PM Modi failed Product Jab At Rahul Gandhi: राहुल गांधी के सपोर्ट में उतरे शशि थरूर, PM मोदी के 'फेल प्रोडक्ट' वाले बयान पर किया पलटवार

राहुल गांधी के सपोर्ट में उतरे शशि थरूर, PM मोदी के फेल प्रोडक्ट वाले बयान पर किया पलटवार
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लेकर दिए बयान पर पलटवार किया है। दरअसल, पीएम मोदी ने कहा था कि श्रीहरिकोटा से एक साल में उतने रॉकेट लॉन्च नहीं होते, जितनी बार कांग्रेस अपने नेता को लॉन्च करने की असफल कोशिशें करती है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लेकर दिए बयान पर पलटवार किया है। दरअसल, पीएम मोदी ने कहा था कि श्रीहरिकोटा से एक साल में उतने रॉकेट लॉन्च नहीं होते, जितनी बार कांग्रेस अपने नेता को लॉन्च करने की असफल कोशिशें करती है। इस पर थरूर ने कहा कि बीजेपी लगातार राहुल गांधी को नीचा दिखाने की कोशिश इसलिए कर रही है क्योंकि वह उनकी बढ़ती लोकप्रियता से घबराई हुई है।

शशि थरूर ने पीएम मोदी पर किया पलटवार

एनडीटीवी के एक कार्यक्रम में थरूर ने कहा कि बीजेपी का यह दावा बिल्कुल गलत है कि राहुल गांधी गंभीर नेता नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में राहुल गांधी ने देश के युवा मतदाताओं के बीच एक नया उत्साह और जोश भरा है। सांसद शशि थरूर ने बीजेपी को सलाह दी कि उन्हें राहुल गांधी को नजरअंदाज करने के बजाय इस बदलाव पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा, 'बीजेपी राहुल गांधी को गंभीरता से ले रही है और इसी वजह से उन्हें जनता के सामने एक नाकाम नेता के रूप में पेश करने में लगी हुई है।'

राहुल गांधी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 'वोट चोरी' का आरोप लगाते हुए विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों की अगुवाई कर रहे हैं। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दावा कि नेहरू-गांधी परिवार कांग्रेस के लिए खुद एक बोझ बन चुका है और पार्टी के वरिष्ठ नेता बंद कमरों में सत्ताधारी नेताओं से बातचीत के दौरान भी इस बात को स्वीकार करते हैं। हालांकि, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पीएम के इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया और अपना उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र बहुत मजबूत है।

राहुल गांधी का किया बचाव

शशि थरूर ने कहा, 'भले ही उन्होंने कई मौकों पर पार्टी लाइन से अलग विचार व्यक्त किए हों, लेकिन फिर भी वे पार्टी का हिस्सा हैं, पार्टी के लिए चुनाव प्रचार करते हैं और विदेश मामलों की संसदीय समिति के अध्यक्ष पद पर बने हुए हैं। अलग राय रखने मात्र से किसी को पार्टी में नजरअंदाज या खारिज नहीं किया जाता।

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