comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

 ब्लैक वाटर से लेकर G4S तक ये हैं दुनिया की सबसे दुर्दांत किराए की ARMY, जब-जब मैदान में उतरीं बहा दीं खून की नदियां

 ब्लैक वाटर से लेकर G4S तक ये हैं दुनिया की सबसे दुर्दांत किराए की ARMY, जब-जब मैदान में उतरीं बहा दीं खून की नदियां

हाईलाइट

  • क्या है ब्लैक वाटर कंपनी
  • रूस ने भी यूक्रेन वार में ऐसे ही किराए की सेना उतारी थी।
  • जानिए, दुनियाभर की ऐसी कुछ खून की नदियां बहा देने वाली किराए की ARMY के बारें में...

डिजिटल डेस्क (भोपाल):   इंटरनेशनल खबरों में इस समय ब्लैक वाटर कंपनी और डोनाल्ड ट्रंप सुर्खियों में हैं। क्या है ब्लैक वाटर कंपनी...। दरअसल, दुनियाभर में जब भी युद्ध होते हैं तो कई देश किराए की सेना का सहारा भी लेते हैं। इराक के खिलाफ अमेरिका ने किराए की सेना का इस्तेमाल किया था। रूस ने भी यूक्रेन वार में ऐसे ही किराए की सेना उतारी थी। ब्लैक वाटर कंपनी ऐसी ही अमेरिकी मिलिट्री कंपनी है जो किराए पर सेना उपलब्ध कराती है। ब्लैक वाटर कंपनी ने इराक के बगदाद में 16 सितंबर 2007 को निहत्थे लोगों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी। इस फायरिंग में 17 लोगों की मौत हो गई थी, जिसमें 2 मासूम बच्चे भी शामिल थे। इसके बाद जांच में यूएस फेडरल कोर्ट ने 2014 में ब्लैक वाटर कंपनी के 4 गार्ड्स को दोषी पाया था और सजा सुनाई थी। लेकिन हाल ही में दिसंबर 2020 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन चार दोषियों को माफी दे दी, जिसके बाद से दुनियाभर में ट्रंप की आलोचना हो रही है और एक बार फिर ब्लैक वाटर कंपनी की कार्यप्रणाली चर्चा में है। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्लैक वाटर कॉन्ट्रैक्ट लेकर काम करती है। इसकी स्थापना 1997 में एक रिटायर नेवी ऑफिसर ने की थी। 2007 में 1 लाख प्राइवेट सिक्योरिटी पर्सनल अमेरिकी ने इन्हें इराक में तैनात किया था, उसी साल के सितंबर में मशीन गन और ग्रेनेड से लैस Blackwater के गार्ड्स ने इराकी लोगों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इतिहास के पन्नों में इस घटना को Nisour Square नरसंहार के नाम से जाना जाता है। इस घटना के बाद कंपनी की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बदनामी हुई, जिसके बाद इसका 2 बार नाम बदला गया, 2009 में Xe Services और 2011 में इसका नाम Academi रखा गया। वहीं, ट्रंप के सभी दोषियों को माफी देने के इस निर्णय पर संयुक्त राष्ट्र ने तीखी आलोचना करते हुए चेतावनी दी है कि ट्रंप के इस कृत्य से इराक नरसंहार जैसे अपराध करने वालों को बढ़ावा मिलेगा। आइए, हम आपको बताते हैं दुनियाभर की ऐसी कुछ खून की नदियां बहा देने वाली  किराए की ARMY के बारें में... 

G4S विशाल सिक्योरिटी कंपनी

G4S को दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी प्राइवेट आर्मी माना जाता है। इसके यहां 6 लाख 25 हजार कर्मचारी काम करते हैं। इस कंपनी के गार्ड्स दुनियाभर में बैंक, जेल और हवाई अड्डे की सुरक्षा पर भी तैनात रहते हैं। जी 4 एस भी दुनिया भर में संकट के दौरान उन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 2008 में, G4S ने आर्मगोर्ग समूह को अपने में शामिल कर लिया, जिसकी 9,000 की मजबूत सेना ने इराक में सभी गैर-सैन्य आपूर्ति काफिलों की रक्षा की थी। यह अपने जंगली दलों के लिए कुख्यात है और अपनी दम पर अफगान सरदारों को भी कंट्रोल करती है। G4S ऐसी कंपनी है जो 125 से अधिक देशों में सुरक्षा संभालती है, जिसमें अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कुछ सबसे खतरनाक हिस्से शामिल हैं, जहां यह सरकारी एजेंसियों और निजी कंपनियों को भारी-सशस्त्र सुरक्षा बल, लैंड-माइन क्लीयरेंस, सैन्य खुफिया और प्रशिक्षण प्रदान करता है।

 यूनटी रिसोर्स ग्रुप (Unity Resources Group) 

 यूनटी रिसोर्स ग्रुप मध्य पूर्व से अफ्रीका, अमेरिका और एशिया में सक्रिय है। ऑस्ट्रेलिया की यह कंपनी दुनिया भर में 1,200 से अधिक कर्मचारियों के साथ इराक में जब संप्रभु सेनाएं वापस ले ली गई तब यह अपनी उपस्थिति को इराक में बढ़ाने में सक्षम रहे हैं। यह सेना ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और ग्रेट ब्रिटेन के दिग्गज लोगों का काम संभालती है। यह प्राइवेट सैन्य फर्म बगदाद में 2010 तक ऑस्ट्रेलियाई दूतावास की रखवाली के लिए सबसे अधिक जानी जाती है। इसने चिली के सैनिकों को मैन गेट्स और मशीन गन चलाने का प्रशिक्षण भी दिया था।

Erinys  

Erinys ने इराक की अधिकांश महत्वपूर्ण तेल संपत्तियों की रक्षा की है। Erinys ने भी अमेरिकी विदेश विभाग के अनुबंधों का इराक़ में काम संभाला है। हाल के वर्षों में इसका सबसे बड़ा मिशन अपने 16,000 गार्ड को ईराक के 282 स्थानों पर तैनात किया गया, जहां उन्होंने प्रमुख तेल पाइपलाइनों और अन्य ऊर्जा परिसंपत्तियों की रक्षा की। यह कंपनी अफ्रीका में भी चर्चित है, जहां उसने पारंपरिक रूप से अपने कार्यों को केंद्रित किया है। 

एशिया सिक्योरिटी ग्रुप (Asia Security Group) 
 
एशिया सुरक्षा समूह राष्ट्रपति करज़ई से जुड़ा एक शक्तिशाली अफगान बल है। अफगान राष्ट्रपति हामिद करजई के पहले चचेरे भाई हशमत करजई के स्वामित्व में, एशिया सुरक्षा समूह युद्धग्रस्त राष्ट्र में एक प्रमुख सिक्योरिटी ग्रुप है। इसमें लगभग 600 गार्ड कार्यरत हैं। इसका मुख्यालय काबुल में है। इस प्राइवेट सेना को अमेरिकी सेना से अनुबंध में लाखों डॉलर से सम्मानित किया गया है। कहा जाता है कि एशिया सिक्योरिटी ग्रुप अफगानिस्तान के दक्षिण में यात्रा करने वाले गठबंधन आपूर्ति काफिले की रक्षा करता है। 

कमेंट करें
EkI6D
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।