Omar Abdullah on Iran War: US-ईरान में फिर तनाव बढ़ने पर जम्मू-कश्मीर के CM उमर अब्दुल्ला ने जताई चिंता, कहा - 'शुरू से ही गैर-कानूनी...'

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने चर्चा की। इस दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय हालात समेत कई अहम मुद्दों पर भी अपना रुख साफ किया। उन्होंने अमेरिका-ईरान के बीच तनाव को पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बताया। सीएम उमर ने कहा कि ईरान पर शुरूआत से हमले गैर-कानूनी रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने जम्मू-कश्मीर में बारिश और बाढ़ से हुए नुकसान, राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग, सिंधु जल संधि और अमरनाथ यात्रा को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। श्रीनगर के SKICC में एक कार्यक्रम में उमर अब्दुल्ला ने कहा कि हर विवाद का समाधान बातचीत और शांति के रास्ते से ही निकल सकता है।
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अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सीएम उमर अब्दुल्ला ने की चर्चा
ईरान और अमेरिका के बीच फिर से बढ़े तनाव पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इसका असर सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ेगा। सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा, "स्थायी युद्धविराम होना चाहिए और होर्मुज मुद्दे समेत सभी मसलों को शांति से सुलझाया जाना चाहिए।" उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में तनाव बढ़ाने के बजाय बातचीत के जरिए समाधान निकालना सबसे जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय तनाव का सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ता है और इसका नुकसान जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों को भी उठाना पड़ता है। सीएम ने कहा, "तेल की कीमतें बढ़ने की वजह से जम्मू-कश्मीर में सड़क बनाने जैसे छोटे-मोटे कामों पर असर पड़ा है। अब तनाव बढ़ने से तेल की कीमतें फिर बढ़ेंगी और इसका असर सब पर पड़ेगा।" उन्होंने कहा कि अगर तेल महंगा होता है तो विकास परियोजनाओं की लागत भी बढ़ जाती है।
जम्मू-कश्मीर में लगातार बारिश और अचानक आई बाढ़ के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से फोन पर बात कर हालात की जानकारी ली। सीएम ने कहा, "गृह मंत्री ने आज सुबह फोन किया था। हमने बादल फटने और भारी बारिश से हुए भारी नुकसान पर बात की। जिसने पिछले कुछ दिनों में पीर पंजाल इलाके के कुछ हिस्सों को बुरी तरह प्रभावित किया है।"
उन्होंने बताया कि गृह मंत्री ने राहत और बचाव कार्यों के लिए केंद्र की ओर से हर संभव मदद का भरोसा दिया है। साथ ही बुनियादी ढांचे को दोबारा बहाल करने के लिए सभी जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया गया है।
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जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने पर कही ये बात
राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर 19 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित मार्च के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक समर्थन जुटाने की कोशिश की जाएगी।उन्होंने बताया कि 170 सिविल सोसाइटी के सदस्यों और संगठनों ने उनसे मुलाकात कर राज्य का दर्जा जल्द बहाल करने की मांग का समर्थन किया है।
उमर अब्दुल्ला ने कहा, "सिर्फ़ INDIA गठबंधन ही क्यों, डॉ। साहब हर राजनीतिक दल को निमंत्रण भेजेंगे, चाहे वे विधानसभा का हिस्सा रहे हों या ऐसे दल जो न तो NDA का हिस्सा हैं और न ही INDIA ब्लॉक का।" उन्होंने कहा कि वे 19 जुलाई को होने वाले विरोध प्रदर्शन का समर्थन करेंगे।
पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को लेकर पूछे गए सवाल पर उमर अब्दुल्ला ने पाकिस्तान की धमकियों और आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की तरफ से इस मुद्दे पर कोई तनाव नहीं बढ़ाया गया है। साथ ही उन्होंने दोहराया कि यह समझौता कभी भी जम्मू-कश्मीर के हित में नहीं रहा।
उमर अब्दुल्ला ने कहा, "केंद्र सरकार उठाए जा रहे सवालों का जवाब देगी, लेकिन मेरा पक्का मानना है कि सिंधु जल समझौते का विरोध पहले दिन से ही होना चाहिए था, क्योंकि यह कभी भी जम्मू-कश्मीर के हित में नहीं था; बल्कि इसके कारण राज्य को नुकसान ही उठाना पड़ा है।"
अमरनाथ यात्रा के दौरान कुछ ही दिनों में बर्फ के शिवलिंग के पिघलने को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रकृति और सर्वोच्च शक्तियों से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत पहले से ही यात्रियों की संख्या और गतिविधियों पर सीमा तय की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत गतिविधियों और यात्रियों की संख्या पर पहले से ही सीमा तय है। अब अमरनाथ श्राइन बोर्ड को यह देखना है कि इसे जमीनी स्तर पर कैसे लागू किया जाए।"
Created On :   9 July 2026 1:50 AM IST












