Raj Thackeray News: मोहन भागवत के भाषा वाले बयान पर MNS प्रमुख राज ठाकरे ने दी तीखी प्रतिक्रिया, भाषा पर आंदोलन करने को बताया 'बीमारी'

डिजिटल डेस्क, मुंबई। महाराष्ट्र में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर सियासत गरमा गई है। आरएसएस के 100 साल पूरे होने आयोजित हुए कार्यक्रम में भाषा को लेकर और उससे संबंधित आंदोलनों को लेकर मोहन भागवत ने बयान दिया है। इस पर एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे ने एक्स पर पोस्ट करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि भाषा को लेकर आग्रह रखना और उसके लिए समय-समय पर आंदोलन करना एक 'बीमारी' है। इसके अलावा उन्होंने कहा है कि इस कार्यक्रम में जो भी लोग आए थे वो नरेंद्र मोदी सरकार के डर से आए थे ना कि उनके उबाई प्रवचन सुनने आए थे। वे गलतफहमी से बाहर आ जाएं कि लोग उनके लिए आए थे।
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राज ठाकरे ने क्या कहा?
राज ठाकरे ने कहा है कि भाषा के आधार पर राज्यों का गठन किसी भी शौक में नहीं हुआ है। ये जनभावनाओं और पहचान से जुड़ा हुआ मुद्दा है। उन्होंने कहा कि देश के अधिकतर राज्यों में ये भावना अब भी मौजूद है। कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल और गुजरात में भी गहरी भाषाई और प्रांतीय पहचान अब भी मौजूद है।
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उन्होंने आगे कहा कि दूसरे राज्यों में बड़ी संख्या में लोगों का आकर स्थानीय संस्कृति और भाषा को नकारना ही टकराव की जड़ बनता है। जब स्थानीय भाषा का अपमान होता है, वोट बैंक की राजनीति होती है तो बाहरी दबदबा बढ़ जाता है। तब स्वाभाविक रूप से स्थानीय लोगों में तनाव भी पैदा होता है।
राज ठाकरे ने किया सवाल
राज ठाकरे ने पोस्ट में सवाल भी किया है कि क्या इसे भी बीमारी कहा जाएगा। उन्होंने गुजरात का उदाहरण देते हुए कहा है कि जब वहां पर उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों को खदेड़ा गया था, तब संघ प्रमुख ने समरसता का पाठ क्यों नहीं पढ़ाया था। राज ठाकरे का ये भी कहना है कि मराठी समाज सहनशील है, लेकिन कमजोर राजनीतिक नेतृत्व के चलते ऐसे बयान देने की हिम्मत नहीं होती है।
Created On :   10 Feb 2026 1:24 PM IST





