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G-7 में शामिल होने के लिए रूस को लागू करना होगा मिंस्क एग्रीमेंट : जर्मन चांसलर

June 10th, 2018 19:56 IST

हाईलाइट

  • मिंस्क एग्रीमेंट को लागू करने पर ही होगी रूस की G-7 में एंट्री : जर्मन चांसलर
  • ट्रंप कह चुके हैं रूस को फिर से G-7 में शामिल करने की बात
  • G-7 में 1997 में शामिल हुआ था रूस, 2014 में कर दिया गया था बाहर

डिजिटल डेस्क, ला मलबेई। कनाडा के ला मलबेई में चल रही G-7 समिट के इतर जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल ने इस समूह में रूस के फिर से शामिल होने को लेकर एक बयान दिया है। मर्केल ने कहा है कि रूस तब तक G-7 समूह में शामिल नहीं हो सकता, जब तक वह यूक्रेन संकट का समाधान करने के लिए तैयार किए गए मिंस्क एग्रीमेंट को लागू करने के लिए आगे नहीं बढ़ता।

मर्केल ने कहा, 'G-7 के सदस्य देशों ने समूह में रूस की भागीदारी को लेकर चर्चा की है। मेरे अनुसार, यहां जरूरत है कि रूस मिंस्क एग्रीमेंट को लागू करने के संबंध में कुछ प्रगति दिखाए। जब तक यह नहीं होता तब तक मुझे इस ग्रुप में रूस के फिर से शामिल होने की कोई संभावना नजर नहीं आती।'
 



बता दें कि इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस को फिर से G-7 समूह में शामिल करने की बात कही थी। इटली के प्रधानमंत्री ग्यिूसेपे कोंटे ने भी ट्रंप के इस बयान का समर्थन किया था लेकिन यूरोपियन संघ के प्रेसिडेंट डोनाल्ड टस्क ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि G-7 में फिलहाल कोई बदलाव नहीं करना चाहिए।

गौरतलब है कि G-7 समूह दुनिया की सात सबसे ताकतवार अर्थव्यवस्था वाले देशों का ग्रुप है। इसमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, इटली, जापान और अमेरिका शामिल हैं। साल 1997 में रूस भी इस ग्रुप में शामिल हुआ था, इसके बाद इस समूह का नाम G-8 कर दिया गया था। 17 साल तक इस एलिट समूह का सदस्य रहने के बाद रूस को साल 2014 में इस समूह से निकाल दिया गया था। यूक्रेन संकट में रूस का हाथ और पश्चिमी देशों के साथ रूस के संबंधों में तनाव के बाद यह फैसला लिया गया था। बता दें कि पिछले चार-पांच सालों से रूस के रिश्ते पश्चिमी देशों के साथ अच्छे नहीं रहे हैं। कई मौकों पर रूस के नेता और पश्चिमी देशों के नेताओं के बयान एक-दूसरे देश के खिलाफ बेहद आक्रामक रहे हैं।

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।