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हेमा मालिनी के गंगा बैले नृत्याविष्कार से नदी संवर्धन का संदेश , पुणे फेस्टिवल में रंगारंग प्रस्तुति

हेमा मालिनी के गंगा बैले नृत्याविष्कार से नदी संवर्धन का संदेश , पुणे फेस्टिवल में रंगारंग प्रस्तुति

डिजिटल डेस्क, पुणे। बहुचर्चित अभिनेत्री हेमामालिनी ने पुणे फेस्टिवल में नृत्य के माध्यम से गंगा नदी के प्रकट की पौराणिक कथा प्रस्तुत की। साथ वर्तमान में सभी नदियों का रक्षण तथा संवर्धन करने का संदेश भी दिया।  प्रति वर्ष गणेशोत्सव के दौरान पुणे में पुणे फेस्टिवल आयोजित किया जाता है जिसमें नृत्य, संगीत, गायन, सांस्कृतिक, साहित्यिक, क्रीड़ा इन क्षेत्रों से संबंधित कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। हेमामालिनी हर वर्ष पुणे फेस्टिवल में नृत्य पेश करती हैं। इस वर्ष भी अपनी परंपरा अखंडित रखते हुए हेमामालिनी ने गंगा बैले यह नृत्याविष्कार प्रस्तुत किया। यह उनका 28 वां वर्ष था। उनके नाट्यविहार कला केन्द्र द्वारा इस नृत्य बैले की निर्मिती की गई थी। नृत्य में गंगा के रूप में हेमामालिनी 10 फीट ऊंचाई के झूले से मंच पर आगमन करती हैं ऐसा दिखाया गया था। इस बैले को दर्शकों की काफी सराहना मिली। नृत्य के दौरान गंगा के प्रकट से लेकर वह पृथ्वी पर आने तक की सारी पौराणिक कथा प्रस्तुत की गई। साथ ही गंगा का अलग अलग युगों में होनेवाला अस्तित्व भी बयां किया गया। हेमामालिनी का यह बैले देखने के लिए दर्शकों की काफी भीड़ लगी रही ।  पुणे फेस्टिवल के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी के हाथों हेमामालिनी और उनके सहकलाकारों का सम्मान किया गया। इस समय डॉ. सतीश देसाई, मीरा कलमाड़ी, फेस्टिवल के उपाध्यक्ष कृष्णकुमार गोयल उपस्थित थे।   

बेटी के जन्म पर गांव में निकाली शोभायात्रा

 पुणे जिले के खेड़ तहसील स्थित राजगुरूनगर निवासी थिगले परिवार में 55 सालों बाद बेटी का जन्म हुआ। इससे परिवार खुशी से फुला नहीं समाया।  परिवार ने पारंपारिक वाद्यों के साथ धूमधाम से शोभायात्रा निकालकर बेटी का स्वागत किया। जानकारी के अनुसार राजगुरूनगर निवासी समीर और नीलिमा थिगले इस दंपति को बेटी हुईं। इस परिवार में 55 साल बाद बेटी ने जन्म लिया इस बात से परिवार के सदस्य काफी खुश थे। रविवार को नीलिमा बेटी के साथ घर आईं तब परिवार के सदस्यों ने दोनों का स्वागत बड़ी धूमधाम से किया। आतिशबाजी की गई। सनई, ढोल बजाकर शाेभायात्रा निकाली। घर से दो सौ मीटर की दूरी तक आकर्षक रंगोली निकाली गई । रंगबिरंगी गुब्बारें, फूलों से घर और परिसर सजाया गया। महिलाओं ने सज धजकर फुगड़ी खेली। बेटी का गृहप्रवेश होते ही सभी को मिठाईयां बांटी गई। परिवार ने बेटी का नाम शांभवी रखा है। परिवार के इस उत्साह को देख गांव में खुशी का माहौल बन गया । बेटी की दादी अलका थिगले ने कहा कि इतने सालों के इंतजार के बाद हमारे परिवार में बेटी जन्मीं हैं। इसलिए हम खुश हैं।  बेटी के जन्म का स्वागत हर एक को करना ही चाहिए। बेटा-बेटी समान ही होते हैं। इसे लेकर जनजागृति होनी चाहिए।  
 

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