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कुएं में गिरा तेंदुआ, बाघ की उड़ी अफवाह, रेस्क्यू कर बाहर निकाला

March 23rd, 2019 18:51 IST
कुएं में गिरा तेंदुआ, बाघ की उड़ी अफवाह, रेस्क्यू कर बाहर निकाला

डिजिटल डेस्क, नागपुर। कोंढाली वनपरिक्षेत्र में डोरली नामक गांव में उस वक्त भागादौड़ी मच गई, जब किसी ने बताया कि गांव के नजदीक एक कुएं में एक बाघ गिर गया है। वन विभाग को इसकी जानकारी देते ही, आनन-फानन में नागपुर से एक टीम को घटनास्थल पर भेजा गया, लेकिन कुएंं में देखने पर वह तेंदुआ रहने की बात सामने आई। तुरंत बाद रेस्कयू शुरू किया गया। हालांकि कुआं मात्र 10 से 14 फीट गहरा था, जिसमें पानी भी बहुत कम था, लेकिन बिना बेहोश किए तेंदुए को पिंजरे में कैद करना किसी चुनौती से कम नहीं था।

मध्यरात्रि से शुरू हुए रेस्क्यू को खत्म करने में सुबह हो गई थी। तेंदुए को सही तरह से पकड़ा गया। उसकी जांच-पड़ताल के लिए नागपुर के ट्रान्सिक ट्रीटमेंट सेंटर में लाया गया था। जांच-पड़ताल व खान-पान के बाद जंगली इलाके में तेंदुए को छोड़ा गया। रेस्कयू ऑपरेशन में कुल 10 सदस्यों की टीम गई थी। जिसमें मानद वन्यजीव रक्षक कुंदन हाथे, आरएफओ क्षीरसागर, आजमी, एसीएफ क्षीरसागर, डॉ. सैयद बिलाल, डॉ. नंदा गवई, शुभम खोब्रागडे, आशीष महल्ले आदि प्रमुखता शामिल थे।

भोजन-पानी की तलाश में अक्सर आ जाते हैं वन्यजीव
उल्लेखनीय है कि राज्य में 16.9 लाख हेक्टर जमीन पर वनक्षेत्र फैला है। केवल विदर्भ की बात करें तो पेंच, ताड़ोबा, बोर, मेलघाट जैसे जंगल क्षेत्र आते हैं। जहां बड़ी संख्या में वन्यजीवों का वास है। इन जंगलों के आस-पास कई किसानों की खेती है। जहां वन्यजीव भोजन-पानी की तलाश में रात के अंधेरे में आ जाते है। जिसमें बाघ, जंगली सुअर, तेंदुआ, लोमडी, हिरण आदि शामिल हैं। खेत में उपज के लिए कुआं रहना आम है। कई बार कुआं खुला रहने से रात के अंधेरे में वन्यजीव इसमे गिर जाते है। जिससे कई बार घायल हो जाते हैं, कुछ मर भी जाते हैं। ऐसा ही एक किस्सा कोंढाली वन परिक्षेत्र में डोरली (भिंगोरी) गांव में हुआ। जहां गांव के पास ही खुले में बने एक कुएं में एक मादा तेंदुआ गिर गया। पहले तो किसी को इसकी जानकारी नहीं मिली, लेकिन तेंदुए द्वारा दहाड़ने की आवाज से गांवावालों ने कुएं में झांक कर देखा तो पानी में डूबा तेंदुआ बाघ की तरह लगा। जिसके बाद गांव में तेजी से बात फैल गई। तुरंत वन विभाग को जानकारी देकर नागपुर से रेस्क्यू टीम को बुलाया गया। रात में जाली डालकर तेंदुए को पकड़ना किसी चुनौती से कम नहीं था, लेकिन डॉक्टरों की मदद से सफलतापूर्ण तरीके से रेस्क्यू किया गया। इस बीच यहां गांववालों की भारी भीड़ देखने मिली। सुबह तड़के तेंदुए को बाहर निकाला गया। जिसके बाद उसे नागपुर के ट्रान्सिक ट्रीटमेंट सेंटर में लाकर जांच-पड़ताल कर नजदीक के जंगली इलाके में छोड़ा गया। 

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