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मुख्यमंत्री रोजगार कार्यक्रम के तहत 10 लाख रोजगार का लक्ष्य, जनजाति छात्रों के लिए बनेगा ट्राईबल सिक्योरिटी फोर्स

मुख्यमंत्री रोजगार कार्यक्रम के तहत 10 लाख रोजगार का लक्ष्य, जनजाति छात्रों के लिए बनेगा ट्राईबल सिक्योरिटी फोर्स

डिजिटल डेस्क, मुंबई। मुख्यमंत्री रोजगार निर्माण कार्यक्रम के तहत प्रदेश में 1 लाख उद्यमी तैयार करने का प्रदेश सकार का लक्ष्य है। इसके जरिए 10 लाख रोजगार का सृजन किया जाएगा। इसके लिए राज्य के सभी 36 जिलों में मुख्यमंत्री रोजगार निर्माण सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। गुरुवार को प्रदेश के उद्योगमंत्री सुभाष देसाई ने मुंबई के चेंबूर के अणुशक्तिनगर में आयोजित बालासाहब ठाकरे रोजगार सम्मेलन में यह घोषणा की। राज्य सरकार के उद्योग विभाग और सीआईआई की ओर से यह रोजगार सम्मेलन आयोजित किया गया। देसाई ने कहा कि मुख्यमंत्री रोजगार निर्माण कार्यक्रम के तहत इच्छुकों को केवल 10 प्रतिशत निवेश करना पड़ेगा। बैंकों के माध्यम से 60 प्रतिशत पूंजी ऋण के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी। जबकि 30 प्रतिशत राशि सरकार देगी। इस कार्यक्रम के जरिए 1 लाख छोटे-बड़े उद्यमी तैयार करने का लक्ष्य है। इससे 10 लाख रोजगार उपलब्ध हो सकेगा। देसाई ने कहा कि राज्य के हर युवा को रोजागर देने के लिए सरकार प्रयारत है। पिछले एक साल से बालासाहब ठाकरे रोजगार सम्मेलन के आयोजन किया जा रहा है। इससे हजारों नौजवानों को रोजगार के मौके मिले हैं। युवा केवल नौकरियों पर निर्भर न रहे। इसके लिए सरकार ने स्वयं रोजगार को गति देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री रोजगार निर्माण कार्यक्रम शुरू किया है। इसके लिए 300 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है।  

जनजाति छात्रों को रोजगार देने बनेगा ट्राईबल सिक्योरिटी फोर्स

वहीं अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को स्थायी रूप से रोजगार उपलब्ध कराने के लिए ट्राइबल सिक्योरिटी (सुरक्षा) फोर्स बनाया जाएगा। प्रदेश के आदिवासी विकास राज्यमंत्री डॉ.परिणय फुके ने यह जानकारी दी। गुरुवार को मंत्रालय में आदिवासी विकास विभाग की समीक्षा बैठक हुई। फुके ने कहा कि ट्राइबल सिक्योरिटी फोर्स के लिए जरूरी प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस फोर्स में वन सुरक्षा गार्ड, होमगार्ड, निजी सुरक्षा संस्था, आदिवासी विभाग के आश्रम स्कूल और छात्रावासों में सुरक्षा रक्षक के रूप में विद्यार्थी भर्ती होने के लिए पात्र हो सकेंगे। आदिवासी विद्यार्थियों को स्थायी रूप से रोजगार के लिए उनकी शारीरिक क्षमता का विचार करना जरूरी है। आने वाले दिनों में आदिवासी विद्यार्थियों को सैनिक प्रशिक्षण देने की जरूरत है। इससे आदिवासी विद्यार्थियों को सैनिक और पुलिस दल में भर्ती के लिए आसानी हो सकेगी। 

20 छात्र होने पर हर कक्षा के लिए नियुक्त होंगे अलग शिक्षक, आश्रम स्कूल शिक्षकों के लिए मापदंड तय 

इसके अलावा सरकार ने सरकारी और अनुदानित आश्रम स्कूलों में शिक्षकों के पदों के लिए मापदंड निश्चित किया है। शिक्षा का अधिकार कानून के तहत यह फैसला किया गया है। गुरुवार को आदिवासी विभाग ने इस संबंध में शासनादेश जारी किया। आश्रम स्कूलों में कक्षा पहली व दूसरी और कक्षा तीसरी तथा पांचवीं के लिए प्रत्येक कक्षा में 20 से कम विद्यार्थियों के होने पर बहुकक्षा अध्ययन पद्धति अपनाई जाएगी। जबकि 20 से अधिक विद्यार्थियों के होने पर हर कक्षा के लिए अलग-अलग शिक्षकों होंगे। लेकिन एक ही कक्षा में अलग-अलग वर्ग व्यवस्था खत्म कर दी गई है। शिक्षकों के पदों के मापदंड के अनुसार अतिरिक्त शिक्षकों को संबंधित आश्रम स्कूल प्रबंधन के दूसरे स्कूलों में समायोजित किया जाएगा। आदिवासी आश्रम स्कूलों में कक्षा पहली से पांचवीं तक 60 विद्यार्थियों के लिए शिक्षकों के 2 पद मंजूर किए गए हैं। 61 से 90 विद्यार्थी संख्या पर 3 शिक्षक, 91 से 120 विद्यार्थी संख्या पर 4 शिक्षक, 121 से 200 विद्यार्थी संख्या पर 5 शिक्षक और 150 विद्यार्थी संख्या पर 5 शिक्षक व 1 मुख्याध्यापक पद मंजूर किया गया है। कक्षा 6 वीं से 8 वीं तक 35 विद्यार्थियों के लिए 1 शिक्षक, 105 विद्यार्थी संख्या के लिए 3 शिक्षकों की नियुक्ति की जा सकेगी। कक्षा 9 वीं के लिए 2 और कक्षा 10 वीं के लिए 2 कुल 4 शिक्षकों के पद मंजूर किए गए हैं। कक्षा 11 और 12 वीं के कला और वाणिज्य संकाय के लिए 4 शिक्षक और विज्ञान संकाय के लिए 5, कला व वाणिज्य कॉलेज के लिए 7 और कला व वाणिज्य में से एक और विज्ञान संकाय होने पर 8 शिक्षकों के पद मंजूर किए गए हैं। प्रदेश में फिलहाल 496 सरकारी और 556 अनुदानित आश्रम स्कूल हैं। इन आश्रम स्कूलों में 4 लाख 55 हजार विद्यार्थी पढ़ते हैं। 
 

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