दैनिक भास्कर हिंदी: ईरान के परमाणु समझौते पर बातचीत स्थगित, कुछ बिंदुओं पर अब भी असहमतियां

June 21st, 2021

हाईलाइट

  • ईरान के परमाणु समझौते का भविष्य फिर अधर में
  • परमाणु समझौते को बहाल करने के लिए वियना हो रही बातचीत स्थगित
  • कुछ बिंदुओं को लेकर अब भी असहमतियां

डिजिटल डेस्क, वियना। ईरान के परमाणु समझौते का भविष्य फिर अधर में आ गया है। 2015 में ईरान और छह विश्व शक्तियों के बीच हुए परमाणु समझौते को बहाल करने के लिए वियना हो रही बातचीत स्थगित हो गई है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार अधिकारियों का कहना है कि कुछ बिंदुओं को लेकर अब भी असहमतियां हैं, जिन्हें हल किए जाने की ज़रूरत है।

करीब एक हफ़्ते तक बातचीत करने के बाद अब सभी पक्ष वापस लौट रहे हैं। ईरान के शीर्ष वार्ताकार अब्बास अरक़ची ने वियना से ईरान के सरकारी टीवी चैनल से कहा, 'अब हम समझौते से पहले की तुलना में कहीं ज़्यादा करीब हैं, लेकिन अभी भी हमारे बीच कुछ ऐसी दूरियां हैं जिन्हें पाटना आसान काम नहीं है। आज रात हम तेहरान लौट जाएंगे। माना जा रहा है कि अगले 10 दिनों में फिर से बातचीत शुरू हो सकती है। हालांकि अभी इसे लेकर अभी कोई तारीख़ निर्धारित नहीं की गई है।

इस साल अप्रैल से ही वियना में परमाणु समझौती की बहाली को लेकर बातचीत चल रही है। मध्य अगस्त से नया ईरानी प्रशासन पद संभालेगा। अब बातचीत रुकने के बाद सबका ध्यान ईरान और संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अन्य समझौते पर चला गया है। 24 जून को यह समझौता समाप्त हो जाएगा। इसका मकसद ईरान को 2015 के परमाणु समझौते पर नज़र रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के सुझाए उपायों को कम करने से रोकना है।

बता दें कि ईरान में कट्टरपंथी नेता इब्राहीम रईसी देश ने नए राष्ट्रपति चुने गए हैं। हसन रूहानी के बाद अब रईसी शुक्रवार को पद पर काबिज हो होंगे। रईसी को पश्चिमी देशों का मुखर आलोचक माना जाता है। हसन रूहानी के शासन काल में ही ईरान परमाणु समझौता बिखर गया था। हालांकि इसकी उम्मीद कम है कि रईसी इस बारे में ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातोल्ला अली ख़ामेनेई से अलग कोई कदम उठाएंगे। ईरान में नीतियों से सम्बन्धित लगभग सभी फ़ैसले खामेनेई ही लेते हैं।

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साल 2018 में अमेरिका को ईरान परमाणु समझौते से अलग कर लिया था। ट्रंप का कहना था कि इस समझौते की शर्तें ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए काफ़ी नहीं हैं। परमाणु समझौते से अलग होने के बाद ट्रंप ने ईरान पर कड़ी आर्थिक पाबंदियां भी लगा दी थीं। इसके बाद से ही ईरान यूरेनियम संवर्धन की तय सीमा का उल्लंघन करता आया है।

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