US-Iran War: जंग के बावजूद ईरान शहंशाह! तेल-गैस की शर्टेज में भी ये खाड़ी देश की हो रही बंपर कमाई, भारत की क्या है स्थिति

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध का खामियाजा दुनियाभर के कई देशों को भुगतना पड़ रहा है। इस युद्ध के चलते ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर दिया है। जिसके बाद दुनियभार में गैस-तेल की किल्लत देखने को मिल रही है। हालांकि, इन सबके बावजूद युद्ध में पिस रहे ईरान समेत मिडिल ईस्ट के दो ऐसे भी देश हैं जिनके पास पैसों की बोछार हो रही है। आखिर क्या है इन सबके पीछे का गणित। आइए विस्तार से जानते हैं
क्यों बंद किया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज? कैसे इससे ईरान को हो रहा फायदा
मिडिल ईस्ट में 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमले के बाद ईरान से युद्ध शुरु हुआ था। इसके बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर दिया था। दरअसल, इस स्ट्रेट से दुनिया के लगभग 20% तेल और लिक्विड नेचुरल गैस (एलएनजी) सप्लाई होती है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने के बाद ईरान ने कहा कि जो जहाज अमेरिका और इजराइल से ताल्लुक नहीं रखते हैं, सिर्फ उन्हीं जहाजों को स्ट्रेट से जाने दिया जाएगा। हालांकि, कुछ टैंकर निकले तो सही, लेकिन वैश्विक बाजार में हाहाकार मच गया।
हालांकि, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने के बाद मिडिल ईस्ट के देशों को फायदा पहुंचा रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भूगोल से ऐसा मुमकिन हो पाया है। ईरान, ओमान और सऊदी अरब को काफी फायदा पहुंचा है। क्योंकि उनके पास वैकल्पिक रास्ते हैं। जबकि, इराक, कुवैत और कतर के तेल होर्मुज में फंस गए हैं। क्योंकि उनके पास कोई बायपास नहीं है। दरअसल, यूएई ने पाइपलाइन से थोड़ा बचाव, लेकिन उसकी इनकम थोड़ी घट गई। लिहाजा, ज्यादातर देशों के क्रूड एक्सपोर्ट मार्च 2026 में 2025 की तुलना में काफी कम हो गए थे।
युद्ध के बीच ईरान, ओमान और सऊदी अरब को कैसे हो रहा फायदा
मिडिल ईस्ट में अमेरिका के हमलों के नुकसान के साथ-साथ ईरान को फायदा भी हुआ है। चाहें वो ग्लोबल इमेज के लिए हो या पैसों के मामले में।
ईरान की बात करें तो अनुमानित तेल निर्यात आय मार्च में 37% बढ़कर 5.7 बिलियन डॉलर हो गई। यह 2025 में 4.2 बिलियन डॉलर थी। जबकि, एक्सपोर्ट वॉल्यूम करीब 57.4 मिलियन बैरल था। जो 2025 के 58.5 मिलियन के बराबर नहीं था। यान तेल की कीमतों की भारी बढ़ोतरी ने पूरा खेल पलट दिया।
ओमान में तेल से कमाई 26% बढ़कर 2.9 बिलियन डॉलर हो गई, जो 2025 में 2.3 बिलियन डॉलर थी। एक्सपोर्ट 29.1 मिलियन बैरल हो गया, जो पिछले साल 32 मिलियन बैरल था।
सऊदी अरब की आय 4.3% बढ़कर 13.5 बिलियन डॉलर हो गई, जो 2025 में 13 बिलियन डॉलर थी। एक्सपोर्ट 136 मिलियन बैरल हुआ, जो पिछले साल 181.8 मिलियन बैरल था।
यदि देखा जाए तो भूगोल की वजह से तीनों देशों को होर्मुज संकट के बावजूद फायदा पहुंचा है। ईरान के पास होर्मुज पर कंट्रोल है, जबकि सऊदी अरब और ओमान के पास बायपास रूट है।
इराक को सबसे ज्यादा नुकसान क्यों पहुंचा
युद्ध के चलते इराक की तेल निर्यात आय करीब 76% से गिरकर केवल 1.7 बिलियन डॉलर रह गई है। यह 2025 में 7.3 बिलियन डॉलर थी। एक्सपोर्ट में भारी गिरावट आने से 17.4 मिलियन बैरल रह गया। यह पिछले साल 101.7 मिलियन बैरल था। इस नुकसान का सबसे बड़ा कारण रूट ब्लॉकेज है। दरअसल, इराक के पास होर्मुज के अलावा अन्य कोई बायपास रूट नहीं है। इराक की स्टेट मार्केटिंग कंपनी सोमो ने 2 अप्रैल 2026 को बताया कि अप्रैल में रेवेन्यू लगभग 2 बिलियन डॉलर के करीब रहेगा। एक इराकी क्रूड से भरा टैंकर बाद में निकला क्योंकि ईरान ने कहा था कि इराक को छूट मिलेगी, लेकिन कुल नुकसान बहुत बड़ा रहा।
कुवैत, कतर और यूएई को कितना नुकसान?
इन देशों के नुकसान के पीछे की कहनी बड़ी दिलचस्प है। क्योंकि ईरान जमीन और आसमान से मिसाइल हमले कर रहा है। इस वजह से इनकम में भी बारी असर देखने को मिल रहा है।
कुवैत में तेल से कमाई करीब 73% गिरकर 0.9 बिलियन डॉलर रह गई। यह 2025 में 3.3 बिलियन डॉलर थी। एक्सपोर्ट 8.7 मिलियन बैरल तक गिर गया, जो पिछले साल 45.5 मिलियन बैरल था।
कतर की बात करें तो आय 1.2 बिलियन डॉलर घटी। एक्सपोर्ट 5.6 मिलियन बैरल हो गया। यह 2025 में 23.8 मिलियन बैरल था। वहीं, यूएई की आय 2.6% घट गई। इस बार 6.6 बिलियन डॉलर रही, जो 2025 में 6.8 बिलियन डॉलर थी। एक्सपोर्ट 66 मिलियन बैरल हो गया, जो 2025 में 94.5 मिलियन बैरल था। UAE को हबशान-फुजैरा पाइपलाइन (1.5-1.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन) ने कुछ हद तक बचाया, जो होर्मुज को बायपास करती है। फिर भी कीमत बढ़ने के बावजूद वॉल्यूम कम होने से नुकसान हुआ।
सऊदी अरब को सबसे ज्यादा फायदा और भारत की स्थिति क्या?
1980 के दशक में सऊदी अरब ने ईरान-इराक युद्ध के दौरान 1,200 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन बनाई थी। यह पाइपलाइन होर्मुज को बायपास कर रेड सी के यंबू पोर्ट तक तेल पहुंचाती है। यह 7 मिलियन बैरल प्रतिदिन क्षमता पर चल रही है। सऊदी ने मार्च 2026 में 4.39 मिलियन बैरल प्रतिदिन क्रूड एक्सपोर्ट किया, जो 26% कम था, लेकिन ऊंची कीमतों ने कुल वैल्यू में 558 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी कर दी।
इसके अलावा, स्टेट ऑयल कंपनी अरामको से ज्यादा रॉयल्टी और टैक्स मिला, जो सरकार की आमदनी बढ़ाने में मददगार साबित हुआ। सऊदी ने फरवरी में ही एक्सपोर्ट बढ़ाकर अप्रैल 2023 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर छू लिया था।
वहीं, भारत रोजाना करीब 5.6 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल प्रोसेस करता है। पहले 40% आयात होर्मुज स्ट्रेट से होकर आता था। मार्च 2026 में स्ट्रेट बंद होने के बाद कुल क्रूड आयात 15-23% कम हो गया। गल्फ से आने वाले तेल में 60% तक की गिरावट आई, लेकिन अच्छी खबर ये है कि भारत ने पहले से ही डाइवर्सिफिकेशन शुरू कर दिया था। अब 70% क्रूड होर्मुज से बाहर के रूट से आ रहा है, जो पहले 55% था। रूस से आयात 90% बढ़ गया। कुल मिलाकर भारत 41 से ज्यादा देशों से तेल खरीद रहा है।
भविष्य में तेल एक्सपोर्ट में आएगा परिवर्तन
एक्सपर्ट्स की मानें तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को मंगलवार तक डील करने की वॉर्निंग दी है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं होता है तो ईरान को नर्क बना देंगे। इसके बावजूद ईरान ने अभी तक होर्मुज खोलने से इनकार किया है. इस कॉन्फ्लिक्ट से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी भारी असर पड़ रहा है। ऊंची तेल कीमतें मुद्रास्फीति बढ़ा रही हैं, लेकिन गल्फ देशों के लिए भविष्य पूरी तरह उनके भूगोल और पाइपलाइनों पर टिकेगा।
Created On :   7 April 2026 4:17 PM IST












