दैनिक भास्कर हिंदी: ISI की नापाक करतूत, भारत के खिलाफ तैयार कर रहा नया आतंकी संगठन

December 19th, 2017

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आजादी के बाद से ही भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर एक बड़ा मुद्दा रहा है। कश्मीर ही एक ऐसा गढ़ भी माना जाता है, जहां से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आतंकी संगठनों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ करती रही है। भारत में आतंक फैलाने के लिए ISI लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों को पालती रही है। मगर अब एक खुफिया खबर आ रही है कि ISI इस कश्मीर क्षेत्र में नए आतंकी संगठन को खड़ा करने की कोशिश कर रहा है।

एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ISI जिस आतंकी संगठन को भारत के खिलाफ तैयार कर रही है, वह संगठन ज्यादा पुराना नहीं है। इस आतंकी संगठन का नाम तहरीक-जिहाद-ए-इस्लामी (TJI) है। इसका का गठन 1979 में हुआ था। रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI इस आतंकी संगठन को फिर से खड़ा कर रही है। हालिया खुफिया रिपोर्ट (दिसंबर MAC रिपोर्ट) में TJI के नेता अशफाक बरवाल का जिक्र है।

रिपोर्ट के मुताबिक अशफाक को 10 दिसंबर को रात में करीब 10:30 पर लंजोत गांव में देखा गया। अशफाक बरवाल को लंजोत गांव में लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के पास ही घूमते हुए देखा गया है। ऐसा माना जा रहा है कि अशफाक और उसके लोग यहां इलाके की जानकारी लेने आए थे। LoC पर नार गैप और साब्रा गैप के इलाके में अशफाक काम करने की तैयारी में है।

अशफाक के इतर अबू उर्फ छोटू नाम के आतंकी को जम्मू-कश्मीर में घुसाया जा चुका है। इसे 12 दिसंबर को बांदीपोरा के मदवां में देखा गया था। हाल के दिनों में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को हुए नुकसान के बाद इस तरह की तैयारियां की जा रही हैं। बताया गया है कि ISI द्वारा इलाके से परिचित होने के बाद अशफाक और उसके संगठन के लोगों को आतंकी गतिविधियों में लगाने की तैयारी है।

इस साल 203 आतंकवादियों को किया ढेर
जम्मू और कश्मीर में 'ऑपरेशन ऑल आउट' के दौरान भारतीय सेना ने इस साल 203 आतंकवादियों को ढेर कर दिया है। गृह मंत्रालय की दी जानकारी के मुताबिक इस साल जम्मू और कश्मीर में 10 दिसंबर तक ही 203 आतंकवादियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया। वहीं पिछले साल 2016  में सुरक्षा बलों से मुठभेड़ों में 148 आतंकवादी ढेर हुए थे. 2015 में 108 आतंकवादी मारे गए थे। बीते 3 साल में आतंकवादियों के मारे जाने का ये सबसे बड़ा आंकड़ा है। गृह मंत्रालय की ओर से लोकसभा में लिखित जवाब में ये जानकारी दी गई।