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दलम कमांडर को हुआ प्यार, त्याग दिया हथियार ,अब बनाएंगे एक आशियां

दलम कमांडर को हुआ प्यार, त्याग दिया हथियार ,अब बनाएंगे एक आशियां

डिजिटल डेस्क, गड़चिरोली।   प्यार करने वाले कभी डरते नहीं जो डरते हैं वो प्यार करते नहीं। फिल्म हीरो का यह गीत प्यार करने वाली की कहीं न कहीं हकीकत बयां करता है। कुख्यात आतंकियों को भी कई बार प्यार की खातिर हथियार डालते देखा गया है। ऐसा ही एक वाकया यहां सामने आया है। चातगांव दलम का कमांडर राकेश को अपने दलम की महिला सदस्य के साथ प्यार हुआ। मगर उनके प्यार और विवाह के लिए वरिष्ठ नक्सली तैयार नहीं थे।  ऐसे में अपने प्यार को मंजिल तक पहुंचाने और सुखी वैवाहिक जीवन जीने के लिए वरिष्ठ नक्सलियों का डर न रखते हुए चातगांव दलम कमांडर राकेश आचला ने अपनी प्रेमिका अखिला झुरे समेत सदस्यों के साथ  जिला पुलिस दल के समक्ष समर्पण किया।

बता दें कि, इसी दलम का उपकमांडर देवीदास आचला और दलम सदस्य रेशमा कोवाची भी एक-दूसरे से प्यार करते हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राकेश आचला वर्ष 2012 से चातगांव दलम में कमांडर के रूप में कार्यरत था। इसी बीच मई 2019 में चातगांव दलम में सदस्य के रूप में शामिल हुई अखिला झुरे से राकेश को प्यार हो गया। दोनों ने विवाह करने का निर्णय लिया। जब उनके प्यार और विवाह के निर्णय की जानकारी वरिष्ठ नक्सलियों को मिली तो, उन्होंने विवाह से साफ इनकार कर दिया। एक ही दलम में रहकर एक-दूसरे से प्यार करने के बावजूद भी एक-दूसरे से दूर रहना उन्हें गवारा नहीं हुआ। वहीं दूसरी ओर दिन-रात जंगल की धूल फांकनी पड़ती थी। यहां तक की एक वक्त का खाना भी मिलना दुश्वार हो गया था। विशेषत: हर पल मौत के साये में रहना पड़ता था।  ऐसे में अपने प्यार को मंजिल तक पहुंचाने के लिए राकेश और अखिला ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने का निर्णय लिया। इसी तरह दलम का उपकमांडर देवीदास को नक्सल सदस्या रेशमा कोवाची के साथ प्यार हुआ था। उनके विवाह को भी वरिष्ठ नक्सल नेताओं का विरोध था। आखिरकार इन प्रेमीयुगलों ने नक्सली जीवन त्यागकर आम नागरिकों की तरह सूखी जीवन जीने का निर्णय लिया।  जिला पुलिस दल के सामने आत्मसमर्पण किया। जो कभी हाथों में हथियार लिए हिंसक वारदातों को अंजाम देते थे वह अब आम नागरिकों की तरह जीवन बिताएंगे। 

पुलिस विभाग करेगा हरसंभव सहयोग
नक्सल आंदोलन के वरिष्ठ तेलुगू भाषीय नेता विवाह कर अपना वैवाहिक जीवन दलम में रहकर बिताते हैं। मगर नक्सल सदस्यों के विवाह को उनका हमेशा विरोध रहता है। यदि नक्सल सदस्यों का विवाह हो भी जाता है तो, उन्हें एक दलम में नहीं रखा जाता। बल्कि अलग-अलग दलम में रखकर उनसे विवाहित जीवन का सुख छीन लिया जाता हेै। पुलिस विभाग द्वारा आत्मसमर्पित करनेवाले तथा विवाह करने हेतु इच्छुक समर्पित नक्सलियों का जनजागरण सम्मेलन में विवाह रचाया जाता है। राकेश-अखिला और देवीदास-रेशमा के उज्वल भविष्य के लिए पुलिस विभाग हरसंभव सहयोग करेगा।   शैलेश बलकवड़े, जिला पुलिस अधीक्षक, गड़चिरोली

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