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Britain: हांगकांग के साथ प्रत्यर्पण संधि में बदलाव करेगा ब्रिटेन, चीन के नए सुरक्षा कानून के विरोध में फैसला

Britain: हांगकांग के साथ प्रत्यर्पण संधि में बदलाव करेगा ब्रिटेन, चीन के नए सुरक्षा कानून के विरोध में फैसला

हाईलाइट

  • ब्रिटेन की सरकार हांगकांग के साथ अपनी प्रत्यर्पण व्यवस्था में बदलाव करने जा रही
  • चीन के हांगकांग पर थोंपे गए नए सुरक्षा कानून के चलते ब्रिटेन यह कदम उठा रहा
  • ब्रिटेन ने 5जी नेटवर्क से चीन की हुवावे को 2027 के अंत तक पूरी तरह हटाने की घोषणा की थी

डिजिटल डेस्क, लंदन। ब्रिटेन की सरकार हांगकांग के साथ अपनी प्रत्यर्पण व्यवस्था में बदलाव करने जा रही है। चीन के हांगकांग पर थोंपे गए नए सुरक्षा कानून के चलते ब्रिटेन यह कदम उठा रहा है। प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा कि उन्हें नए कानून और चीन में कथित मानवाधिकारों के दुरुपयोग के बारे में चिंता है, विशेष रूप से उइगर अल्पसंख्यकों को लेकर। इससे पहले ब्रिटेन ने 5जी नेटवर्क से चीन की हुवावे को 2027 के अंत तक पूरी तरह हटाने की घोषणा की थी।

ब्रिटेन ने बताया सीनो-ब्रिटिश जॉइंट डिक्लेरेशन का उल्लंघन
बता दें कि जॉनसन की सरकार लगातार हांगकांग पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू करने के चीन के फैसले की आलोचना कर रहा है। ब्रिटेन ने चीन सरकार पर सीनो-ब्रिटिश जॉइंट डिक्लेरेशन के उल्लंघन का आरोप लगाया है। चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के जवाब में ब्रिटेन ने हांगकांग के नागरिकों को ब्रिटिश नागरिकता देने का फैसला भी लिया था। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने संसद में कहा था कि हम अपने पुराने साथी के साथ नियमों और दायित्वों के लिए खड़े हैं। इस कानून के तहत 30 लाख हांगकांग निवासियों को ब्रिटेन में बसने का अवसर दिया जाएगा।

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पिछले महीने पास हुआ था नया कानून
बता दें कि चीन की नेशनल पीपल्स कांग्रेस की स्थायी समिति ने पिछले महीने सर्वसम्मति से हांगकांग के लिए नेशनल सिक्योरिटी लॉ को पारित किया था। इस कानून के पारित होने से हांगकांग के अधिकारों, स्वायत्तता में कटौती हो गई है। इस कानून में जेल में अधिकतम सजा उम्रकैद है। जानकारों का कहना है कि नेशनल सिक्योरिटी लॉ के पास होने से राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर हांगकांग की आजादी अब खत्म हो गई है।

राजद्रोह और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे की परिभाषा तय करने का अधिकार अब चीन और उसकी कठपुतली चीफ एक्जीक्यूटिव सरकार को मिल गया है। इस लॉ के बहाने अब लोकतंत्र समर्थकों और आजाद हांगकांग की मांग करने वालो को निशाना बनाया जा रहा है। जानकार इसे हांगकांग की लोकतंत्र की उम्मीदों के ताबूत में आखिरी कील बता रहे हैं। नेशनल सिक्योरिटी लॉ के लागू होने के 24 घंटे से कम समय में प्रदर्शन कर रहे कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था।

हांगकांग को अपने कब्जे में लेना चाहती है चीनी सरकार
1997 में हांगकांग की 99 साल की लीज खत्म होने से पहले 1984 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर और चीन के प्रमुख झाओ ज़ियांग ने सीनो ब्रिटिश जॉइंट डिक्लेरेशन पर साइन किया था। इस डिक्लेरेशन के तहत दोनों देश इस बात पर राजी हुए कि चीन 50 साल के लिए 'एक देश-दो व्यवस्था' की नीति के तहत हांगकांग को कुछ पॉलिटिकल और सोशल ऑटोनॉमी देगा। इसके बाद चीन ने हांगकांग को विशेष प्रशासनिक क्षेत्र का दर्जा दिया।

अब हांगकांग के पास अपना एक मिनी संविधान था। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे नागरिक अधिकार थे। हालांकि इस नए सिस्टम में हांगकांग के लोगों पर 50 साल की तलवार भी लटक रही थी जिसके बाद उन्हें दिए गए स्वायत्तता के अधिकार छीन लिए जाने थे। 50 साल की मियाद 2047 में पूरी होनी है, लेकिन चीन की कम्युनिस्ट सरकार 50 साल का भी इंतजार करने को राजी नहीं है। वो अभी से हांगकांग को अपने कब्जे में लेना चाहती है। इसी वजह से वह नेशनल सिक्योरिटी लॉ लेकर आई है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।