा मंत्री ने साफ कह दिया कि मैं यह आंकड़ा नहीं दे सकती हूं क्योंकि फ्रांस और भारत की सरकार के बीच सीक्रेसी अग्रीमेंट है।' उन्होंने कहा कि "मैंने व्यक्तिगत तौर पर फ्रांस के राष्ट्रपति से मुलाकात की और उनसे पूछा कि क्या भारत के साथ सूचना गुप्त रखने का कोई समझौता हुआ है। उन्होंने मुझसे कहा कि ऐसा कोई भी गोपनीय समझौता दोनों देश के बीच नहीं हुआ।"  

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।