India-EU Deal: 'मेक इन इंडिया' पर क्या पड़ेगा FTA का असर? पीयूष गोयल ने दिया रोजगार को लेकर बड़ा बयान

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हाल ही में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) हुआ है। इससे 'मेक इन इंडिया' को काफी बढ़ावा मिलेगे। इस मुद्दे पर भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अपनी राय रखी है। गोयल ने कहा कि यूरोपियन मैन्युफैक्चरर्स यह समझ चुके हैं कि भारत में मैन्युफैक्चरिंग ज्यादा फायदेमंद साबित होगी। इससे भारत में रोजगार भी पैदा होंगे।
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'मेक इन इंडिया' पर बड़ा बयान
'मेक इन इंडिया' पर भारत-यूरोपीय संघ FTA के असर के बारे में बात करते हुए, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि इससे 'मेक इन इंडिया' को बहुत बड़ा बढ़ावा मिलेगा। यह असल में 'मेक इन इंडिया' के लिए एक बहुत बड़ा बाजार खोलेगा– 27 देशों का बाजार, जो भारत के अपने बाजार से पांच गुना बड़ा है। इससे हमें बड़े पैमाने पर उत्पादन का फायदा मिलेगा, भारतीय ग्राहकों को बेहतर क्वालिटी और ज्यादा किफायती सामान मिलेंगे, और भारतीय सामान और सेवाओं को अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने में मदद मिलेगी।
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'भारत में बढ़ेगा रोजगार'
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज भारतीय ऑटो इंडस्ट्री बहुत अच्छा कर रही है। हमने 25-30 लाख रुपये तक की कीमत वाली कारों के लिए बाजार नहीं खोला है। हमने ऑटो इंडस्ट्री को पूरी तरह से सुरक्षित रखा है। अगर हम लग्जरी कारों को यहां बाजार में आने देते हैं, और उन्हें थोड़ा सा भी मार्केट शेयर मिलता है, तो वे आखिरकार यहाा भी बनने लगेंगी। यूरोपियन मैन्युफैक्चरर्स यह अच्छी तरह समझते हैं कि भारत में मैन्युफैक्चरिंग ज्यादा फायदेमंद है, जिससे भारत में रोजगार भी पैदा होंगे। धीरे-धीरे, जैसे-जैसे हम विकसित देशों के साथ इंटरनेशनल एग्रीमेंट करेंगे, विकसित देश बनने का भारत का सपना हकीकत के और करीब आएगा।
बांग्लादेश का क्यों किया जिक्र?
उन्होंने आगे कहा कि यूरोप अनियमित सब्सिडी नहीं देता है। वे ऐसे देश हैं जो फ्री ट्रेड में विश्वास करते हैं, लेकिन फेयर ट्रेड में भी। इनोवेशन के मामले में उनकी टेक्नोलॉजी आमतौर पर बहुत बेहतर होती है। भारत की ताकत उसके स्किल्ड लेबर, उसके टैलेंट में है और इसलिए वे जो प्रोडक्ट्स और सर्विसेज देते हैं, वे हमारे एक्सपोर्ट करने वाले प्रोडक्ट्स और सर्विसेज से बहुत अलग हैं। हम हमेशा यह कहानी सुनते थे कि बांग्लादेश या वियतनाम हमसे इतना ज़्यादा एक्सपोर्ट क्यों करते हैं। ऐसा इसलिए था क्योंकि बांग्लादेश, एक कम विकसित देश होने के कारण, उस पर जीरो ड्यूटी थी। वियतनाम का FTA था, इसलिए यूरोप में उस पर जीरो ड्यूटी थी। हम 12% तक ड्यूटी देते थे। अब यह पहले दिन से ही जीरो हो जाएगी। सभी टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स पर, जैसे ही FTA लागू होगा, जीरो ड्यूटी लगेगी। अब हम बराबरी के आधार पर मुकाबला कर सकते हैं, और मुझे कोई कारण नहीं दिखता कि हमें 30, 40, 50 बिलियन डॉलर के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट का लक्ष्य क्यों नहीं रखना चाहिए, जिससे किसी भी कीमत पर लाखों नौकरियां पैदा होंगी।
Created On :   30 Jan 2026 2:12 PM IST













