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वैलेंटाइन-डे सप्ताह भी नवरात्रि की तरह मनाने लगे हैं युवा, अभिषेक वालिया ने लगवाए ठहाके

July 17th, 2018 19:32 IST
वैलेंटाइन-डे सप्ताह भी नवरात्रि की तरह मनाने लगे हैं युवा, अभिषेक वालिया ने लगवाए ठहाके

डिजिटल डेस्क, नागपुर। द ग्रेट इंडियन लाॅफ्टर विनर अभिषेक वालिया ने श्रोताआें को जमकर हंसाया। उन्होंने कहा कि भारत में साल भर त्यौहार खत्म नहीं होते हैं, उसके बाद भी समझ नहीं आता कि, दीपावली के पहले छोटी दीपावली और होली के पहले छोटी होली की क्या जरूरत पड़ती है। हैरानी की बात तो यह है कि, पहले वेलेंटाइन-डे ही मनाया जाता था, लेकिन अब तो वैलेंटाइन-डे वीक मनाने लगे हैं, जैसे नवरात्रि हो।इस मस्ती भरे अंदाज में वालिया ने सुरेश भट सभागृह में भारतीय अग्रवाल एकता क्लब के तत्वावधान में ‘इंटरटेनमेंट की रात-2018’ का आगाज किया। इस अवसर पर एक ओर सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने अपनी छंटा बिखेरी, तो दूसरी ओर संगीत की मधुर धुन पर लोग जमकर थिरके। कार्यक्रम में मीडिया पार्टनर ‘दैनिक भास्कर’ था।

कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि के रूप में अनंत कुमार अग्रवाल, राजेन्द्र जैन, नीलेश अग्रवाल, चैयरमेन राजेश गोयल, उपाध्यक्ष तुषार अग्रवाल, अध्यक्ष प्रकाश अग्रवाल सचिव राजेन्द्र अग्रवाल, कोषाध्यक्ष राजेश अग्रवाल, समन्वयक विजय सर्राफ, गिरीश लिलाडिया, अशोक बंसल, अनिल चौधरी, रतन पोद्दार, प्रदीप अग्रवाल, पूर्व चेयरमैन अशोक गोयल, प्रकाश गोयल, जगदीश अग्रवाल, सुभाष अग्रवाल, शंभू टेकरीवाल, गोपी किशन तिबडा प्रमुख रूप से उपस्थित थे। स्वागत करने वालों में किरान सर्राफ, सुमेधा चौधरी, आशा बसंल, मंजू गाेयल, ज्योति गोयल, सुलेखा लिलाडिया उपस्थित थे। कार्यक्रम की मेजबानी विजय सर्राफ व पूनम गोयल ने की।

केजरीवाल भी तो अग्रवाल नहीं ना
कॉमेडियन वालिया ने हंसाते हुआ कहा कि, मैंने एक व्यक्ति से नाम पूछा तो उस सज्जन ने बताया कि, वह गाेयल हैं, उनसे कुछ पूछ पाता इसके पहले वह सज्जन बोल पड़े कि, गोयल भी अग्रवाल ही होते हैं। इस पर वालिया ने कहा कि, मुझे अपनी गरीबी देखकर समझ आ गया कि मैं अग्रवाल नहीं हूं, लेकिन कहीं केजरीवाल भी तो अग्रवाल नहीं है ना?

यहां ज्यादा लोग बीमार रहते हैं क्या
वालिया ने अपने चुटकी भरे अंदाज में पूछा कि, मैंने दो लोगों से पूछा तो एक ने बताया कि, उनकी मेडिकल की दुकान है, दूसरा भी बता रहा है कि, वह आयुर्वेद का मेडिकल चला रहे हैं। सभी लोग दवाओं का बिजनेस कर रहे हैं। सच बताओ यहां ज्यादा लोग बीमार रहते हैं क्या? 

अग्रवाल के नाम से बिकती हैं मिठाइयां
कॉमेडियन वालिया ने श्रोताओं को मुस्कुराने पर मजबूर करते हुए बताया कि, हमारी दिल्ली में तो सिर्फ अग्रवाल ही मिठाइयां बैचते हैं। ऐसा समझ लो कि, अग्रवाल के नाम से ही मिठाइयां बिकती हैं। हद तो तब हो गई, जब मेरे दोस्त शर्मा ने मिठाई की दुकान भी अग्रवाल मिठाई भंडार के नाम से खोली। यहां आने के बाद मुझे पता चला कि, अग्रवाल तो सारे व्यापार करते हैं।

गणेश वंदना की  प्रस्तुति
कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश वंदना ‘एकदंताय वक्रतुंडाय गौरी तनया धीमही’ के सुमधुर संगीत के साथ हुआ। इस पर एक टीम ने अद्भुत नृत्य की प्रस्तुति दी। पीछे स्क्रीन पर गजानन, लंबोदर, बाप्पा, श्रीगणेश की रंगबिरंगे चित्र सभी को खूब लुभा रहे थे।

हीरे-मोती मैं ना चाहूं
सतरंगी रोशनी के बीच गिटार की धुन पर जैसे-जैसे रोशनी बढ़ती जा रही थी, वैसे-वैसे केसियो की बढ़ती आवाज ने श्रोताओं पर असर दिखाना शुरू कर दिया। गायक ने जैसे ही ‘हीरे मोती मैं ना चाहूं, मैं तो चाहूं संगम तेरा....’ गाने की शुरुआत की तो सभागृह में बैठे श्रोता उछल पड़े और गायक को संगत देने लगे। जैसे ही गाना पूरा होने लगा तो संगीत की धुन धीमी होने लगी और श्रोताओं की तालियों की गड़गड़ाहट से सारा सभागृह गूंज उठा। इसके बाद ‘एक हो गए हम और तुम...’, ‘हम्मा हम्मा हम्मा...’ जैसे गानों की बेहतरीन प्रस्तुति देकर श्रोताओं का दिल जीत लिया।

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