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कर्तावान नहीं, कर्तव्यवान बनकर कार्य करने से आगे बढ़ेगा समाज और देश-सुवीरसागर

कर्तावान नहीं, कर्तव्यवान बनकर कार्य करने से आगे बढ़ेगा समाज और देश-सुवीरसागर

डिजिटल डेस्क, नागपुर। कर्तावान नहीं, कर्तव्यवान बनें। यह उद्गार तपस्वी सम्राट आचार्य सन्मतिसागर के शिष्य आचार्य सुवीरसागर ने श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर, महल में व्यक्त किए।  आचार्यश्री ने कहा कि अपना कर्तव्य और सौभाग्य समझकर काम करोगे, तो निश्चित ही शांति मिलेगी, समाज और देश आगे बढ़ेगा। सम्यग्दर्शन सम्यग्ज्ञान और सम्यकचरित्र की एकता ही मोक्षमार्ग है। एकता संगठन परिवार से लेकर देश तक होनी चाहिए। इसी में सभी की भलाई है। मंदिर का संतुलन नहीं बिगड़ना चाहिए। आखिर मंदिर है क्या? देव-गुरु-शास्त्र की उपासना। मन को शांति और पुण्य उपार्जन करने के लिए बनाया गया स्थान ही मंदिर है। इसका रखरखाव करना सभी सदस्यों का कर्तव्य है। मंदिर में जाते समय निःसही, निःसही कहते हैं यानी जो भी अदृश्य रूप में देवता आकर भगवान की आराधना करते रहते हैं। हम भगवान की आराधना करने आए हैं। आप बगल में हो जाइए। जब पूजन के बाद जाने के लिए निकलते हैं तब अःसही अःसही कहते हुए मंदिर से बाहर आना चाहिए। 

चातुर्मास कलश निष्ठापन 3 को 

3 नवंबर को दोपहर 1 बजे मोठे मंदिर के इंद्र भवन में चातुर्मास कलश निष्ठापन (चातुर्मास समापन) का कार्यक्रम होगा। प्रथम और द्वितीय कलश वालों के यहां इंद्र भवन से उनके घर तक कलश रथ में रखकर, घोड़े बग्गियों और बाजे-गाजे, जुलूस के साथ ले जाया जाएगा। घर में मंगल कलश की स्थापना आचार्यश्री के ससंघ के सान्निध्य में होगी। 
 
महावीर मंदिर में इंंद्र ध्वज विधान  4 से  

4 नवंबर से महावीरनगर के महावीर मंदिर में इंंद्र ध्वज विधान आचार्यसंघ के सान्निध्य में आरंभ होगा। विधान की विधि पंडित सरस जैन के मार्गदर्शन में होगी। विजय सोईतकर एवं गिरीश हनुमंते ने उपस्थिति की अपील की है। दीप प्रज्ज्वलन निर्मल मोदी, हीराचंद मिश्रीकोटकर, नरेंद्र तुपकर ने किया। शुक्रवार, 1 नवंबर को श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर, महल में सुबह 8.30 बजे प्रवचन होगा। त्यागी भवन में दोपहर 3.30 बजे स्वाध्याय, शाम 6.30 बजे गुरुभक्ति, 9 बजे वैयावृत्ति होगी।  मंदिर के अध्यक्ष पवन जैन कान्हीवाड़ा, मंत्री जयमामू, उपमंत्री दिनेश जैन ने श्रद्धालुओं से उपस्थिति की अपील की है।            
 

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