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भंडारा, वर्धा लोकसभा को लेकर भाजपा में राजनीतिक गणित पर चर्चा, उम्मीदवार की तलाश

March 10th, 2019 16:45 IST
भंडारा, वर्धा लोकसभा को लेकर भाजपा में राजनीतिक गणित पर चर्चा, उम्मीदवार की तलाश

डिजिटल डेस्क, नागपुर। लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटी भाजपा के लिए विदर्भ में काफी अच्छी स्थिति समझी जा रही है। इसके बावजूद पार्टी में उम्मीदवार चयन को लेकर काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। सर्वे के आधार पर जो इनपुट सामने आ रहे हैं, उसे देखते हुए संभावित उम्मीदवारों के नाम पर बार बार चर्चा हो रही है। खासकर भंडारा व वर्धा सीट के लिए चर्चा का दौर चल रहा है। भाजपा सूत्र के अनुसार इन दोनों सीटाें के लिए इस बार मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस की पसंद काफी महत्व रखनेवाली है। इस दिशा में काम भी चल रहा है। लिहाजा चर्चित नामों के अलावा कुछ नए नामों पर भी विचार किया जा सकता है। विदर्भ में लोकसभा की 10 में से सभी सीटें भाजपा शिवसेना गठबंधन के पास है।

2014 के चुनाव में भाजपा ने 6 व शिवसेना ने 4 सीटें जीती थी। इतनी ही सीटों पर दोनों ने लड़ा भी था। बताया जा रहा है कि भंडारा व वर्धा सीट पर सामाजिक समीकरण व कुछ छोटे दलों के प्रभाव को देखते हुए भाजपा को नए सिरे से विचार करना पड़ रहा है। भंडारा-गोंदिया लोकसभा सीट पर 2014 में भाजपा ही जीती थी। लेकिन लोकसभा सदस्य नाना पटोले पार्टी छोड़ गए। उपचुनाव में पटोले व कांग्रेस के सहयोग से राकांपा ने बाजी मारी। इस क्षेत्र में राकांपा के वरिष्ठ नेता प्रफुल पटेल की राजनीति भी प्रभावी है। उपचुनाव में बसपा ने उम्मीदवार नहीं उतारा था।

भारिप बहुजन महासंघ का उम्मीदवार अवश्य था। ये दोनों दल जिस जनाधार पर प्रभाव का दावा करते हैं उसे बांटने में भाजपा सफल नहीं हो पायी। इसके अलावा समाज देखकर उम्मीदवार तय करने के मामले में भी भाजपा को मात खानी पड़ी। ऐसे में भाजपा ऐसे चेहरे की तलाश में हैं जो भंडारा-गोंदिया की राजनीति में चर्चा में हो। वहां मुख्यमंत्री फडणवीस ने चंद्रशेखर बावनकुले व परिणय फुके को विशेष जिम्मेदारी दे रखी है। बावनकुले को भंडारा का भी पालकमंत्री बनाया गया है। फुके को भंडारा -गोंदिया क्षेत्र से ही जितवाकर विधानपरिषद में भेजा गया है। बताया जा रहा है कि पहले जिन 3 नामों से चर्चा की गई थी उसमें से सभी नाम कटते जा रहे हैं। कांग्रेस राकांपा गठबंधन के तहत इस सीट से राकांपा उम्मीदवार रहना तय है। उसमें भी प्रफुल पटेल की पसंद मायने रखेगी।

भाजपा ने राकांपा उम्मीदवार के इंतजार में अपनी निर्णय प्रक्रिया को होल्ड पर रखा है। उधर वर्धा में कांग्रेस राकांपा गठबंधन के तहत चारुलता टोकस का उम्मीदवार बनना तय माना जा रहा है। टोकस, प्रदेश महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी है। टोकस के नाम पर सहमति बनने की स्थिति में कांग्रेस की गुटबाजी भी अधिक महत्व नहीं रख पाएगी। 2014 के चुनाव में दत्ता मेघे परिवार के विरोध में भी माहौल बना था। लिहाजा मेघे परिवार से करीबी संबंध रखनेवाले रामदास तडस भाजपा की टिकट पर आसानी से जीत गए। कथित फिक्सिंग असर नहीं दिखा पायी। इस बार मेघे परिवार भाजपा में हैं। वे भी भाजपा की उम्मीदवारी के प्रयास में हैं। लिहाजा भाजपा के रणनीतिकारों के लिए वर्धा में पार्टी आस्था व केवल राजनीतिक समझौते का मामला विचार का विषय बन रहा है। वोट कटवा की भूमिका निभानेवाले संगठनों व नेताओं की रणनीति साफ होने पर ही भाजपा इन सीटों पर निर्णय लेगी। 

लोकसभा चुनाव : भारिप ने खोले 6 कार्यालय

आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए भारिप बहुजन महासंघ ने शहर में 6 विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत 6 पार्टी कार्यालय शुरू किए गए। दक्षिण-पश्चिम विधानसभा के तहत प्रभाग 33 में चुनाव प्रचार कार्यालय का उद्घाटन प्रदेश महासचिव सागर डबरासे के हाथों किया गया। इस अवसर पर पार्टी के संघटक भूषण भस्मे, वरिष्ठ सलाहकार प्रल्हाद गजबे, दक्षिण पश्चिम के अध्यक्ष संजय सूर्यवंशी, देवेंद्र डोंगरे, सिद्धार्थ पाटिल, सुरेंद्र मस्के, विशाल वानखड़े, सेवक डांगे, शामराव तंत्रपाले, युवराज गवली, प्रवीण काम्बले, मनीष रंगारी सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे। महासचिव सागर डबरासे ने कहा कि आनेवाली लोकसभा चुनाव में वंचित बहुजन आघाड़ी के उम्मीदवार का सीधा मुकाबला भाजपा से है।  क्योंकि कांग्रेस पार्टी के पास गडकरी के मुकाबले का कोई भी उमीदवार नहीं है। कांग्रेस पार्टी में आपसी झगड़ों और कलह की वजह से जीत से काफी दूर है।

शिवणगांव में शिवसेना की शाखा उद्घाटित

शिवणगांव में शिवसेना की शाखा का उद्घाटन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या मंे युवाओं ने पार्टी में प्रवेश भी लिया। शाखा का उद्घाटन पूर्व सांसद व जिला प्रमुख प्रकाश जाधव ने किया। शहर प्रमुख मंगेश कडव, उपजिला प्रमुख प्रवीण जुमले, मंगेश वाघ आदि उपस्थित थे।

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