Iran Israel US War: मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच पीएम मोदी और ट्रंप के बीच हुई पहली बातचीत, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने पर बनी बात? जानें

मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच पीएम मोदी और ट्रंप के बीच हुई पहली बातचीत, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने पर बनी बात? जानें
मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच मंगलवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोन पर बातचीत हुई है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच मंगलवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोन पर बातचीत हुई है। इस दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्रिय स्थिरता बनाए रखने और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर बल दिया। बता दें, मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजराइल-ईरान में 28 फरवरी से जंग जारी है।

पीएम मोदी की डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर हुई बात

इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति का फोन आया था और दोनों नेताओं ने मीडिल ईस्ट की स्थिति पर चर्चा की।

पीएम मोदी ने कहा, "भारत तनाव कम करने और जल्द से जल्द शांति बहाल करने का समर्थन करता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का खुला, सुरक्षित रहना पूरी दुनिया के लिए जरूरी है। हमने शांति और स्थिरता के प्रयासों के संबंध में संपर्क में रहने पर सहमति जताई।"

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा, "राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की। उन्होंने मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने के महत्व पर जोर दिया गया। इससे पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा था कि उन्होंने ईरान को फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए दी गई समयसीमा बढ़ा दी है। उन्होंने ये भी कहा कि ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर संभावित हमले को पांच दिन के लिए टाल दिया गया है।"

विदेश मंत्री एस जयशंकर और मार्को रूबियो की हुई बात

इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से फोन पर बात की थी। इस दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया संघर्ष के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर चर्चा की थी। इसमें ऊर्जा सुरक्षा अहम विषय रहा था। सोशल मीडिया पर एस जयशंकर ने बताया कि बातचीत में अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर संकट के प्रभावों पर विस्तार से विचार हुआ और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताओं पर भी विशेष चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने परस्पर प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर संपर्क में रहने पर सहमति जताई।

वाशिंगटन में अमेरिकी विदेश विभाग ने भी इस बातचीत की पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की और सहयोग जारी रखने के महत्व पर जोर दिया। इसी क्रम में जयशंकर ने खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के सदस्य देशों सऊदी अरब, यूएई, ओमान, कतर, बहरीन और कुवैत के राजदूतों से मुलाकात कर क्षेत्रीय हालात और भारत की ऊर्जा सुरक्षा चिंताओं पर चर्चा की। उन्होंने भारतीय समुदाय को दिए जा रहे निरंतर समर्थन के लिए इन देशों का आभार भी जताया।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। माना जा रहा है कि होर्मुज मार्ग के अवरुद्ध होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है। एस जयशंकर ने श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिथा हेरथ (Vijitha Herath) और जर्मनी के विदेश मंत्री से भी बात कर इस संकट के प्रभावों पर चर्चा की। भारत ने दोहराया कि वह क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर काम करता रहेगा।

Created On :   24 March 2026 10:07 PM IST

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