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ममता बनर्जी अपनी पारंपरिक सीट भवानीपुर से लड़ेंगी उपचुनाव, शोभन देव ने विधायक पद से इस्तीफा दिया

May 21st, 2021 18:48 IST
ममता बनर्जी अपनी पारंपरिक सीट भवानीपुर से लड़ेंगी उपचुनाव, शोभन देव ने विधायक पद से इस्तीफा दिया

डिजिटल डेस्क, कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए शोभन देव ने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है। वह ममता बनर्जी की पारंपरिक सीट भवानीपुर से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। इस बार ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ा था जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए 6 महीने के अंदर चुनाव जीतना जरूरी है।

शोभन देव ने कहा- मुख्यमंत्री दो बार भवानीपुर सीट से जीत चुकी हैं। सभी पार्टी नेताओं ने चर्चा की और जब मैंने यह सुना कि वह यहां से चुनाव लड़ना चाहती हैं तो मैंने सोचा कि मुझे यह सीट खाली कर देना चाहिए। किसी तरह का कोई दबाव नहीं है। किसी और में सरकार चलाने की साहस नहीं है। मैंने उनसे बात की। यह उनकी सीट थी। मैं तो सिर्फ इसकी रक्षा कर रहा था। वहीं विधानसभा स्पीकर बिमान बनर्जी ने कहा- मैंने उनसे यह पूछा कि वे अपनी इच्छा से या फिर जबरदस्ती अपना इस्तीफा दे रहे हैं। मैं पूरी तरह से संतुष्ट हूं और मैंने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।

कौन है शोभन देव?
शोभन देव ने साउथ कोलकाता के राशबिहारी निर्वाचन क्षेत्र से लगातार पांच बार जीत हासिल की है। पहली बार उन्होंने 1998 में चुनाव जीता था, ​​लेकिन 2021 के चुनावों में उन्हें भवानीपुर भेजा गया। 19 जनवरी को, बनर्जी ने नंदीग्राम में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए घोषणा की थी कि वह नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ेंगी। उन्होंने भवानीपुर को अपनी "बड़ी बहन" और नंदीग्राम को "छोटी" बहन बताया था। 

इसके बाद टीएमसी ने भवानीपुर से भरोसेमंद और अनुभवी शोभन देव चट्टोपाध्याय को चुनावी मैदान में उतारा। चट्टोपाध्याय ने 58 प्रतिशत वोट हासिल कर भाजपा के रुद्रनील घोष को लगभग 29,000 मतों के अंतर से हराया। वह ममता बनर्जी की पिछली कैबिनेट में बिजली मंत्री थे, लेकिन अब उन्हें कृषि विभाग दिया गया है। वहीं ममता बनर्जी को नंदीग्राम से हार का सामना करना पड़ा था। उन्हें शुभेंदु अधिकारी ने 1956 वोटों से हराया था।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।