comScore

 ब्लैक वाटर से लेकर G4S तक ये हैं दुनिया की सबसे दुर्दांत किराए की ARMY, जब-जब मैदान में उतरीं बहा दीं खून की नदियां

 ब्लैक वाटर से लेकर G4S तक ये हैं दुनिया की सबसे दुर्दांत किराए की ARMY, जब-जब मैदान में उतरीं बहा दीं खून की नदियां

हाईलाइट

  • क्या है ब्लैक वाटर कंपनी
  • रूस ने भी यूक्रेन वार में ऐसे ही किराए की सेना उतारी थी।
  • जानिए, दुनियाभर की ऐसी कुछ खून की नदियां बहा देने वाली किराए की ARMY के बारें में...

डिजिटल डेस्क (भोपाल):   इंटरनेशनल खबरों में इस समय ब्लैक वाटर कंपनी और डोनाल्ड ट्रंप सुर्खियों में हैं। क्या है ब्लैक वाटर कंपनी...। दरअसल, दुनियाभर में जब भी युद्ध होते हैं तो कई देश किराए की सेना का सहारा भी लेते हैं। इराक के खिलाफ अमेरिका ने किराए की सेना का इस्तेमाल किया था। रूस ने भी यूक्रेन वार में ऐसे ही किराए की सेना उतारी थी। ब्लैक वाटर कंपनी ऐसी ही अमेरिकी मिलिट्री कंपनी है जो किराए पर सेना उपलब्ध कराती है। ब्लैक वाटर कंपनी ने इराक के बगदाद में 16 सितंबर 2007 को निहत्थे लोगों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी। इस फायरिंग में 17 लोगों की मौत हो गई थी, जिसमें 2 मासूम बच्चे भी शामिल थे। इसके बाद जांच में यूएस फेडरल कोर्ट ने 2014 में ब्लैक वाटर कंपनी के 4 गार्ड्स को दोषी पाया था और सजा सुनाई थी। लेकिन हाल ही में दिसंबर 2020 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन चार दोषियों को माफी दे दी, जिसके बाद से दुनियाभर में ट्रंप की आलोचना हो रही है और एक बार फिर ब्लैक वाटर कंपनी की कार्यप्रणाली चर्चा में है। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्लैक वाटर कॉन्ट्रैक्ट लेकर काम करती है। इसकी स्थापना 1997 में एक रिटायर नेवी ऑफिसर ने की थी। 2007 में 1 लाख प्राइवेट सिक्योरिटी पर्सनल अमेरिकी ने इन्हें इराक में तैनात किया था, उसी साल के सितंबर में मशीन गन और ग्रेनेड से लैस Blackwater के गार्ड्स ने इराकी लोगों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इतिहास के पन्नों में इस घटना को Nisour Square नरसंहार के नाम से जाना जाता है। इस घटना के बाद कंपनी की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बदनामी हुई, जिसके बाद इसका 2 बार नाम बदला गया, 2009 में Xe Services और 2011 में इसका नाम Academi रखा गया। वहीं, ट्रंप के सभी दोषियों को माफी देने के इस निर्णय पर संयुक्त राष्ट्र ने तीखी आलोचना करते हुए चेतावनी दी है कि ट्रंप के इस कृत्य से इराक नरसंहार जैसे अपराध करने वालों को बढ़ावा मिलेगा। आइए, हम आपको बताते हैं दुनियाभर की ऐसी कुछ खून की नदियां बहा देने वाली  किराए की ARMY के बारें में... 

G4S विशाल सिक्योरिटी कंपनी

G4S को दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी प्राइवेट आर्मी माना जाता है। इसके यहां 6 लाख 25 हजार कर्मचारी काम करते हैं। इस कंपनी के गार्ड्स दुनियाभर में बैंक, जेल और हवाई अड्डे की सुरक्षा पर भी तैनात रहते हैं। जी 4 एस भी दुनिया भर में संकट के दौरान उन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 2008 में, G4S ने आर्मगोर्ग समूह को अपने में शामिल कर लिया, जिसकी 9,000 की मजबूत सेना ने इराक में सभी गैर-सैन्य आपूर्ति काफिलों की रक्षा की थी। यह अपने जंगली दलों के लिए कुख्यात है और अपनी दम पर अफगान सरदारों को भी कंट्रोल करती है। G4S ऐसी कंपनी है जो 125 से अधिक देशों में सुरक्षा संभालती है, जिसमें अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कुछ सबसे खतरनाक हिस्से शामिल हैं, जहां यह सरकारी एजेंसियों और निजी कंपनियों को भारी-सशस्त्र सुरक्षा बल, लैंड-माइन क्लीयरेंस, सैन्य खुफिया और प्रशिक्षण प्रदान करता है।

 यूनटी रिसोर्स ग्रुप (Unity Resources Group) 

 यूनटी रिसोर्स ग्रुप मध्य पूर्व से अफ्रीका, अमेरिका और एशिया में सक्रिय है। ऑस्ट्रेलिया की यह कंपनी दुनिया भर में 1,200 से अधिक कर्मचारियों के साथ इराक में जब संप्रभु सेनाएं वापस ले ली गई तब यह अपनी उपस्थिति को इराक में बढ़ाने में सक्षम रहे हैं। यह सेना ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और ग्रेट ब्रिटेन के दिग्गज लोगों का काम संभालती है। यह प्राइवेट सैन्य फर्म बगदाद में 2010 तक ऑस्ट्रेलियाई दूतावास की रखवाली के लिए सबसे अधिक जानी जाती है। इसने चिली के सैनिकों को मैन गेट्स और मशीन गन चलाने का प्रशिक्षण भी दिया था।

Erinys  

Erinys ने इराक की अधिकांश महत्वपूर्ण तेल संपत्तियों की रक्षा की है। Erinys ने भी अमेरिकी विदेश विभाग के अनुबंधों का इराक़ में काम संभाला है। हाल के वर्षों में इसका सबसे बड़ा मिशन अपने 16,000 गार्ड को ईराक के 282 स्थानों पर तैनात किया गया, जहां उन्होंने प्रमुख तेल पाइपलाइनों और अन्य ऊर्जा परिसंपत्तियों की रक्षा की। यह कंपनी अफ्रीका में भी चर्चित है, जहां उसने पारंपरिक रूप से अपने कार्यों को केंद्रित किया है। 

एशिया सिक्योरिटी ग्रुप (Asia Security Group) 
 
एशिया सुरक्षा समूह राष्ट्रपति करज़ई से जुड़ा एक शक्तिशाली अफगान बल है। अफगान राष्ट्रपति हामिद करजई के पहले चचेरे भाई हशमत करजई के स्वामित्व में, एशिया सुरक्षा समूह युद्धग्रस्त राष्ट्र में एक प्रमुख सिक्योरिटी ग्रुप है। इसमें लगभग 600 गार्ड कार्यरत हैं। इसका मुख्यालय काबुल में है। इस प्राइवेट सेना को अमेरिकी सेना से अनुबंध में लाखों डॉलर से सम्मानित किया गया है। कहा जाता है कि एशिया सिक्योरिटी ग्रुप अफगानिस्तान के दक्षिण में यात्रा करने वाले गठबंधन आपूर्ति काफिले की रक्षा करता है। 

कमेंट करें
E5Mdy
NEXT STORY

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।