चढ़ावा चोरी: अयोध्या राम मंदिर के बाद अब बदरी-केदार मंदिर समिति में भी लाखों की हेराफेरी! RTI की रिपोर्ट में खुलासे से मचा बवाल

अयोध्या राम मंदिर के बाद अब बदरी-केदार मंदिर समिति में भी लाखों की हेराफेरी! RTI की रिपोर्ट में खुलासे से मचा बवाल
अयोध्या राम मंदिर में दान चोरी का मामला अभी थमा नहीं था कि देश के एक और बड़े मंदिर के ट्रस्ट में हेरफेरा का मामला सामने आया है। अब बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) में कथित भ्रष्टाचार के आरोप से बवाल देखने को मिल रहा है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अयोध्या राम मंदिर में दान चोरी का मामला अभी थमा नहीं था कि देश के एक और बड़े मंदिर के ट्रस्ट में हेरफेरा का मामला सामने आया है। अब बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) में कथित भ्रष्टाचार के आरोप से बवाल देखने को मिल रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) से मिले डॉक्यूमेंट्स के आधार पर नए खुलासा किए गए हैं। आरोप है कि मंदिर समिति के कुछ सदस्यों ने एक वर्ष से कम अवधि में टीए/डीए (यात्रा एवं दैनिक भत्ता) के नाम पर लाखों रुपये का अनियमित भुगतान लिया गया है। उन्होंने इसे श्रद्धालुओं के दान-चढ़ावे के धन का दुरुपयोग बताया है। उन्होंने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

विकेश सिंह नेगी ने सख्त कार्रवाई की उठाई मांग

प्रेस वार्ता में विकेश सिंह नेगी ने बताया कि बीकेटीसी द्वारा आरटीआई के जवाब में दी गई जानकारी के मुताबिक, मंदिर एक्ट की धारा 26 (च) के तहत समिति के सदस्यों को सिर्फ समिति से जुड़े कार्यों के लिए यात्रा करने पर ही पारिश्रमिक या यात्रा भत्ता दिया जा सकता है। इसके तहत सदस्यों को विधायकों के समान प्रतिदिन 6 हजार रुपये का दैनिक भत्ता तथा चार रुपये प्रति किलोमीटर की दर की यात्रा व्यय दिया जाता है।

इस दौरान नेगी ने साफ किया कि इस प्रावधान का मतलब यह है कि सिर्फ बोर्ड या उपसमितियों की आधिकारिक बैठकों में भाग लेने पर भत्ते का भुगतान किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि बीकेटीसी बोर्ड के वर्तमान सदस्यों का मनोनयन बीते वर्ष जून में हुआ था। हालांकि, इसके बावजूद कुछ सदस्यों ने मात्र आठ महीनों के अंदर अत्यधिक और संदिग्ध तरीके से भुगतान ले लिया। आश्चर्य की बात यह है कि इस अवधि में बोर्ड की सिर्फ एक ही बैठक आयोजित हुई थी।

नेगी ने आरोप लगाया कि कई मामलों में उपसमितियों की बैठकों और धामों के व्यक्तिगत दौरों को भी सरकारी कार्यक्रम दिखाकर भत्ते ले लिए गए। उदाहरण के तौर पर, इस वर्ष फरवरी में बसंत पंचमी के अवसर पर बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि निर्धारण हेतु नरेंद्रनगर राजमहल में आयोजित कार्यक्रम में अधिकांश सदस्यों ने उपस्थिति दिखाकर भुगतान प्राप्त किया। जबकि यह कार्यक्रम परंपरागत रूप से टिहरी राजपरिवार द्वारा आयोजित किया जाता है और इसका मंदिर समिति के कार्यों से सीधा संबंध नहीं होता।

ठीक इसी तरह धामों के कपाट बंद होने के अवसरों पर भी कुछ सदस्यों द्वारा उपस्थिति दर्ज कराकर भत्ते लेने के आरोप लगे हैं। नेगी ने यह भी बताया कि कुछ सदस्यों के केदारनाथ दौरे के लिए हेलीकॉप्टर किराए का भुगतान भी मंदिर कोष से किया गया।

उन्होंने उदाहरण दिया कि कहा कि एक सदस्य डॉ। विनीत पोस्ती द्वारा केदारनाथ, बदरीनाथ और तुंगनाथ के कपाट बंद होने के अवसरों सहित मद्महेश्वर मेले में शामिल होने पर भत्ते लिए गए। वहीं, एक अन्य सदस्य प्रह्लाद पुष्पाण ने भी विभिन्न धामों की यात्राओं के नाम पर भुगतान प्राप्त किया। उन्होंने यह भी बताया कि पुष्पाण की मध्यमहेश्वर यात्रा से संबंधित फाइल पर लेखा अनुभाग ने आपत्ति जताई थी कि बिल अध्यक्ष द्वारा सत्यापित नहीं है, इसके बावजूद भुगतान कर दिया गया।

वीआईपी श्रद्धालुओं की आवभगत मुद्दे पर हुआ था विवाद

नेगी ने कहा कि बीकेटीसी के पदाधिकारियों द्वारा श्रद्धालुओं के धन का इस प्रकार व्यक्तिगत उपयोग बेहद गंभीर और आपत्तिजनक है। उन्होंने कहा कि मंदिर एक्ट के तहत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य सभी लोकसेवक की श्रेणी में आते हैं, इसलिए इस प्रकार के मामलों में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।

बता दें, इससे पहले विकेश सिंह नेगी ने मंदिर कोष से वीआईपी श्रद्धालुओं की आवभगत और अन्य खर्चों को लेकर सवाल खड़े किए थे। इससे विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने बीकेटीसी के उपाध्यक्ष विजय सिंह कप्रवाण पर भी आरोप लगाए थे। उन्होंने अपनी पत्नी को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दर्शाकर भुगतान लिया। साथ अपने घर को कार्यालय दिखाकर प्रतिमाह धनराशि प्राप्त की। इसके अलावा मंदिर कोष से 11 लाख रुपये तीर्थ पुरोहितों में बांटे जाने का भी खुलासा किया गया था। इस पूरे मामले में बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। नेगी ने कहा कि यदि अध्यक्ष या समिति का कोई भी पक्ष सामने आता है, तो उसे भी सार्वजनिक किया जाएगा।

नेगी ने कहा कि बीकेटीसी के पदाधिकारियों द्वारा श्रद्धालुओं के धन का इस प्रकार व्यक्तिगत उपयोग बेहद गंभीर और आपत्तिजनक है। उन्होंने कहा कि मंदिर एक्ट के तहत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य सभी लोकसेवक की श्रेणी में आते हैं, इसलिए इस प्रकार के मामलों में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।

बता दें, इससे पहले विकेश सिंह नेगी ने मंदिर कोष से वीआईपी श्रद्धालुओं की आवभगत और अन्य खर्चों को लेकर सवाल खड़े किए थे। इससे विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने बीकेटीसी के उपाध्यक्ष विजय सिंह कप्रवाण पर भी आरोप लगाए थे। उन्होंने अपनी पत्नी को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दर्शाकर भुगतान लिया। साथ अपने घर को कार्यालय दिखाकर प्रतिमाह धनराशि प्राप्त की। इसके अलावा मंदिर कोष से 11 लाख रुपये तीर्थ पुरोहितों में बांटे जाने का भी खुलासा किया गया था। इस पूरे मामले में बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। नेगी ने कहा कि यदि अध्यक्ष या समिति का कोई भी पक्ष सामने आता है, तो उसे भी सार्वजनिक किया जाएगा।

Created On :   27 Jun 2026 5:03 PM IST

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