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भाजपा के नेता बेटे-बेटियों को मिली जीत, पाटील और नीलेश भी हारे 

भाजपा के नेता बेटे-बेटियों को मिली जीत, पाटील और नीलेश भी हारे 

डिजिटल डेस्क, मुंबई। लोकसभा चुनाव में चली मोदी लहर से भाजपा नेताओं के बेटे-बेटियों व बहुओं की नैया पार हो गई पर कांग्रेस-राकांपा के नेता पुत्र-पुत्रियों को हार का सामना करना पड़ा। भाजपा ने पार्टी के दिग्गज नेताओं की बेटी, बेटा, बहु और पत्नियों को 8 टिकट बांटे थे। जिसमें से 7 उम्मीदवारों को जीत मिली हैं। इसमें से तीन उम्मीदवार ऐसे हैं जो अपनी पार्टी बदलकर भाजपा में शामिल हुए और उनका फैसला सही साबित हुआ है। भाजपा की कुल 23 सीटों में से 7 सीटों पर भाजपा के नेताओं के परिवार का कब्जा है। लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर भाजपा में शामिल होने वाले डॉ. सुजय विखे-पाटील का फैसला सही साबित हुआ है। अहमदनगर सीट से चुनाव जीतने वाले सुजय विधानसभा में विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटील के बेटे हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस की तमाम कोशिश के बावजूद सुजय को जीत मिली है। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए रणजीतसिंह नाईक-निंबालकर को पार्टी ने माढा सीट पर उम्मीदवारी दी। रणजीतसिंह ने पार्टी को जीत दिलाई है। रणजीतसिंह पूर्व सांसद हिंदूराव नाईक-निंबालकर के पुत्र हैं।

लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुई डॉ. भारती पवार दिंडोरी सीट से चुनाव जीत गई हैं। भारती के ससुर एटी पवार युति सरकार में मंत्री थे। नंदूरबार सीट से भाजपा उम्मीदवार डॉ. हिना गावित को दूसरी बार जीत मिली है। हिना के पिता डॉ. विजय कुमार गावित आघाड़ी सरकार में कैबिनेट रह चुके हैं, फिलहाल वे भाजपा विधायक हैं। रावेर सीट पर भाजपा प्रत्याशी रक्षा खडसे फिर से चुनाव जीती हैं। रक्षा भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व राजस्व मंत्री एकनाथ खडसे की बहू हैं। बीड़ सीट सीट से भाजपा के टिकट निर्वाचित प्रीतम मुंडे दूसरी बार संसद में पहुंचेंगी। प्रीतम भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत गोपीनाथ मुंडे की बेटी हैं। मुंबई उत्तर-मध्य से भाजपा की विजयी उम्मीदवार पूनम महाजन अपने पिता व पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रमोद महाजन के सियासी सफर को आगे बढ़ा रही हैं। 

शिवसेना में भी परिवारवाद जिंदाबाद 

शिवसेना ने पार्टी के चार नेताओं के परिवार के सदस्यों को टिकट दिया था। इसमें से तीन उम्मीदवारों को सफलता मिली है। कल्याण सीट से शिवसेना उम्मीदवार डॉ. श्रीकांत शिंदे को जीत मिली है। श्रीकांत राज्य के स्वास्थ्य मंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे हैं। पूर्व सांसद निवेदिता माने के बेटे व हातकणंगले सीट से पार्टी के उम्मीदवार धैर्यशिल माने और कांग्रेस के नेता रहे पवनराजे निंबालकर के बेटे ओमराजे निंबालकर ने उस्मानाबाद सीट से चुनाव जीता है। जबकि सातारा सीट से शिवसेना उम्मीदवार नरेंद्र पाटील हार गए हैं। नरेंद्र के पिता अण्णासाहब पाटील दिग्गज माथाड़ी नेता रहे हैं। 

सुप्रिया को छोड़कर सभी धराशायी 

बारामती सीट से राष्ट्रवादी कांग्रेस की उम्मीदवार सुप्रिया सुले ने भाजपा उम्मीदवार कांचन कुल को हराया। कांचन के पति राहुल कुल भाजपा की सहयोगी राष्ट्रीय समाज पक्ष के विधायक हैं। जबकि सुप्रिया राष्ट्रवादी कांग्रेस के अध्यक्ष शरद पवार की बेटी हैं। विधायक रवि राणा की पत्नी व अमरावती सीट से निर्दलीय उम्मीदवार नवनीत राणा को समर्थन देने का राष्ट्रवादी कांग्रेस का फैसला सही साबित हुआ है। मावल सीट से राष्ट्रवादी कांग्रेस के उम्मीदवार व पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार पार्थ पवार और महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य अरुणकाका जगताप के बेटे संग्राम जगताप के बेटे अहमदनगर सीट से चुनाव हार गए हैं। पूर्व मंत्री छगन भुजबल के भतीजें समीर भुजबल को नाशिक सीट हार का सामना करना पड़ा है। पूर्व सांसद पद्मसिंह पाटील के बेटे उस्मानाबाद सीट से पार्टी उम्मीदवार राणा जगजीतसिंह पाटील और पूर्व सांसद दिवंगत प्रकाश परांजपे के बेटे आनंद परांजपे ठाणे सीट से हार गए हैं। 

कांग्रेस में नहीं चला परिवारवाद 

मोदी लहर में कांग्रेस के परिवारवाद को मतदाताओं ने खारिज कर दिया। कांग्रेस नेता व पूर्व मंत्री रोहिदास पाटील व धुलिया सीट से उम्मीदवार कुणाल पाटील, वर्धा सीट से कांग्रेस उम्मदवीर व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहीं प्रभाराव की बेटी चारूलता टोकस, जालना सीट से कांग्रेस उम्मीदवार व पार्टी के वरिष्ठ नेता केशराव औताडे के बेटे विलास औताडे को हार मिली है। वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली देवडा के बेटे व मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष मिलिंद देवडा भी दक्षिण मुंबई से सीट से हारे हैं। उत्तर-मध्य मुंबई सीट से कांग्रेस प्रत्याशी प्रिया दत्त को भी सफलता नहीं मिल सकी। प्रिया के पिता सुनील सुनील दत्त केंद्रीय मंत्री थे। 

पाटील और नीलेश भी हारे 

कांग्रेस नेता व प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वसंतदादा पाटील के नाती विशाल पाटील को स्वाभिमानी शेतकरी संगठन ने मैदान में उतारा था लेकिन विशाल को हार का सामना करना पड़ा है। महाराष्ट्र स्वाभिमान पक्ष के मुखिया व पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे के बेटे नीलेश राणे रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग सीट से हार गए हैं। 

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