विधानसभा चुनाव 2026: औसग्राम में अपनी खोई हुई चुनावी जमीन पाने की तलाश में लेफ्ट फ्रंट-कांग्रेस,वोट बैंक बढ़ने के बाद भी यहां TMC को यहां हराना बीजेपी को बड़ी चुनौती

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 1951 में अस्तित्व में आई औसग्राम विधानसभा सीट पश्चिम बंगाल के पुर्व बर्धमान जिले के अंतगर्त आती है। औसग्राम एससी रिजर्व्ड असेंबली सीट है। औसग्राम में 17 असेंबली इलेक्शन हुए है। पहले चुनाव में, यह दो मेंबर वाली सीट थी जिसमें से एक शेड्यूल्ड कास्ट के लिए रिजर्व्ड थी,1962 से यह एक सिंगल-सीट रिजर्व्ड सीट बन गई।
मौजूदा सीएम ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही है, वहीं बीजेपी , वाम दल और कांग्रेस नए गठबंधनों और रणनीतियों के साथ चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने 294 में से 213 सीटें जीतकर शानदार जीत दर्ज की थी, जबकि बीजेपी 77 पर सिमट गई थी। अबकी बार भी मुख्य मुकाबला बीजेपी और टीएमसी के बीच माना जा रहा है।
पश्चिम बंगाल की सरकार का कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो रहा है। नई सरकार चुनने के लिए समय पर विधानसभा चुनाव हो रहे है। इस चुनाव में स्थानीय मुद्दों के साथ साथ शिक्षा, विकास, बेरोजगारी, महंगाई और प्रदेश -केंद्र सरकार संबंध काफी अहम है। चुनाव आयोग ने 15 मार्च को पश्चिम बंगाल विधानससभा चुनाव 2026 के चुनावी कार्यक्रम की घोषणा की, यहां 2 फेज में 23 और 29 अप्रैल को वोटिंग होगी, पहले फेज में 152 सीटों और दूसरे फेज में 142 सीटों पर वोटिंग होगी जबकि मतगणना 4 मई 2026 को होगी।
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औसग्राम लंबे समय तक सीपीआईएम का गढ़ रहा, जिसने 1967 से 2011 तक लगातार 12 बार सीट पर जीत दर्ज की है। पहले दो चुनाव कांग्रेस ने जीते, 1962 में एक स्वतंत्र कैंडिडेट ने जीत का परचम लहराया था। 2016 में तृणमूल कांग्रेस ने लेफ्ट की मजबूत पकड़ तोड़ी और 2021 में भी सीट बरकरार रखी। इलाके के वोटिंग पैटर्न में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, लेफ्ट के वोट बैंक में गिरावट आई और बीजेपी के वोट परसेंट में तेजी से इजाफा हुआ ।
औसग्राम में 36.51 प्रतिशत अनुसूचित जाति और 12.67 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के वोटर हैं, जिसमें मुसलमानों की संख्या 31.10 प्रतिशत है। एससी एसटी और मुस्लमान तीनों की चुनाव में निर्णायक भूमिका होती है। पिछले एक दशक में टीएमसी ने ऑसग्राम को अपना गढ़ बना लिया है।
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इस सीट के विधानसभा चुनाव में कहा जा रहा है कि जब तक लेफ्ट फ्रंट-कांग्रेस गठंबधन अपनी खोई हुई जमीन वापस नहीं ले लेता और टीएमसी के वोट बैंक में सेंध नहीं लगा लेता, तब तक भाजपा के लिए 2026 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी को हराना एक बड़ी चुनौती होगी।
Created On :   27 March 2026 12:54 PM IST












