US-Israel Iran War: ईरानी हमले में अमेरिका का सबसे अहम E-3 Sentry AWACS विमान दो हिस्सों में बटा? कई हवाई ईंधन प्लेन तबाह

डिजिटल डेस्क, तेहरान। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच हमले जारी है। इस बीच ईरान ने दावा किया है कि उसने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर मिसाइल से हमला किया है। इस दौरान अमेरिकी वायुसेना का सबसे अहम E-3 Sentry AWACS दो टुकड़ो में बट गया है। इसके साथ ही हवा में ईंधन भरने वाले खई टैंकर विमान भी इस हमले की चपेट में आ गए हैं। इसके साथ ही ईरान ने दावा किया कि इस हमले में 10 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक भी घायल हुए है, जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। इस घटना की सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें सामने आई है, जिसमें E-3 Sentry AWACS विमान को भारी नुकसान होते हुए दिखाई दे रहा है। हालांकि, अमेरिका की तरफ से इस हमले को लेकर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
संभावित खतरे का पता लगाना
इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर इस हमले से जुड़ी कुछ तस्वीरें साझा की है, जिसमें बर्बाद हुए विमान की तस्वीरें दिखाई दे रही है। वहीं, फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, इस हमले से पहले इस बेस पर करीब छह E-3 Sentry प्लेन मौजूद थे। बता दें कि यह एक सर्विलांस विमान है, जो आसमान से दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने का काम करता है। इसके साथ ही संभावित खतरे का पता भी लगाता है। इस हमले की वजह से अमेरिका के एरियल ऑपरेशन की क्षमता को लेकर चिंताएं पैदा हो गई हैं। वॉशिंगटन ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि इस एक विमान की कीमत $700 मिलियन (₹6600 करोड़) के आसपास है।
अमेरिका के लिए यह विमान क्यों है अहम?
अमेरिका के एरियल ऑपरेशन के लिए यह विमान उसके लिए बैकबोन माना जाता है। अमेरिका इसका इस्तेमाल हवा में एक कंट्रोल एंड कमांड सेंटर की तरह करता है, जो अमेरिकी वायुसेना को इंटेलिजेंस, सर्विलांस और निकॉनिसेंस यानी खुफिया जानकारी जुटाने जैसे कई काम करता है। अमेरिका इस विमान का इस्तेमाल 1970 के दशक से करता आ रहा है, तब से लेकर अब तक इसे कई बड़े सैन्य अभियानों में सेवाएं दे चुका है। जिसमें ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म, कोसोवो युद्ध, इराक और अफगानिस्तान अभियानों, ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व शामिल है। इस विमान के जरिए विशाल हवाई क्षेत्र की निगरानी, अलग-अलग लड़ाकू विमानों के बीच तालमेल बैठाने में भी सक्षम है। अमेरिका के अलावा फ्रांस, ब्रिटेन और सऊदी अरब जैसे कई देश की सेनाएं इस विमान की सेवाएं लेती है।
Created On :   29 March 2026 7:19 PM IST












