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ग्रीवंस कमेटी ने 15 दिन में हल किए 46 मामले, फैसले प्रभावी साबित हो रहे

ग्रीवंस कमेटी ने 15 दिन में हल किए 46 मामले, फैसले प्रभावी साबित हो रहे

डिजिटल डेस्क,नागपुर। राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय की ग्रीवंस रिड्रेसल कमेटी (शिकायत निवारण समिति) ने रफ्तार पकड़ी है। पिछले चार माह में कमेटी ने 46 मामलों को 15 दिन के भीतर हल करके जरूरतमंद पक्ष को राहत दी है। इसमें मुख्य रूप से कॉलेज द्वारा दस्तावेज नहीं लौटाने, इंटरनल अंकों के विवाद, बीच पाठ्यक्रम में कॉलेज बंद हो जाने के मामले शामिल हैं। यूजीसी के आदेश पर गठित  ग्रीवंस कमेटी को शिकायत मिलने पर हर हाल में 15 दिन में उसे हल करके यूजीसी को रिपोर्ट भेजनी पड़ती है। विद्यार्थियों की शिकायत के निवारण के लिए विवि नियमित अंतराल पर कमेटी की बैठक होती है, जिसमें शिकायतकर्ता और विपक्ष को बुलाया जाता है। सभी पक्षों को सुनने के बाद कमेटी अपना फैसला सुनाती है। नियमानुसार कमेटी को कई प्रकार के अधिकार हैं। यदि कोई कॉलेज कमेटी का आदेश नहीं मानता, तो कॉलेज की मान्यता तक रद्द हो सकती है। इसी कारण कमेटी के फैसले प्रभावी साबित हो रहे हैं। कमेटी विवि प्र-कुलगुरु डॉ. विनायक देशपांडे की अध्यक्षता में गठित की गई है। इसमें विद्यार्थी कल्याण संचालक डॉ. अभय मुद्गल और अन्य सदस्यों का समावेश है।

इंटरनल अंक दिलाए
दरअसल, नागपुर विश्वविद्यालय द्वारा अगस्त में घोषित बीए के नतीजों में सावनेर के हरिभाऊ आदमने कॉलेज के करीब 125 विद्यार्थी फेल हो गए थे। विद्यार्थियों को मराठी विषय के शिक्षक ने इंटरनल नंबर नहीं दिए, उन्हें सीधे तौर पर अनुपस्थित दिखाया गया। लिहाजा, उनका रिजल्ट फेल के रूप में आया। विद्यार्थियों ने इस संबंध में शिक्षक मिलिंद साठे के खिलाफ विश्वविद्यालय की ग्रीवंंस कमेटी को शिकायत की थी। अंतत: कमेटी ने विद्यार्थियों को थ्योरी में प्रदर्शन के हिसाब से अंक देने का निर्णय लिया।

कॉलेज दोबारा शुरू कराया
उमरेड स्थित पुष्पक कॉलेज के कुछ पाठ्यकमों को विवि ने नियमित शिक्षक नहीं होने के कारण संलग्नता न देकर पाठ्यक्रम बंद करा दिया था। बाद में कुछ ऐसे विद्यार्थी सामने आए, जिन्होंने एटीकेटी क्लीयर की और अंतिम वर्ष की पढ़ाई शेष रह गई। कमेटी के आदेश पर कॉलेज को पाठ्यक्रम दोबारा शुरू करना पड़ा।

दस्तावेज लौटाने पड़ेे
कमेटी को ऐसी भी शिकायतें मिली जिसमें कॉलेज विद्यार्थियों को दस्तावेज नहीं लौटा रहे थे। कमेटी के आदेश पर कॉलेजों को दस्तावेज लौटाने पड़े, इसमें शहर के नामी गिरामी राजनेताओं के इंजीनियरिंग और एमबीए कॉलेजों का समावेश है। बता दें कि, कॉलेजों द्वारा विद्यार्थियों के दस्तावेज न लौटाना शिक्षा क्षेत्र की एक बड़ी समस्या है। कई बार विद्यार्थी आगे की पढ़ाई पूरी नहीं करना चाहे या शेष पढ़ाई दूसरे कॉलेज में पूरी करना चाहे, तो कॉलेज विद्यार्थियों को पूरे पाठ्यक्रम की फीस भरने को कहते हैं। कमेटी के निर्णय से विद्यार्थियों को राहत मिली है।
 

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