comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

पीकेएल-7 : कप्तान मनिंदर के बगैर ही मुम्बा को सेमीफाइनल में चुनौती देगा बंगाल

October 16th, 2019 08:47 IST
पीकेएल-7 : कप्तान मनिंदर के बगैर ही मुम्बा को सेमीफाइनल में चुनौती देगा बंगाल

अहमदाबाद, 15 अक्टूबर (आईएएनएस)। बंगाल वॉरियर्स टीम प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) के सातवें सीजन में बुधवार को यहां ट्रांसस्टेडिया स्थित ईका एरेना स्टेडियम में होने वाले दूसरे सेमीफाइनल मैच में अपने कप्तान मनिंदर सिंह के बिना ही 2015 की चैंपियन यू-मुम्बा के खिलाफ मैट पर उतरेगी।

मनिंदर को पंचकूला लेग के दौरान दबंग दिल्ली के खिलाफ चोट लग गई थी और वह तभी से ही टीम से बाहर चल रहे हैं। मनिंदर ने उस मैच में सुपर-10 लगाया था। यू-मुम्बा ने प्लेऑफ के एलिमिनटेर-2 में हरियाणा स्टीलर्स को हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया है जबकि बंगाल वॉरियर्स ग्रुप-चरण में दूसरे स्थान पर रहने के कारण सीधे सेमीफाइनल में पहुंची है।

बंगाल वॉरियर्स के कोच बीसी रमेश का कहना है कि मनिंदर की गैर मौजूदगी से टीम पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि उनके पास बैकअप है।

रमेश ने मैच की पूर्वसंध्या पर कहा, मनिंदर की गैर मौजूदगी से टीम पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि हमारे पास बैकअप है। इसके अलावा बलदेव और रिंकू डिफेंस में अच्छा कर रहे हैं। साथ ही के. प्ररापंजन, साकेश हेगडे और मोहम्मद नबीबक्श भी टीम के लिए बेहतर कर रहे हैं।

यू-मुम्बा की टीम पिछले पांच मैचों से अपराजित चल रही है। बंगाल वॉरियर्स ने इस सीजन में 14 मैच जीते हैं और पांच हारे हैं जबकि तीन टाई खेले हैं।

मनिंदर इस सीजन में 200 रेड प्वाइंटस लिए हैं। मनिंदर को इस सीजन में के परापंजन और मोहम्मद नबीबक्श तथा सुकेश हेगड़े से अच्छा सहयोग मिला है। इन तीनों रेडरों ने मिलकर इस सीजन में 75 से अधिक रेड प्वाइंटस लिए हैं।

दूसरी तरफ यू-मुम्बा के कोच संजीव कुमार कहना है कि उनकी टीम के खिलाड़ी बंगाल को रोकने लिए काफी हैं।

उन्होंने कहा, यू-मुम्बा के लिए अभिषेक, अर्जुन देशवाल और खुद फजल अतराचली ने पिछले मैच में हरियाणा स्टीलर्स के खिलाफ अच्छा किया है। प्लेऑफ में किए गए प्रदर्शन से इन खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ा हुआ है और मुझे उम्मीद है कि हम बंगाल के खिलाफ इसी तरह का प्रदर्शन दोहराएंगे।

कोच ने कहा, बंगाल की टीम काफी अनुभवी है और उनके रेडर और डिफेंडर काफी अच्छा खेल रहे हैं। इसलिए मेरा मानना है कि हमारे खिलाड़ी भी इस मैच को लेकर उत्साहित हैं और ऐसे में यह एक अच्छा मुकाबला होगा।

कमेंट करें
5wHFI
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।