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Coronavirus: 84,000 लोगों पर 1 आइसोलेशन बेड, 36,000 लोगों पर 1 क्वारंटाइन बेड, जानिए कैसे हैं देश के स्वास्थ्य हालात

March 24th, 2020 09:16 IST
Coronavirus: 84,000 लोगों पर 1 आइसोलेशन बेड, 36,000 लोगों पर 1 क्वारंटाइन बेड, जानिए कैसे हैं देश के स्वास्थ्य हालात

हाईलाइट

  • देश में 84,000 भारतीयों के बीच एक आइसोलेशन बेड है
  • 11,600 भारतीयों के लिए एक डॉक्टर है
  • 1,826 नागरिकों पर अस्पताल में एक बिस्तर है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में जहां एक तरफ कोरोना वायरस को हराने के लिए हर तरह से जंग जारी है, वहीं इससे निपटने के लिए देश में संसाधनों की कमी है। देश में 84,000 भारतीयों के बीच एक आइसोलेशन बेड है, 36,000 भारतीयों के बीच एक क्वारंटाइन बेड है। 11,600 भारतीयों के लिए एक डॉक्टर है और 1,826 नागरिकों पर अस्पताल में एक बिस्तर है। ये आंकड़े केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा एकत्र किए गए हैं, इसमें 17 मार्च तक का डाटा है। 

एक अंग्रेजी अखबार की वेबसाइट के मुताबिक, आईसीएमआर-इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी के निदेशक अनुराग अग्रवाल का कहना है कि हम ट्रांसमिशन के स्टेज 2 में हैं, और इस स्तर पर सामाजिक दूरी बहुत प्रभावी है। स्टेज 3 में लॉकडाउन की आवश्यकता होती है। निगरानी आंकड़ों के आधार पर, ICMR ने यह बहुत स्पष्ट कर दिया है कि हर मामले को इस प्रकार समझाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जनता कर्फ्यू भविष्य के लिए अच्छा अभ्यास है। मौजूदा आंकड़ों के आधार पर, सरकार सही काम कर रही है।

शुक्रवार को पीएम मोदी का मुख्यमंत्रियों और राज्य के स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ बैठक करने पर ICMR के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने कहा कि भारत इस समय स्टेज 2 में है। उन्होंने स्वास्थ्य सुविधाओं के विवेकपूर्ण उपयोग के महत्व के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि इस वायरस से निपटने का यह सही वक्त है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रोफाइल 2019 के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में 1,154,686 रजिस्टर्ड एलोपैथिक डॉक्टर हैं और सरकारी अस्पताल में 7,39,024 बिस्तर हैं।

135 करोड़ की आबादी के लिए स्वास्थ्य का यह बुनियादी ढांचा बहुत कमजोर है. ऐसे में COVID-19 के मामले में एक समस्या यह है कि निजी क्षेत्र अभी तक प्रबंधन योजना का हिस्सा नहीं है। इसका मतलब है कि मरीजों के लिए केवल सरकारी बिस्तर उपलब्ध हैं। उनका इलाज सरकारी अस्पताल में ही होगा।
 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।