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खुलासा: केंद्रीय मंत्री वीके सिंह का दावा, चीनी सेना के टेंट में आग की वजह से भारतीय-चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प

June 29th, 2020 14:12 IST

हाईलाइट

  • 15 जून को गलवान में हुई थी खूनी झड़प
  • हमारे 20 जवान शहीद और 76 घायल हो गए थे

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री और पूर्व आर्मी चीफ जनरल वीके सिंह ने चीन की धोखेबाजी पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि गलवान घाटी में भारत-चीन सैनिकों के बीच एक रहस्यमय आग की वजह से हिंसक झड़प हुई। ये आग चीनी सैनिकों के टेंट में लगी थी। वीके सिंह ने बताया कि गलवान घाटी में 15 जून की रात कैसे खूनी झड़प हुई? कैसे चीन ने चालबाजी की, लेकिन ये दाव चीन को उल्टा पड़ गया। वीके सिंह ने कहा कि हमारे जवान चीनी सेना के पोजिशन देखने गए थे।

पूर्व सेनाध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने कहा कि 15 जून की शाम को हमारे कमांडिंग अफसर गलवान वैली में देखने गए थे कि चीन के लोग वापस गए या नहीं। कमांडिंग अफसर ने देखा कि चीन के लोग वापस नहीं गए हैं। वो पेट्रोलिंग प्वाइंट-14 के नजदीक ही दिखाई दे रहे हैं। केंद्रीय मंत्री वीके सिंह के मुताबिक, चीनी सेना ने तंबू भारतीय सेना से इजाजत लेकर लगाया था, ताकि वो देख सके कि हम पीछे गए या नहीं। 15 जून की शाम को चीनी सेना ने यह तंबू नहीं हटाया था। इस दौरान दोनों सेनाओं के बीच कहासुनी हुई। हमारे कमांडिंग अफसर ने तंबू हटाने का आदेश दिया। चीनी सैनिक जब तंबू हटा रहे थे, तभी आग लग गई।

अंधेरे में 500 से 600 लोगों के बीच झड़प हुई
केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने कहा कि चीनी सेना के तंबू में आग लगने के कारण झड़प हो गई। इस झड़प के दौरान हमारे लोग चीनी सेना के उपर हावी हो गए। चीन ने अपने और लोग बुलाए और हमारे लोगों ने भी अपने और लोग बुलाए। चीन के लोग जल्दी आ गए, फिर हमारे लोग आए। अंधेरे में 500 से 600 लोगों के बीच झड़प हुई। उन्होंने कहा कि चीन के लोग सोचकर आए थे कि भारतीय सेना पर हावी हो जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पहले हमारे तीन लोग हताहत हुए थे। फिर हमारे और चीनी सैनिक नदी में गिर गए थे। चोट और नदी में गिर जाने के कारण हमारे और 17 जवान शहीद हो गए। 70 के करीब घायल हो गए थे।

सिंह ने बताया विवाद क्यूं शुरू हुआ
वीके सिंह ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में बताया कि गलवान नदी का 7 से 8 किलोमीटर का इलाका हमारे पास है, यहीं पर पेट्रोलिंग प्वांइट 14 स्थित है। पेट्रोलिंग प्वांइट 14 का इलाका भारत के पास साल 1962 से है। सिंह ने बताया कि यह विवाद तब शुरू हुआ, जब श्योक नदी के साथ-साथ एक रोड बनाई गई। यह रोड दौलत बेग ओल्डी तक जाती है। उन्होंने बताया कि पहले यहां तक जाने में 15 दिन लगते थे, लेकिन सड़क बनने के बाद यह दूरी दो दिन में पूरी की जा सकती है। चीनी सैनिकों को यह रोड नहीं दिखाई दे रही थी, इसके बाद चीनी सैनिक भारतीय क्षेत्र में घुस आए और टेंट स्थापित कर दिए। वहीं, चीनी सैनिकों की इस हरकत पर भारतीय जवानों ने उन्हें रोक दिया। तब से यहां दोनों देश की सेनाओं के बीच विवाद शुरू हो गया। 

अब तक की सभी बातचीत बेनतीजा रहीं
सिंह ने बताया कि इस घटना के बाद दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई। पहले कमांडिंग अफसर स्तर पर वार्ता हुई, जिसमें कोई हल नहीं निकला। फिर जनरल स्तर पर वार्ता की गई, इसमें भी कोई हल नहीं निकल पाया। आखिरकार लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की वार्ता में तय किया गया कि दोनों पक्ष 15 जून से पहले वाली स्थिति में तैनात होंगे।

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