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किसान आंदोलन: सरकार के साथ किसानों की बैठक बेनतीजा, दिल्ली कूच के लिए कल पंजाब और हरियाणा से रवाना होंगे ट्रैक्टर

किसान आंदोलन: सरकार के साथ किसानों की बैठक बेनतीजा, दिल्ली कूच के लिए कल पंजाब और हरियाणा से रवाना होंगे ट्रैक्टर

हाईलाइट

  • किसान कर रहे दिल्ली कूच की तैयारी
  • पंचायतों की अपील पर जुट रहे किसान
  • किसानों के समर्थन में स्पोर्ट्स और इंटरटेनमेंट स्टार्स

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर जुटे किसानों का आंदोलन लगातार छठवें दिन भी जारी रहा। मंगलवार को किसानों और सरकार के बीच तीसरी बैठक हुई, जो बेनतीजा रही। इसके बाद अब पंजाब और हरियाणा के किसानों ने ट्रैक्टर-ट्रालियों से दिल्ली आ​ने की तैयारी कर रहे हैं। दरअसल, पंजाब और हरियाणा की पंचायतों की अपील पर सैकड़ों किसान लोगों से राशन, दवाइयां और जरूरत के अन्य सामान इकट्ठा कर रहे हैं। इन सामानों को ट्रैक्टरों पर लादा जा रहा है जो बुधवार से दिल्ली के लिए रवाना होने शुरू होंगे। 

बता दें कि मंगलवार को कृषि कानूनों के खिलाफ सड़क पर जुटे किसानों की सरकार के साथ तीसरे दौर की बातचीत बेनतीजा रही। 3 दिसंबर को एक बार फिर सरकार और किसानों की बैठक होगी। बैठक के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि हमने किसानों को आश्वासन देने की कोशिश की। हमने उन्हें समझाने की कोशिश की। कृषि मंत्री ने कहा कि कि हम 3 दिसंबर को दोपहर 12 बजे फिर बातचीत करेंगे। 

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, वाणिज्य मंत्री सोम प्रकाश और पीयूष गोयल इस बैठक में शामिल हुए। सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और कृषि उपज बाजार समिति (APMC) अधिनियम पर किसान नेताओं को एक विस्तृत जानकारी दी। उनके सामने प्रस्ताव रखा कि नए कानूनों पर चर्चा के लिए कमेटी बनाई जाए, इसमें केंद्र, किसान और एक्सपर्ट शामिल हों। किसानों ने ये पेशकश ठुकरा दी है। एक ब्रेक के बाद फिर मीटिंग शुरू हुई, लेकिन ये कुछ ही देर में खत्म हो गई।

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पंचायतों की अपील पर जुट रहे किसान
गौरतलब है कि पंजाब और हरियाणा में पंचायतों ने अपील की है कि किसानों के हर एक परिवार से कम से कम एक सदस्य दिल्ली भेजा जाए ताकि प्रदर्शनकारी किसानों का हौसला बढ़ाया जा सके। उधर दिल्ली की सीमा पर जैसे-जैसे फोर्स बढ़ रही है किसान संगठन अलर्ट हो गए हैं। प्रदर्शन को तेज करने के लिए किसान अब और ज्यादा प्रदर्शनकारियों को जुटाने की कोशिश में हैं।

किसानों के समर्थन में स्पोर्ट्स और इंटरटेनमेंट स्टार्स
पंजाब के कई नामी खिलाड़ी किसानों के समर्थन में आ गए हैं। जालंधर के दर्जन भर सम्मानित और सीनियर खिलाड़ियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर 5 दिन के अंदर कृषि कानून रद्द नहीं किए गए तो वह विरोध स्वरूप अपने मेडल और सम्मान वापस कर देंगे। पंजाबी फिल्म जगत के कई सितारे जिनमें कलाकार, लेखक, गायक और संगीतकार शामिल हैं, पहले ही किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं।

हरियाणा के आढ़तियों ने भी किया प्रदर्शन
मंगलवार को हरियाणा के आढ़तियों ने दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे किसानों के समर्थन में एक दिन की सांकेतिक हड़ताल की। गौरतलब है कि हाल ही में केंद्र की ओर से लाए गए कृषि कानून में आढ़तियों की भूमिका को खत्म कर दिया गया है। पंजाब के किसान और राजनेता इन आढ़तियों के समर्थन में भी आवाज उठा रहे हैं।

4 महीने का राशन लेकर बॉर्डर पर जमे किसान
किसानों ने रविवार को कहा था कि बुराड़ी नहीं जाएंगे और दिल्ली की घेराबंदी के लिए 5 एंट्री पॉइंट्स पर धरना देंगे। किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा बोले- हमारे पास इतना राशन है कि 4 महीने भी हमें रोड पर बैठना पड़े, तो बैठ लेंगे। गाजियाबाद बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी किसानों की पुलिस से हाथापाई हुई। हालांकि, बाद में यहां किसानों ने भजन भी गाए। गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के घर रविवार रात बैठक की।

सिंधु और टिकरी बॉर्डर बंद
फिलहाल, सिंधु बॉर्डर और टिकरी बॉर्डर पूरी तरह बंद है। गाजियाबाद बॉर्डर पर भी भारी संख्या में किसान डेरा-डंडा गाड़े बैठे हैं। सिंधु बॉर्डर पर किसानों की तादाद 2 से 3 हजार है। टिकरी बॉर्डर पर 1500 किसान जमे हुए हैं जबकि दिल्ली-गाजियाबाद बॉर्डर पर इनकी संख्या 1000 के करीब है। किसानों की संख्या घटती बढ़ती रहती है। बैरिकेंडिंग के दूसरी तरफ पुलिस भी पूरी तैयारी के साथ मुस्तैद है।

किसानों की मांगें
किसानों की दो मांग हैं। पहली ये कि उनकी बात सुनी जाए और उन्हें दिल्ली के जंतर-मंतर तक जाने दिया जाए। दूसरी मांग है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर है। बहरहाल, किसानों ने मन बना लिया है कि लड़ाई लंबी चले तो भी पीछे नहीं हटेंगे। अन्नदाता पूरी तैयारी से जुटे हैं। ट्रैक्टर-ट्रॉली घर बन गया है, सड़क पर लंगर लग गए हैं, किसान शिफ्ट में धरना दे रहे हैं- एक दल धरने पर बैठता है तो दूसरा दल खाने-पीने के समान की व्यवस्था करता है। सभी को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई है।

सरकार को मसले का करना होगा हल
भाकियू के वरिष्ठ नेता बलवीर सिंह राजेवाल ने कहा कि आंदोलन जारी रहेगा। परसों फिर मीटिंग होगी। केंद्र सरकार को इस मसले का हल करना पड़ेगा। किसानों के साथ साथ अब जन साधारण भी इस आंदोलन में शामिल होने लगा है, जिसे कोई भी सरकार इंकार नहीं कर सकती है। 

किसान पीछे हटने के लिए नहीं हैं तैयार
जोगिन्दर सिंह उग्राहा ने कहा कि किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। परसों होने वाली दोबारा बैठक से उम्मीदें हैं, लेकिन किसान अपनी मांगों से एक इंच भी पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं। किसान नेता शिव कुमार कक्का ने कहा कि मीटिंग से उम्मीदें तो है, लेकिन मांगे पूरी होने तक किसानों का आंदोलन रुकेगा नहीं। किसानों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि कई राज्यों के किसानों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहेगा। 

सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
बलदेव सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से छोटी कमेटी बनाने का प्रस्ताव को भी किसानों ने इसे खारिज कर दिया है। सरकार इसे आंदोलन को लंबा करना चाहती है ताकि इसे कमजोर किया जा सके। उन्होंने शक जताते हुए कहा कि हो सकता है कि इस बीच आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की जाए। सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए।

कानून रद्द करने की मांग
भारतीय किसान यूनियन, हरियाणा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह ने कहा कि बेनतीजा रही। परसों दोबारा मीटिंग होगी, लेकिन इसमें क्या निर्णय लिया जाएगा, फिलहाल कुछ नहीं कह नहीं कह सकते हैं। किसानों की मांग कृषि कानूनों को रद्द करने की है, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

बता दें कि सरकार ने कृषि सुधारों के लिए 3 कानून द फार्मर्स प्रोड्यूस ट्रेड एंड कॉमर्स (प्रमोशन एंड फेसिलिटेशन) एक्ट; द फार्मर्स (एम्पावरमेंट एंड प्रोटेक्शन) एग्रीमेंट ऑफ प्राइज एश्योरेंस एंड फार्म सर्विसेस एक्ट और द एसेंशियल कमोडिटीज (अमेंडमेंट) एक्ट बनाए है। इनके विरोध में पंजाब और हरियाणा के किसान पिछले दो महीनों से सड़कों पर हैं। किसानों को लगता है कि सरकार MSP हटाने वाली है, जबकि खुद प्रधानमंत्री इससे इनकार कर चुके हैं।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।