दैनिक भास्कर हिंदी: US Election 2020: बाइडेन-हैरिस ने जीता अमेरिका चुनाव, ट्रंप समर्थकों ने किया विरोध प्रदर्शन

November 8th, 2020

हाईलाइट

  • बाइडेन-हैरिस ने जीता अमेरिका चुनाव
  • ट्रंप समर्थकों ने किया विरोध प्रदर्शन

डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाइडेन और उनके साथ मैदान में उतरीं कमला हैरिस को विजेता घोषित किए जाने के बाद जमकर विरोध प्रदर्शन किया। 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के परिणामों का विरोध करते हुए ट्रंप समर्थक देश भर में सड़कों पर उतर आए।

4 दिन तक धीमी रफ्तार से चली मतगणना के बाद 77 वर्षीय बाइडेन ने ट्रंप को हराकर अमेरिका में एक महान राजनीतिक पारी की शुरूआत की है। लगभग 160 साल पहले इसी समय के आसपास अब्राहम लिंकन अमेरिकी राष्ट्रपति चुने गए थे।

शनिवार को सुबह करीब 11.30 बजे (स्थानीय समय) उस समय बाइडेन की जीत दर्ज हुई, जब एनबीसी, बीबीसी और द वाशिंगटन पोस्ट ने कहा कि पेन्सिलवेनिया बाइडेन की हुई। द हिल न्यूज वेबसाइट के मुताबिक, इस घोषणा के तुरंत बाद राष्ट्रपति के समर्थक जॉर्जिया, मिशिगन और विस्कॉन्सिन राज्यों में सड़कों पर उतर आए।

अटलांटा में जॉर्जिया राज्य कैपिटल के सामने कम से कम 200 प्रदर्शनकारी इकट्ठा हो गए। जॉर्जिया पारंपरिक रूप से रिपब्लिकन राज्य माना जाता है, यहां ट्रंप समर्थकों ने नारे लगाए। इसी तरह हैरिसबर्ग, पेन्सिलवेनिया में भी विरोध प्रदर्शन किए गए और ट्रंप समर्थकों ने चोरी बंद करो जैसे नारे लगाए। परिणाम का विरोध करने के लिए मैडिसन, विस्कॉन्सिन में भी प्रदर्शनकारी एकत्रित हुए। सलेम, ओरेगन में, सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने ओरेगन स्टेट कैपिटल के बाहर रैली की।

मिशिगन में प्रदर्शनकारी एक साथ प्रार्थना कर रहे थे, उन्हें विश्वास नहीं था कि वह हार गए थे। उन्होंने चुनाव परिणामों की वैधता पर संदेह जताया। बता दें कि अभी जॉर्जिया, एरिजोना, पेन्सिलवेनिया, अलास्का और उत्तरी कैरोलाइना में वोटों की गिनती जारी है। इनमें से अलास्का और उत्तरी कैरोलाइना में ट्रंप आगे हैं।

राष्ट्रपति ने बाइडेन की जीत को मानने से इनकार कर दिया है और अपने एक ट्वीट में कहा है, ऑब्जर्वरों को काउंटिंग रूम में शामिल नहीं किया गया है। मैं चुनाव जीत गया, मुझे कानूनी तौर पर 71 लाख वोट मिले हैं। लेकिन हमारे ऑब्जर्वरों को देखने की अनुमति नहीं दी गई, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ, मेल के जरिए लाखों ऐसे लोगों को मतपत्र भेजे गए, जिन्होंने कभी इनकी मांग ही नहीं की थी।

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