युद्ध के 30वें दिन अमेरिकी सेना का फाइनल वॉर!: पेंटागन ने ईरान के भीतर इन चार अहम ठिकानों को बनाया टारगेट, जल्द बातचीत की टेबल पर आएगा तेहरान?

डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। मिडिल ईस्ट युद्ध के 30वें दिन अमेरिका का सबसे बड़ा और अंतिम हमले का प्लान सामने आया है। अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन ने बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के भीतर हफ्तों तक चलने वाली "जमीना सैन्य अभियान" की रणनीति बना ली है। अब हमला सिर्फ हवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ईरान की जमीन से भी किया जाएगा। इसके लिए अमेरिकी सैनिक उसकी जमीन पर तैनात है, जिसमें सीधे छापेमारी की कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
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ठिकानों पर कार्रवाई के बाद तुरंत लौटने की तैयारी
पेंटागन ने अपने बयान में बताया कि ऐसे सैन्य विकल्पों पर काम किया जा रहा है, जो बड़े पैमाने पर युद्ध की कार्रवाई नहीं की जाएगी, बल्कि विशेष बलों और तेज कार्रवाई के बाद तुरंत सैनिक वापस लौट आएंगे। इस कार्रवाइयों में कई विशेष ठिकाने शामिल है। इसके लिए अमेरिकी सैना विचार-विमर्श कर रही है।
सूत्रों का कहना है कि अब यह अभियान "महीनों नहीं, बल्कि कुछ हफ्तों" तक चल सकता है, लेकिन इसका असर काफी बड़ा नजर आ सकता है। उन्होंने आगे बताया कि अमेरिका पहले से ही अपने हजारों सैनिक और मरीन कमांडो को मध्य पूर्व में उतार चुका है, जो जरूरत पड़ने पर तुरंत अपना ऑपरेशन शुरु कर देंगे।
अमेरिका की इस कार्रवाई का मुख्य उद्धेश्य
जानकारी के मुताबिक, अमेरिका की अपने इस कार्रवाई का मुख्य उद्धेश्य ईरानी सैन्य क्षमता को कमजोर बनाना है, जिसमें मिसाइल लॉन्च सिस्टम, एयर डिफेंस सिस्टम और समुद्री ठिकानों को टारगेट बनाया जा सकता है। जिनकी जरिए ईरान अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्ग में बाधा और खतरा बना हुआ है।
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अमेरिका के इस टारगेट में सबसे अहम खार्ग आइसलैंड है। यह ईरान का सबसे बड़ा तेल निर्यात केंद्र है। अगर अमेरिकी सैना इस द्वीप पर कब्जा कर लेता है तो इससे ईरान बातचीत की टेबल पर आ सकता है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) बेहद मजबूत स्थिति में है। जो ड्रोन, मिलाइलों और समुद्री हमलों से इसका जवाब दे सकती है।
अमेरिकी सैना के ईरान में ये चार टारगेट?
- सबसे महत्वपूर्व खार्ग द्वीप है, जो ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने का लिए जरूरी है।
- समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कब्जा करना है। इसके लिए अमेरिका को लारक द्वीप पर हमला करना होगा।
- ईरान के परमाणु ठिकानों पर छापेमारी करना, जिसमें अबू मौसा और आसपास के कई द्वीप शामिल है। यहां से संवर्धित यूरेनियम को अपने कब्जे में लेने के लिए अमेरिका ने अपनी सेना के दस्ते को भेजा है।
- इसके साथ ही अमेरिका ईरानी तेल ले जा रहे जहाजों को बीच समुद्र में रोकने का काम करेगा।
Created On :   29 March 2026 3:46 PM IST













