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चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी को लगा बड़ा झटका, लगभग 200 नेता जेडीयू में शामिल हुए

चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी को लगा बड़ा झटका, लगभग 200 नेता जेडीयू में शामिल हुए

डिजिटल डेस्क, पटना। चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) को गुरुवार को बिहार में एक बड़ा झटका लगा।  उसके लगभग 200 वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अपने पूर्व राज्य महासचिव केशव सिंह के नेतृत्व में पार्टी छोड़ दी और सत्तारूढ़ जद (यू) में शामिल हो गए। असंतुष्ट लोजपा नेताओं ने जद (यू) के राज्य कार्यालय में राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य आरसीपी सिंह की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली।

इससे पहले बुधवार को, लोजपा के वरिष्ठ नेता रामेश्वर चौरसिया, जिन्होंने सासाराम निर्वाचन क्षेत्र से 2020 का विधानसभा चुनाव लड़ा, ने पार्टी छोड़ दी। पूर्व विधायक चौरसिया पहले भाजपा के साथ थे और उन्होंने भाजपा के टिकट पर नोखा विधानसभा सीट तीन बार जीती थी। बीजेपी ने इस बार उन्हें चुनाव में टिकट नहीं दिया था जिस वजह से वे  विधानसभा चुनाव से ठीक पहले लोजपा में शामिल हो गए थे।

गुरुवार को जद (यू) में शामिल होने वाले अन्य प्रमुख लोजपा नेता, रामनाथ रमन, दीनानाथ क्रांति, एमडी एजाज़, श्रम सेल के प्रदेश अध्यक्ष कौशल सिंह कुशवाहा, ईबीसी सेल के पूर्व स्टेट प्रेसिडेंट पारसनाथ गुप्ता और सुभाष पासवान है। अपनी पार्टी में एलजेपी नेताओं का स्वागत करते हुए, आरसीपी सिंह ने कहा, 'जेडी (यू) देश में समाजवादी विचारधारा की एकमात्र पार्टी है जिसमें भाई-भतीजावाद और वंशवाद की राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है।' 

उन्होंने कहा, 'यदि किसी व्यक्ति में योग्यता और क्षमता है और वह कड़ी मेहनत भी करता है, तो वह जद (यू) में किसी भी स्तर तक पहुंच सकता है। पार्टी में भाई-भतीजावाद की कोई गुंजाइश नहीं है। आरसीपी ने यह भी कहा कि पार्टी के नेता और बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने अपने अच्छे कामों से बिहार को एक नई पहचान दी। नीतीश कुमार का एकमात्र 'धर्म' आम लोगों की सेवा करना है। पूरा बिहार उनका परिवार है।

JD (U) के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और पार्टी के प्रदेश महासचिव अनिल कुमार ने भी LJP नेताओं का JD (U) में स्वागत किया।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।